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1 मुखी रुद्राक्ष माला – 1 mukhi rudraksh mala
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1 मुखी रुद्राक्ष माला – 1 mukhi rudraksh mala

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एक मुखी रुद्राक्ष को धारण करने से मनुष्‍य अपने आप को ईश्‍वर से जुड़ा हुआ महसूस करता है। ये रुद्राक्ष परम शिव की शक्‍ति का कारक है जो कि जीवन और मृत्‍यु के चक्र से मुक्‍ति दिलाता है। इसे मोक्ष प्राप्‍ति का सबसे सरल साधन कहा जा सकता है। एक मुखी रुद्राक्ष को धारण करने से आध्‍यात्‍मिक कार्यों में रूचि बढ़ती है और साथ ही धारणकर्ता को भौतिक सुखों की भी प्रा‍प्‍ति होती है।

इस रुद्राक्ष के प्रभाव से जातक को अपने जीवन में सफलता मिलती है। एक मुखी रुद्राक्ष नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करता है मन में अकारण भय को समाप्त करता है और शिव तत्व होने के कारण साधक का आत्मविश्वास और हिम्मत बढ़ती जाती है इसे धारण करने वाले साधक यदि साधना या जप करते हैं तो उनका तीसरा नेत्र भी जल्द जागृत होता है क्योंकि एक मुखी रुद्राक्ष शिव के तीसरे नेत्र को ही प्रदर्शित करता है।

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1 मुखी रुद्राक्ष माला के फायदे

  • यह रुद्राक्ष मन को स्पष्टता देता है और आपको ईश्वर से जोड़ता है
  • इसमें सहस्त्र चक्र का ध्यान रखा गया है जो स्वर्ग और पृथ्वी के बीच की कड़ी का प्रतीक है
  • एक मुखी रुद्राक्ष पहनने वाले को आध्यात्मिक और भौतिक लाभ प्रदान करता है
  • यह पहनने वाले की इच्छा को पूरा करता है
  • यह रुद्राक्षधारी के पापों और पिछले कर्मों को नष्ट कर देता है
  • यह कुछ दिनों में माइग्रेन को ठीक करने में मदद करता है
  • यह अवसाद, चिंता और ओसीडी को ठीक करने में मदद करता है
  • यह न्यूरोटिक विकारों में मदद करता है
  • यह मन की शांति पाने में मदद करता है
  • यह एकाग्रता को बढ़ाने में मदद करता है
  • यह आपको अपनी इंद्रियों पर पूर्ण नियंत्रण रखने में मदद करता है
  • यह रतौंधी को ठीक करने में मदद करता है
  • यह श्वसन रोगों को ठीक करने में मदद करता है
  • यह क्रूर ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव को दूर करने में मदद करता है
  • विशेष रूप से जन्म कुंडली में सूर्य के नकारात्मक प्रभाव को दूर करने के लिए पहना जाता है
  • यह पहनने वाले को महत्वाकांक्षी बनाता है
  • जब घर में रखा जाता है तो यह पूरे परिवार में शांति और सद्भावना को पैदा करता है
  • यह जीवन से जटिलताओं को दूर करता है
  • यह गुस्से को नियंत्रित करने में मदद करता है
  • रुद्राक्ष धारण करने वाले को नेतृत्व गुणों के साथ और तनाव को दूर करने में मदद मिलती है

राशि के अनुसार धारण करें रुद्राक्ष 

मेष राशि: मेष राशि के जातकों को एक मुखी रुद्राक्ष दारण करने की सलाह दी जाती है। इसके साथ ही तीन मुखी या पांच मुखी रुद्राक्ष धारण करना भी शुभ माना गया है।

वृष राशि: वृषभ राशि के जातक अगर लाइफ में शुभ फलों की प्राप्ति का इंतजार कर रहे हैं, तो चार मुखी, छह मुखी और चौदह मुखी रुद्राक्ष धारण कर सकते हैं।

मिथुन राशि: मान्यता है कि इस राशि के जातक रुद्राक्ष की प्राण-प्रतिष्ठा करवाकर चार, पांच या तेरह मुखी रूद्राक्ष धारण कर सकते हैं। इससे सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

कर्क राशि: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कर्क राशि के लोग तीन, पांच या फिर गौरी शंकर रुद्राक् भी धारण कर सकते हैं।

सिंह राशि: इस राशि के जातकों को एक मुखी, तीन या पांच मुखी रुद्राक्ष धारण करने की सलाह दी जाती है। इससे शुभ फलों की प्राप्ति होती है।

कन्या राशि: इस राशि के जातक जीवन में सकारात्मक परिणाम और भगवान शिव की  कृपा पाने के लिए चार, पांच या तेरह मुखी रुद्राक्ष धारण करें।

तुला राशि: इन्हें चार, छः अथवा चौदह मुखी रुद्राक्ष पहनना शुभ रहता है। इसलिए शुभ फलों की प्राप्ति के लिए ये धारण करें।

वृश्चिक राशि: जीवन ने सुख-समृद्धि बनाए रखने के लिए वृश्चिक राशि के लोगों को तीन, पांच मुखी या गौरी-शंकर रुद्राक्ष धारण करना चाहिए।

धनु राशि: एक मुखी, तीन या पांच मुखी रुद्राक्ष धारण करना धनु राशि वालों के लिए शुभ माना गया है।

मकर राशि: मकर राशि के जातक भगवान शिव की कृपा पाने  के लिए चार मुखी, छः या चौदह मुखी रुद्राक्ष धारण कर सकते हैं। ये रुद्राक्ष इनके लिए शुभ फलदायी होते हैं।

कुंभ राशि: इस राशि के जातक चार, छः या फिर चौदह मुखी रूद्राक्ष धारण करें।

मीन राशि: जीवन में सुख-शांति बनाए रखने के लिए इस राशि के जातकों को तीन, पांच या गौरी शंकर रुद्राक्ष धारण करने की सलाह दी जाती है।

सोते समय नहीं पहनना चाहिए रुद्राक्ष

रुद्राक्ष पहन कर कभी सोना भी नहीं चाहिए। जब आप सोने के लिए जाते हैं तो रुद्राक्ष को उतार कर इसे तकिए के नीचे या मंदिर वाली जगह पर रख दें। तकिए के नीचे रुद्राक्ष रखने से बुरे सपने व नींद टूटने की समस्या से छुटकारा मिलता है।

रुद्राक्ष को कभी भी काले धागे में धारण नहीं करना चाहिए इसे हमेशा लाल या पीले रंग के धागे में ही धारण करें। रुद्राक्ष बेहद पवित्र होता है इसलिए इसे कभी अशुद्ध हाथों से न छुएं और स्नान करने के बाद शुद्ध होकर ही इसे धारण करें। रुद्राक्ष धारण करते समय शिव जी के मंत्र ऊं नमः शिवाय का उच्चारण करना चाहिए।

रुद्राक्ष की माला को जागृत कैसे करें

मेरू मणि पर स्पर्श करते हुए ऊं अघोरे भो त्र्यंबकम् मंत्र का जाप करें। यदि एक ही रुद्राक्ष सिद्ध करना हो तो पहले उसे पंचगव्य से स्नान कराएं। इस के बाद गंगा स्नान कराएं. बाद में उसकी षोडशोपचार पूजा करें, फिर उसे चांदी के डिब्बे में रखें।

रुद्राक्ष किसे नहीं पहनना चाहिए

नवजात के जन्म के दौरान या जहां नवजात शिशु का जन्म होता है वहां भी रुद्राक्ष से बचना चाहिए। संभोग के समय कभी भी रुद्राक्ष धारण नहीं करना चाहिए। महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान या मासिक धर्म होने पर रुद्राक्ष नहीं पहनना चाहिए। रुद्राक्ष को हमेशा साफ रखें।

रुद्राक्ष कितने बजे पहनना चाहिए

अगर, फिर भी आप इसे धारण करना चाहते हैं तो पहले खुद को शराब और तामसिक भोजन का त्याग करने के लिए तैयार कर लीजिए, अन्यथा आपको इसका फायदा नहीं मिलेगा। सोते समय उतार दें रुद्राक्ष सोने से पहले रुद्राक्ष को उतार देना चाहिए। माना जाता है कि सोते समय शरीर अशुद्ध रहता है।

1 मुखी रुद्राक्ष माला का कीमत क्या है

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कितने प्रकार के 3 मुखी रुद्राक्ष होते है

सफेद एक मुखी रुद्राक्ष- इस रंग के रुद्राक्ष को धारण करने वाले व्यक्ति को शारीरिक स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है और इसे धारण करने वाले के जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।

लाल एक मुखी रुद्राक्ष- ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति इस रुद्राक्ष को धारण करता है या उसकी पूजा करता है, उसे ब्रह्महत्या जैसे गंभीर पापों से मुक्ति मिल जाती है।

पीला एक मुखी रुद्राक्ष- ऐसा माना जाता है कि इस रंग के रुद्राक्ष की पूजा करने से वैभवपूर्ण जीवन और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

काला एक मुखी रुद्राक्ष- जो लोग इस रुद्राक्ष को पहनते हैं उन्हें स्वास्थ्य लाभ मिलता है, सकारात्मक दृष्टिकोण, धन का विकास होता है और जीवन की सभी बाधाओं को दूर करता है।

एक मुखी रुद्राक्ष मंत्र :-

पदमपुराण के अनुसार मंत्र- “O द्रिशं नमः”

स्कंदपुराण के अनुसार मंत्र- “ओम एम नमः”

शिवपुराण के अनुसार मंत्र- “O ह्रीं नमः”

योगसार के अनुसार मंत्र- “O ब्रह्मं नमः”

एक मुखी रुद्राक्ष का महत्व :-

  • यह भक्ति की ईश्वरीय वस्तु है।
  • यह पृथ्वी और स्वर्ग के बीच संबंध का प्रतिनिधित्व करता है।
  • यह भगवान शिव की ऊर्जा का प्रतीक है, जीवन चक्र से मुक्ति देता है।
  • इसे पहनने के बाद पहनने वाले को भौतिक और आध्यात्मिक लाभ मिलते हैं।

इसे कैसे पहनें

सोमवार की सुबह जल्दी उठें फिर स्नान करें, साफ कपड़े पहनें और उस स्थान को साफ करें जहां आप भगवान की पूजा करते हैं। इसके बाद तांबे का एक बर्तन लें और उसमें गंगाजल रखें और रुद्राक्ष को धीरे से धो लें। अब रुद्राक्ष पर गंगाजल छिड़कें। इसे ऊपर वर्णित विशेष बीज मंत्र का जाप करने के बाद सफेद रेशम या ऊन के धागे में पहना जा सकता है।

ऐसे हुई रुद्राक्ष की उत्‍पत्ति

रुद्राक्ष को भगवान शिव का अंश माना जाता है। इस वजह से इसका धार्मिक महत्‍व तो है ही साथ ही ज्‍योतिष में भी इसे बहुत खास माना जाता है। आज हम बात करने जा रहे हैं एकमुखी रुद्राक्ष के बारे में। वैसे तो असली एकमुखी रुद्राक्ष का मिल पाना बहुत ही मुश्किल होता है। रुद्राक्ष की उत्‍पत्ति को लेकर पुराणों में एक कथा बताई गई है। इसके अनुसार एक बार तप करते वक्‍त महादेव जब क्षुब्‍द हो गए तो उनके नेत्रों से कुछ बूंदें धरती पर गिरी जिनसे रुद्राक्ष की उत्‍पत्ति हुई। माना जाता है कि रुद्राक्ष को पहनने से जातक को असीम शक्ति प्राप्‍त होती है।

ऐसा होता है एकमुखी रुद्राक्ष का आकार

एकमुखी रुद्राक्ष काजू के आकार का या फिर अर्द्धचंद्रमा के आकार का होता है। कई बार यह गोलाकार आकार में भी मिल जाता है। एकमुखी रुद्राक्ष के मुख पर प्राकृतिक रूप से केवल एक रेखा होती है। ऐसा माना जाता है कि एकमुखी रुद्राक्ष को धारण करने से व्‍यक्ति के सभी पुराने पाप धुल जाते हैं।

एकमुखी रुद्राक्ष के स्‍वामी

ज्‍योतिष के अनुसार एकमुखी रुद्राक्ष के स्‍वामी ग्रहों के परिवार के मुखिया सूर्यदेव बताए गए हैं। अगर आपकी कुंडली में किसी वजह से सूर्य कमजोर पड़ रहे हैं तो एकमुखी रुद्राक्ष पहनना आपके लिए बहुत फायदेमंद हो सकता है।

नेताओं की पहली पसंद एकमुखी रुद्राक्ष

रुद्राक्ष के बारे में माना जाता है कि यह जातक को बेहतरीन लीडरशिप क्षमता प्रदान करता है। इसलिए अधिकांश नेता एकमुखी रुद्राक्ष पहनना पसंद करते हैं। एकमुखी रुद्राक्ष के बारे में यह भी माना जाता है कि इसको पहनने वाले पर मां लक्ष्‍मी भी विशेष कृपा होती है। जो कि पहनने वाले को धन और समृद्धि प्रदान करती हैं। इस रुद्राक्ष को पहनने से व्‍यक्ति का आत्‍मविश्‍वास बढ़ता है।

दिल के रोग से करता है रक्षा

सूर्य का संबंध हृदय के स्‍वास्‍थ्‍य से होता है। एकमुखी रुद्राक्ष को धारण करने से सूर्य की दुर्बलता की वजह से होने वाली हृदय की बीमारियां दूर रहती हैं। इसके साथ ही एकमुखी रुद्राक्ष को पहनने से सिरदर्द, मानसिक रोग, हड्डियों की कमजोरी और आंख की रोशनी से जुड़ी समस्‍याएं भी दूर रहती हैं।

एकमुखी रुद्राक्ष को कैसे और कहां पहनें

एकमुखी रुद्राक्ष को गर्दन में लाल धागे में पिरोकर पहनें। या फिर इसे सोने और चांदी की चेन में भी पहना जा सकता है। इसे रविवार के दिन धारण करना चाहिए। रविवार को स्‍नान करके इस एकमुखी रुद्राक्ष को गंगाजल से पवित्र करके धारण करें।