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सात मुखी रुद्राक्ष माला – 7 mukhi rudraksh mala
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सात मुखी रुद्राक्ष माला – 7 mukhi rudraksh mala

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भारतीय संस्कृति में रुद्राक्ष धारण करने का बड़ा ही महत्व है। साक्षात् भगवान शिव के स्वरुप कहे जाने वाले रुद्राक्ष में बहुत से दैवीय गुण होते है। 7 मुखी रुद्राक्ष की अधिपति देवता माता लक्ष्‍मी है तथा इस रुद्राक्ष को साक्षात माता लक्ष्मी का स्वरुप माना जाता है। इस रुद्राक्ष का प्रभाव जातक के जीवन पर कई सालों तक बना रहता है। ऐसी मान्यता है की 7 मुखी रुद्राक्ष से बनी यह माला पहनने से मां लक्ष्‍मी की भरपूर कृपा बरसती है तथा शनि देव की भी कृपा बनी रहती है।

7 मुखी रुद्राक्ष से बनी माला धारण करने से धन- संपदा प्राप्त होती है। 7 मुखी रुद्राक्ष से बनी माला धारण करने से ऐश्वर्य में लगातार वृद्धि होती है तथा गुप्तधन की प्राप्ति या अचानक धनलाभ होता है। यह पूरे परिवार को रुपए-पैसे की तंगी से बचाता है और घर में बरकत होती है। 7 मुखी रुद्राक्ष आज के इस आधुनिक दौर में प्रत्येक मनुष्य के लिए अति आवश्यक है, इसलिए हमने इसके लाभ को आप तक पहुँचाने के लिए ही इस माला को हमारे अनुभवी ज्योतिषाचार्यों की सहायता से तैयार किया है।

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7 मुखी रुद्राक्ष माला के फायदे

  • सात मुखी रुद्राक्ष में 7 दिव्य सर्प निवास करते हैं जो इसे धारण करने वाले को अपार शक्ति से जोड़ता है।
  • यह शनि के क्रूर प्रभाव को कम करता है जो खुशी और विकास को प्रतिबंधित करता है
  • यह पहनने वाले को जहर के प्रभाव से दूर रखता है
  • यह मांसपेशियों के दर्द औऱ गठिया जैसी समस्याओं को ठीक करता है
  • यह धन को स्थिर रखने में मदद करता है
  • यह वित्तीय आय बढ़ाने में मदद करता है
  • यह हितों औऱ कलात्मक कौशल की समझ को बढ़ाता है
  • यह धारक के जीवन में सुख-समृद्धि और संतोष लाता है
  • यह जीवन में दुख और दुर्भाग्य को दूर करने में मदद करता है
  • यह शुक्र ग्रह के प्रभाव को कम करता है।
  • यह रुद्राक्षधारी के जीवन में आशा और सकारात्मक महसूस करने में मदद करता है
  • यह जीवन में नए अवसरों के द्वार को खोलने में मदद करता है
  • यह पाचन संबंधी समस्याओं को ठीक करने में मदद करता है
  • यह मधुमेह जैसी समस्याओं को दूर करने में मदद करता है
  • यह शरीर में मणिपुर चक्र से जुड़ता है, जो साहस और आत्म-सम्मान को प्रज्जवलित करता है
  • यह पहनने वाले को वित्तीय सुरक्षा प्राप्त करने में मदद करता है
  • यह रचनात्मक और अंतर्ज्ञान को बढ़ान में मदद करता है
  • शनि की साढ़े साती या ढैय्या के समय सात मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए। इस रुद्राक्ष को धारण करने पर शनिदेव खुश रहते हैं।
  • यह दिल की समस्याओं का इलाज करने मदद करता है
  • यह यौन संबंधी समस्याओं के इलाज में मदद करता है
  • यह धारक के लिए रोजगार के अवसरों और संभावनाओं को खोलने में मदद करता है।

7 मुखी रुद्राक्ष माला धारण करने की विधि

किसी भी रुद्राक्ष को पहनने से पहले अपनी जन्मकुंडली का विश्लेषण किसी अनुभवी ज्योतिषी से अवश्य कराएं और उनसे जाने कि आप रुद्राक्ष पहन सकते हैं या नहीं। इसके अलावा रुद्राक्ष को अपने पैसों से ही खरीदें वरना आपको लाभ प्राप्त नहीं हो सकेगा। ज्योतिषी के निर्देशों का पालन करें औऱ इस चमत्कारी मनका से लाभ उठाएं।

पहनने का दिन: 7 मुखी रुद्राक्ष को शनिवार को पहनने के लिए कहा जाता है क्योंकि इसका मुख्य उद्देश्य शनि के प्रभाव को कम करना है। दूसरी ओर यदि आप इसे शुक्रवार को पहनते हैं तो यह जीवन में समृद्धि को आकर्षित करता है। इसे सुर्योदय से पहले उठकर स्नानादि करने के पश्चात घर की पूर्व दिशा में बैठकर  “ॐ हूँ नमः” का 108 बार जाप करना चाहिए। इसके अलावा इसे धारण करने के पश्चात प्रतिदिन पांच माला इस मंत्र का जाप करना चाहिए।

सभी 7 मुखी रुद्राक्ष के बारे में जानने के लिए जीवन मंत्रा तक पहुँचें और अनुभवी ज्योतिषाचार्य से जन्म कुंडली के अनुसार रुद्राक्ष आदि से संबंधित सर्वोत्तम सलाह लें।

राशि के अनुसार धारण करें रुद्राक्ष 

मेष राशि: मेष राशि के जातकों को एक मुखी रुद्राक्ष दारण करने की सलाह दी जाती है। इसके साथ ही तीन मुखी या पांच मुखी रुद्राक्ष धारण करना भी शुभ माना गया है।

वृष राशि: वृषभ राशि के जातक अगर लाइफ में शुभ फलों की प्राप्ति का इंतजार कर रहे हैं, तो चार मुखी, छह मुखी और चौदह मुखी रुद्राक्ष धारण कर सकते हैं।

मिथुन राशि: मान्यता है कि इस राशि के जातक रुद्राक्ष की प्राण-प्रतिष्ठा करवाकर चार, पांच या तेरह मुखी रूद्राक्ष धारण कर सकते हैं। इससे सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

कर्क राशि: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कर्क राशि के लोग तीन, पांच या फिर गौरी शंकर रुद्राक् भी धारण कर सकते हैं।

सिंह राशि: इस राशि के जातकों को एक मुखी, तीन या पांच मुखी रुद्राक्ष धारण करने की सलाह दी जाती है। इससे शुभ फलों की प्राप्ति होती है।

कन्या राशि: इस राशि के जातक जीवन में सकारात्मक परिणाम और भगवान शिव की  कृपा पाने के लिए चार, पांच या तेरह मुखी रुद्राक्ष धारण करें।

तुला राशि: इन्हें चार, छः अथवा चौदह मुखी रुद्राक्ष पहनना शुभ रहता है। इसलिए शुभ फलों की प्राप्ति के लिए ये धारण करें।

वृश्चिक राशि: जीवन ने सुख-समृद्धि बनाए रखने के लिए वृश्चिक राशि के लोगों को तीन, पांच मुखी या गौरी-शंकर रुद्राक्ष धारण करना चाहिए।

धनु राशि: एक मुखी, तीन या पांच मुखी रुद्राक्ष धारण करना धनु राशि वालों के लिए शुभ माना गया है।

मकर राशि: मकर राशि के जातक भगवान शिव की कृपा पाने  के लिए चार मुखी, छः या चौदह मुखी रुद्राक्ष धारण कर सकते हैं। ये रुद्राक्ष इनके लिए शुभ फलदायी होते हैं।

कुंभ राशि: इस राशि के जातक चार, छः या फिर चौदह मुखी रूद्राक्ष धारण करें।

मीन राशि: जीवन में सुख-शांति बनाए रखने के लिए इस राशि के जातकों को तीन, पांच या गौरी शंकर रुद्राक्ष धारण करने की सलाह दी जाती है।

7 मुखी रुद्राक्ष माला का कीमत क्या है

असली 7 मुखी रुद्राक्ष माला की कीमत आपको 2000 से 2500 तक मिल जाता है अगर आप हमरी वेब साइट से खरीदते है तो आपको 7 मुखी रुद्राक्ष माला 1,650.00 का मिल जाता है। 100 % ओरिजिनल साथ ही गोवेर्मेंट अप्रूवल सर्टिफिकेट लैब टेस्टेड।

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7 मुखी रुद्राक्ष माला के नियम

  • सुबह और शाम कम से कम 9 बार ‘ ऊं हूं नम:’ मंत्र का जाप करें।
  • रुद्राक्ष को धारण करने के बाद झूठ ना बोलें और शराब, मांस आदि का सेवन ना करें।
  • सोमवार और शनिवार के दिन शिव मंदिर जाएं या घर पर ही इन दिनों पर शिव की उपासना करें।
  • मुखी रुद्राक्ष भौतिक संकटों और दैहिक रोग को समाप्त करने में लाभाकरी माना जाता है।
  • यह रुद्राक्ष मधुमेह, स्तनशिथिलता, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, एसिडिटी जैसे रोगों से बचाव करता है।
  • 7 मुखी रुद्राक्ष माला के फायदे में एक फायदा है कि यह व्यक्ति के तनाव को कम कर मानसिक स्थिरता प्रदान करता है।
  • जीवन से नकारात्मकता को दूर कर अध्यात्म की ओर जाने के लिए प्रेरित करता है।
  • यदि जातक की कुंडली में बृहस्पति का प्रतिकूल प्रभाव है तो उसे पंचमुखी रुद्राक्ष अवश्य ही धारण करना चाहिए।
  • रुद्राक्ष को तुलसी की माला की तरह की पवित्र माना जाता है। इसलिए इसे धारण करने के बाद मांस-मदिरा से दूरी बना लेना चाहिए।
  • एक महत्वपूर्ण बात यह है कि रुद्राक्ष को कभी भी श्मशान घाट पर नहीं ले जाना चाहिए। इसके अलावा नवजात के जन्म के दौरान या जहां नवजात शिशु का जन्म होता है वहां भी रुद्राक्ष ले जाने से बचना चाहिए।
  • महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान रुद्राक्ष नहीं पहनना चाहिए।
  • रुद्राक्ष को बिना स्नान किए नहीं छूना चाहिए। स्नान करने के बाद शुद्ध करके ही इसे धारण करें।
  • रुद्राक्ष धारण करते समय भगवान शिव का मनन करें।इ सके साथ ही शिव मंत्र ‘ऊँ नम: शिवाय’ का जाप करते रहें।
  • रुद्राक्ष को हमेशा लाल या फिर पीले रंग के धागे में पहनना चाहिए। कभी भी इसे काले रंग के धागे में नहीं पहनना चाहिए। इससे अशुभ प्रभाव पड़ता है।
  • रुद्राक्ष माला को आपने धारण कर लिया है तो अब इसे किसी और को बिल्कुल न दें। इसके साथ ही दूसरे की दी गई रुद्राक्ष को बिल्कुल धारण न करें।
  • रुद्राक्ष की माला को हमेशा विषम संख्या में पहनना चाहिए। लेकिन 27 मनकों से कम नहीं होनी चाहिए।
  • रुद्राक्ष को हमेशा साफ रखें। मनके के छिद्रों में धूल और गंदगी जम सकती है। जितनी बार हो सके इन्हें साफ करें.. अगर धागा गंदा या क्षतिग्रस्त हो जाता है, तो इसे बदल दें। सफाई के बाद रुद्राक्ष को गंगाजल से धो लें। यह इसकी पवित्रता बनाए रखने में मदद करता है।
  • रुद्राक्ष गर्म प्रकृति के होते हैं। जिसके कारण कुछ लोगों को एलर्जी की समस्या हो जाती है। इसलिए बेहतर है कि इसका उपयोग न करें बल्कि पूजा घर में रखकर रोजाना पूजा करें।
  • रुद्राक्ष को तुलसी की माला की तरह की पवित्र माना जाता है। इसलिए इसे धारण करने के बाद मांस-मदिरा से दूरी बना लेना चाहिए।
  • एक महत्वपूर्ण बात यह है कि रुद्राक्ष को कभी भी श्मशान घाट पर नहीं ले जाना चाहिए। इसके अलावा नवजात के जन्म के दौरान या जहां नवजात शिशु का जन्म होता है वहां भी रुद्राक्ष ले जाने से बचना चाहिए।
  • महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान रुद्राक्ष नहीं पहनना चाहिए।
  • रुद्राक्ष को बिना स्नान किए नहीं छूना चाहिए। स्नान करने के बाद शुद्ध करके ही इसे धारण करें।
  • रुद्राक्ष धारण करते समय भगवान शिव का मनन करें।इ सके साथ ही शिव मंत्र ‘ऊँ नम: शिवाय’ का जाप करते रहें।
  • रुद्राक्ष को हमेशा लाल या फिर पीले रंग के धागे में पहनना चाहिए। कभी भी इसे काले रंग के धागे में नहीं पहनना चाहिए। इससे अशुभ प्रभाव पड़ता है।
  • रुद्राक्ष माला को आपने धारण कर लिया है तो अब इसे किसी और को बिल्कुल न दें। इसके साथ ही दूसरे की दी गई रुद्राक्ष को बिल्कुल धारण न करें।
  • रुद्राक्ष की माला को हमेशा विषम संख्या में पहनना चाहिए। लेकिन 27 मनकों से कम नहीं होनी चाहिए।
  • रुद्राक्ष को हमेशा साफ रखें। मनके के छिद्रों में धूल और गंदगी जम सकती है। जितनी बार हो सके इन्हें साफ करें.. अगर धागा गंदा या क्षतिग्रस्त हो जाता है, तो इसे बदल दें। सफाई के बाद रुद्राक्ष को गंगाजल से धो लें। यह इसकी पवित्रता बनाए रखने में मदद करता है।
  • रुद्राक्ष गर्म प्रकृति के होते हैं। जिसके कारण कुछ लोगों को एलर्जी की समस्या हो जाती है। इसलिए बेहतर है कि इसका उपयोग न करें बल्कि पूजा घर में रखकर रोजाना पूजा करें।

सोते समय नहीं पहनना चाहिए रुद्राक्ष

रुद्राक्ष पहन कर कभी सोना भी नहीं चाहिए। जब आप सोने के लिए जाते हैं तो रुद्राक्ष को उतार कर इसे तकिए के नीचे या मंदिर वाली जगह पर रख दें। तकिए के नीचे रुद्राक्ष रखने से बुरे सपने व नींद टूटने की समस्या से छुटकारा मिलता है।

रुद्राक्ष को कभी भी काले धागे में धारण नहीं करना चाहिए इसे हमेशा लाल या पीले रंग के धागे में ही धारण करें। रुद्राक्ष बेहद पवित्र होता है इसलिए इसे कभी अशुद्ध हाथों से न छुएं और स्नान करने के बाद शुद्ध होकर ही इसे धारण करें। रुद्राक्ष धारण करते समय शिव जी के मंत्र ऊं नमः शिवाय का उच्चारण करना चाहिए।

रुद्राक्ष की माला को जागृत कैसे करें

मेरू मणि पर स्पर्श करते हुए ऊं अघोरे भो त्र्यंबकम् मंत्र का जाप करें। यदि एक ही रुद्राक्ष सिद्ध करना हो तो पहले उसे पंचगव्य से स्नान कराएं। इस के बाद गंगा स्नान कराएं. बाद में उसकी षोडशोपचार पूजा करें, फिर उसे चांदी के डिब्बे में रखें।

रुद्राक्ष किसे नहीं पहनना चाहिए

नवजात के जन्म के दौरान या जहां नवजात शिशु का जन्म होता है वहां भी रुद्राक्ष से बचना चाहिए। संभोग के समय कभी भी रुद्राक्ष धारण नहीं करना चाहिए। महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान या मासिक धर्म होने पर रुद्राक्ष नहीं पहनना चाहिए। रुद्राक्ष को हमेशा साफ रखें।

रुद्राक्ष कितने बजे पहनना चाहिए

अगर, फिर भी आप इसे धारण करना चाहते हैं तो पहले खुद को शराब और तामसिक भोजन का त्याग करने के लिए तैयार कर लीजिए, अन्यथा आपको इसका फायदा नहीं मिलेगा। सोते समय उतार दें रुद्राक्ष सोने से पहले रुद्राक्ष को उतार देना चाहिए। माना जाता है कि सोते समय शरीर अशुद्ध रहता है।

7 मुखी रुद्राक्ष यदि शनिवार के दिन धारण करने के लिए कहा जाए तो इसका मुख्य उद्देश्य शनि ग्रह के अशुभ प्रभाव का उपचार करना है। वहीं अगर आप इसे शुक्रवार के दिन पहनते हैं तो यह जीवन में समृद्धि को आकर्षित करता है।

सात मुखी रुद्राक्ष माला के लाभ

  • सात मुखी रुद्राक्ष माला के प्रभाव से व्यक्‍ति की आय में बढ़ोत्तरी होती है और गरीबी मिटती है।
  • समृद्धि, प्रॉपर्टी और सम्‍मान में वृद्धि होती है।
  • 7 मुखी रुद्राक्ष माला के प्रभाव से अचानक आर्थिक लाभ मिल सकता है।
  • 7 मुखी रुद्राक्ष शनि देव से संबंधित होता है। इसलिए इस माला को धारण करने वाले व्‍यक्‍ति को शनि देव से जुड़े शुभ प्रभाव मिलते हैं।
  • इस माला से मानव शरीर के सात धातुओं का संरक्षण किया जा सकता है। ये पाचन में सुधार में भी मदद करती है।
  • आय के नए स्रोत खुलते हैं जिससे धारणकर्ता की आर्थिक स्थिति बेहतर हो पाती है।
  • जोड़ों के दर्द और तंत्रिका तंत्र से जुड़े विकारों को दूर करने के लिए ये माला बहुत प्रभावी है।
  • इससे मानसिक शांति भी मिलती है और मन की सारी उलझनें दूर होती हैं।

कैसे धारण करें सात मुखी रुद्राक्ष माला

इस 7 मुखी रुद्राक्ष माला को धारण करने के बाद आपको सफलता और प्रयासों का परिणाम मिलना शुरु हो जाएगा। दिन में तीन या पांच बार इस माला से ‘ऊं हूं नम:’ मंत्र का रोज़ जाप करें।

इससे सात मुखी रुद्राक्ष माला का शुभ प्रभाव बढ़ेगा और धारणकर्ता के सम्‍मान और समृद्धि में वृ‍द्धि होगी।

कहां से लें

7 मुखी रुद्राक्ष को आप JeewanMantra से प्राप्‍त कर सकते हैं। इसे हमारे पंडित जी द्वारा पवित्र मंत्रों से अभिमंत्रित करने के बाद आपके पास भेजा जाएगा।

अभिमंत्रित और सर्टिफाइड सात मुखी रुद्राक्ष माला ऑर्डर करने के लिए इस नंबर पर व्‍हॉट्सऐप मैसेज करें – 9354299817