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श्री लंका नीलम रत्‍न – Ceylon Mines Blue Sapphire Stone
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श्री लंका नीलम रत्‍न – Ceylon Mines Blue Sapphire Stone

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श्री लंका नीलम को शनि देव का प्रिय रत्‍न माना जाता है। इस रत्‍न को पहनने से व्‍यक्‍ति के मन से लालच और बेईमानी दूर होती है। इस स्‍टोन को पहनने से व्‍यक्‍ति की कुशलता बढ़ती है और वो मुश्किल से मुश्किल काम को भी आसानी से कर पाता है। ये रत्‍न व्‍यक्‍ति को सही निर्णय लेने में सक्षम बनाता है।

अगर आपको निर्णय लेने में दिक्‍कत होती या आप असमंजस में रहते हैं तो आपकी इस समस्‍या को शनि का रत्‍न दूर कर सकता है।

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नौ रत्‍नों में नीलम को सबसे शक्‍तिशाली रत्‍न माना जाता है। ये न्‍याय के देवता शनि ग्रह का रत्‍न है। ऐसा माना जाता है कि इस रत्‍न को पहनने से रातोंरात व्‍यक्‍ति रंक से राजा बन सकता है क्‍योंकि श्री लंका नीलम रत्‍न की शक्‍ति ही ऐसी है कि ये गरीब से अमीर बना सकता है।

अंग्रेजी में इस स्‍टोन को ब्‍लू सैफायर कहा जाता है। वैसे तो सैफायर कई रंगों में आता है लेकिन नीले रंग का सैफायर सबसे तेज असर दिखाता है और इसे सबसे अच्‍छी क्‍वालिटी का भी माना जाता है।

आपको जानकार हैरानी होगी कि श्री लंका नीलम न केवल ज्‍योतिषीय महत्‍व रखता है बल्कि इसका ऐतिहासिक महत्‍व भी है। कई वर्षों पूर्व ‘ओरेकल’ इस रत्‍न के सबसे बड़े प्रशंसक थे और जो भी उनके पास अपनी इच्‍छा पूर्ति के लिए जाता था, वो नीलम स्‍टोन पहन कर ही जाता था।

 मान्‍यता है कि न्‍याय के देवता शनि देव के मुकुट के बीच में भी श्री लंका नीलम लगा हुआ है। ग्रीस और रोम की प्राचीन सभ्‍यता में भी ब्‍लू सैफायर का उल्‍लेख मिलता है। यहां तक कि राजकुमारी डायना का भी सबसे पसंदीदा रत्‍न नीलम ही है। हीरे के बाद सबसे कठोर रत्‍न के रूप में नीलम का नाम आता है।

इस स्‍टोन को पहनने के कई फायदे हैं जैसे कि इसे पहनने से शनि देव की कृपा मिलती है। अगर आप शनि देव को प्रसन्‍न करने की इच्‍छा रखते हैं तो इस रत्‍न को धारण कर सकते हैं। असली और अच्‍छी क्‍वालिटी का नीलम मिलना बहुत मुश्किल है।

आइए जानते हैं नीलम रत्‍न के लाभ, धारण विधि आदि के बारे में।

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श्री लंका नीलम रत्न के फायदे – Sri Lanka Neelam stone benefits in Hindi

नीले रंग के इस स्‍टोन को पहनने से जीवन में समृद्धि और शांति आती है। इस रत्‍न को धारण करने से आर्थिक तंगी भी दूर होती है और पिछले जन्‍म के बुरे कर्मों से मुक्‍ति मिलती है।

  • ज्‍योतिषशास्‍त्र के अनुसार ब्‍लू सैफायर पहनने से बुरी शक्‍तियों और काला जादू से सुरक्षा मिलती है। ये रत्‍न आपको बुरे लोगों की संगत से भी दूर रहने में मदद करता है।
  • सामाजिक, व्‍यावसायिक और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति आती है और मनचाहे परिणाम मिलते हैं।
  • शनि के गोचर के दौरान इस रत्‍न के लाभ सबसे अधिक मिलते हैं। ये व्‍यक्‍ति में जीवन शक्‍ति और उत्‍साह को बढ़ाता है।
  • यदि किसी छात्र का मन पढ़ाई में नहीं लगता है या उसका ध्‍यान भटकता रहता है तो उसे भी यह स्‍टोन पहनाया जा सकता है।
  • नाम, पैसा और शोहरत कमाने की इच्‍छा रखने वाले व्‍यक्‍ति को भी यह रत्‍न जरूर पहनना चाहिए।
  • शनि देव का यह रत्‍न तुरंत परिणाम देने की शक्‍ति रखता है। धन लाभ, वैभव और करियर एवं जीवन में सफलता पाने के लिए इस स्‍टोन को पहना जा सकता है।
  • शनि की दशा के दौरान जातक को श्री लंका नीलम रत्‍न से अभूतपूर्व लाभ मिलते हैं। यदि आपकी शनि की दशा या महादशा चल रही है तो ब्‍लू सेफायर को धारण करें।
  • काले जादू, सम्‍मान में कमी और बुरी नजर से दूर रहने के लिए भी इस रत्‍न को पहना जाता है। जीवन की मुश्किल समस्‍याओं को श्री लंका नीलम के प्रभाव से सुलझाया जा सकता है और यह रत्‍न जीवन में शांति लेकर आता है।

श्री लंका नीलम रत्न के चमत्कार – Ceylon Mines Neelam stone health benefits in Hindi

इस रत्‍न का संबंध अजन चक्र से है। शरीर में इस चक्र का संबंध विचारों, सोच से होता है। अगर आप इस चक्र से संबंधित चीजों को बेहतर करना चाहते हैं तो श्री लंका नीलम जरूर पहनें।

  • श्री लंका नीलम स्‍टोन को पहनने से पाचन तंत्र मजबूत होता है। यदि आपको पेट से जुड़ी परेशानियां होती रहती हैं या आपका पेट बहुत ज्‍यादा खराब रहता है तो आपके लिए ये स्‍टोन बहुत लाभकारी साबित हो सकता है।
  • इस स्‍टोन को पहनने से आलस भी दूर होता है और शरीर में स्‍फूर्ति आती है।
  • ब्‍लू सैफायर ब्रोंकाइटिस, लकवा, गठिया, उन्‍मांदता और रूमेटिज्‍म आदि जैसी स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं का इलाज कर सकता है।
  • यह स्‍टोन हड्डियों, घुटनों, दांतों, पैरों और पसलियों से संबंधित समस्‍याओं के इलाज में भी असरकारी है।
  • ऐसा माना जाता है कि अगर पानी में कुछ समय के लिए इस स्‍टोन को रख दिया जाए तो इस पानी से बिच्‍छू के डंक के जहर को धोया जा सकता है।
  • श्री लंका नीलम रत्‍न साइनस, सिरदर्द, नेत्र संबंधी परेशानियों और बुरे सपने आने से भी छुटकारा दिलाता है।
  • नसों से जुड़े विकारों को भी इस स्‍टोन की मदद से दूर किया जा सकता है।

कितने रत्ती का श्री लंका नीलम पहनना चाहिए – Kitne ratti ka Sri lanka neelam pehnana chahiye

शनि के रत्‍न श्री लंका नीलम को कम से कम 2 कैरेट का जरूर पहनना चाहिए। अगर आप श्री लंका नीलम रत्‍न से लाभ पाना चाहते हैं तो कम से कम इतने रत्ती का स्‍टोन तो जरूर धारण करें। चूंकि, ये शनि देव का रत्‍न है इसलिए इसे शनिवार के दिन पहनना चाहिए।

अगर आप जानना चाहते हैं कि आपको कितने रत्ती का स्‍टोन पहनना चाहिए तो इसे जानने का सबसे आसान तरीका हम बता रहे हैं। मान लीजिए आपका वजन 65 किलोग्राम है तो अपने वजन के अनुसार आपको 6.5 रत्ती का ब्‍लू सैफायर पहनना चाहिए।

श्री लंका नीलम किस धातु में पहने – Neelam ratna kis dhatu me pahne

श्री लंका नीलम किस धातु में पहनना चाहिए – नीलम रत्‍न को चांदी या पंचधातु में पहन सकते हैं। इस रत्‍न की अंगूठी को दाएं हाथ की मध्‍यमा अंगुली में पहनना चाहिए।

नीलम रत्न कैसे धारण करे – Neelam ratna kaise dharan karna chahiye

नीलम रत्‍न को चांदी या पंचधातु में पहन सकते हैं। इस रत्‍न को कृष्‍ण पक्ष के या किसी भी शनिवार के दिन धारण कर सकते हैं। शनिवार के दिन सुबह जल्‍दी उठें और स्‍नान कर घर के पूजन स्‍थल में साफ आसन पर बैठ जाएं। अब एक तांबे का बर्तन लें और उसमें गंगाजल, तुलसी की पत्तियां, गाय का कच्‍चा दूध, शहद और घी डालें। इसके बाद 108 बार ‘ऊं शं शनैश्‍चराय नम:’ का जाप करें और श्री लंका नीलम रत्‍न को धारण कर लें। शनि के गोचर के दौरान भी इस रत्‍न को पहना जा सकता है।

श्री लंका नीलम रत्न किसे धारण करना चाहिए – Neelam ratna kise dharan karna chahiye

  • मकर और कुंभ राशि का स्‍वामी ग्रह शनि देव हैं इसलिए इन दो राशियों के लोग श्री लंका नीलम स्‍टोन पहन सकते हैं।
  • जब कुंडली के चतुर्थ, दशम और ग्‍यारहवें भाव में शनि स्थित हो तो श्री लंका नीलम पहन सकते हैं।
  • अगर शनि जन्‍मकुंडली में छठे और आठवे भाव के स्‍वामी ग्रह के साथ विराजमान है या इन दोनों भावों में अकेले बैठा हो तो श्री लंका नीलम पहना जा सकता है।
  • शनि की राशियां कुंभ और मकर शुभ भाव में स्थित हों तो श्री लंका नीलम पहनने से लाभ होता है।
  • यदि कोई व्‍यक्‍ति शनि की साढ़ेसाती से गुजर रहे हैं तो उन्‍हें भी श्री लंका नीलम पहनने से फायदा होता है।
  • इसके अलावा शनि की अंतरदशा में भी ब्‍लू सैफायर पहना जा सकता है।
  • शनि के मेष राशि में स्थित होने पर भी ये रत्‍न पहन सकते हैं।
  • जब कुंडली में शनि बली होता है या किसी मजबूत ग्रह के साथ शुभ स्‍थान में बैठा होता है तब श्री लंका नीलम पहनने से सबसे ज्‍यादा लाभ मिलता है।

अगर आपकी कुंडली में शनि शुभ स्‍थान में बैठा है लेकिन फिर भी आपको शनि के शुभ फल नहीं मिल पा रहे हैं तो इस स्थिति में शनि के अच्‍छे फल पाने के लिए भी ये स्‍टोन पहना जाता है।

श्री लंका नीलम का बारह राशियों पर प्रभाव

यहां पढ़ें, श्री लंका नीलम रत्न किस राशि को धारण करना चाहिए –

मेष राशि श्री लंका नीलम रत्न

मेष राशि के जिन लोगों की कुंडली में दूसरे, पंचम, नौवे या एकादश भाव में शनि ग्रह विराजमान हो तो वह जातक श्री लंका नीलम पहन सकते हैं।

वृषभ राशि के लिए श्री लंका नीलम रत्न

इस राशि के जातक बिना किसी चिंता के नीलम स्‍टोन पहन सकते हैं। वृषभ के स्‍वामी ग्रह शुक्र और शनि के बीच मैत्री संबंध होते हैं। नीलम आपको आपकी जिंदगी के बेहतरीन पल दे सकता है। शनि आपके लिए योगकारक ग्रह है।

मिथुन राशि के लिए श्री लंका नीलम रत्न

जब शनि मिथुन राशि में गोचर कर रहा हो, उस समय इस राशि के जातकों के लिए नीलम पहनने फलदायी रहता है।

कर्क राशि नीलम रत्न

कर्क राशि का स्‍वामी ग्रह चंद्रमा है जिसके शनि के साथ शत्रु संबंध हैं। इसलिए वृषभ राशि के लोगों को ज्‍योतिषीय सलाह लेने के बाद ही यह रत्‍न पहनना चाहिए।

सिंह राशि के लिए नीलम रत्न

सिंह राशि का स्‍वामी ग्रह सूर्य है जिसके शनि के साथ शत्रु संबंध हैं। इसलिए सिंह राशि के लोगों को ज्‍योतिषीय सलाह लेने के बाद ही यह रत्‍न पहनना चाहिए।

कन्‍या राशि श्री लंका नीलम रत्न

कन्‍या राशि के जातक शनि को मजबूत करने और इसके शुभ प्रभाव को पाने के लिए नीलम पहन सकते हैं। कन्‍या राशि का स्‍वामी ग्रह बुध है जिसके शनि के साथ अच्‍छे संबंध हैं।

तुला राशि के लिए श्री लंका नीलम रत्न

इस राशि के जातक बिना किसी चिंता के नीलम स्‍टोन पहन सकते हैं। तुला राशि के स्‍वामी ग्रह शुक्र और शनि के बीच मैत्री संबंध होते हैं। नीलम आपको आपकी जिंदगी के बेहतरीन पल दे सकता है। शनि आपके लिए योगकारक ग्रह है।

वृश्चिक राशि के लिए नीलम रत्न

अगर वृश्चिक राशि के जातकों की कुंडली में शनि पंचम, दशम या नवम भाव में बैठा है तो आप नीलम को धारण कर सकते हैं।

धनु राशि नीलम रत्न

धनु राशि का स्‍वामी ग्रह बृहस्‍पति है जिसके शनि के साथ शत्रु संबंध हैं। इसलिए धनु राशि के लोगों को ज्‍योतिषीय सलाह लेने के बाद ही यह रत्‍न पहनना चाहिए।

मकर राशि के लिए श्री लंका नीलम रत्न

मकर स्‍वयं शनि ग्रह की राशि है इसलिए मकर राशि के लोग बिना किसी हिचक के नीलम रत्‍न पहन सकते हैं। इस रत्‍न को पहनने से जीवन में खुशहाली और सफलता आती है।

कुम्भ राशि नीलम रत्न

कुंभ स्‍वयं शनि ग्रह की राशि है इसलिए कुंभ राशि के लोग बिना किसी हिचक के नीलम रत्‍न पहन सकते हैं। इस रत्‍न को पहनने से जीवन में खुशहाली और सफलता आती है।

मीन राशि के लिए नीलम रत्न

मीन राशि का स्‍वामी ग्रह बृहस्‍पति है जिसके शनि के साथ शत्रु संबंध हैं। इसलिए मीन राशि के लोगों को ज्‍योतिषीय सलाह लेने के बाद ही यह रत्‍न पहनना चाहिए।

ये रत्‍न न पहनें

नीलम स्‍टोन के साथ माणिक्‍य, मोती, पुखराज और मूंगा स्‍टोन नहीं पहनना चाहिए।

नीलम के स्‍वामी ग्रह शनि के जीवन पर प्रभाव

श‍नि देव व्‍यक्‍ति को उसके कर्मों का फल देते हैं। इससे जातक को अपनी गलतियों और कमजोरी की पहचान होती है और वह अपनी जिम्‍मेदारियों को उठाने लगता है। शनि ग्रह कुंडली के जिस भाव में विराजमान होते हैं, उस क्षेत्र में व्‍यक्‍ति को मेहनत करनी पड़ती है।

कुंडली में शनि की प्रबलता बताती है कि व्‍यक्‍ति अपने जीवन की मुश्किलों का सामना करने के लिए कितना मजबूत है और उसके कमजोर पड़ने की कितनी संभावना है।

जन्‍मकुंडली में शनि की मजबूत स्थिति व्‍यक्‍ति को मेहनती और अपने लक्ष्‍य की प्राप्‍ति के लिए लगातार प्रयास करने वाला बनाती है। ऐसे लोग बहुत ईमानदार और अपने काम के प्रति समर्पित होते हैं। ये अपने जीवन में अनुशासन से रहते हैं और इनके व्‍यवहार में गंभीरता झलकती है।

यदि कुंडली में शनि पीडित या कमजोर स्थिति में हो तो इससे व्‍यक्‍ति की जीवन की चुनौतियों का सामना करने की क्षमता प्रभावित होती है। ऐसे जातकों को शनि के प्रभाव के कारण अधिक मेहनत करनी पड़ती है। शनि के कमजोर होने की वजह से मानसिक तनाव, अलगाव, लत और कुछ मामलों में कोई गंभीर बीमारी हो सकती है।

शनि देव न्‍याय के देवता हैं और जातक को उसके कर्मों का फल न्‍याय के साथ देते हैं। यह ग्रह हड्डियों को प्रभावित करता है। टांगों की सभी हड्डियों पर शनि देव का प्रभाव होता है। इस ग्रह के अशुभ प्रभाव से व्‍यक्‍ति को कोई लंबी बीमारी हो सकती है।

शनि का धातु लोहा होता है इसलिए शनि के रत्‍न श्री लंका नीलम या ब्‍लू सैफायर की अंगूठी या लॉकेट को लोहे की धातु में ही पहना जाता है। शनि देव को प्रसन्‍न करने के लिए ही श्री लंका नीलम रत्‍न धारण किया जाता है। इस ग्रह का शुभ रंग नीला और काला रंग होता है इसलिए शनि देव की कृपा पाने के लिए श्री लंका नीलम रत्‍न धारण करने के साथ-साथ काले और नीले रंग के कपड़े पहनने चाहिए।

मकर और कुंभ राशि का स्‍वामी शनि ग्रह होते हैं। इन दोनों राशि के जातकों पर शनि देव की कृपा बरसती है और कुंभ एवं मीन राशि के लोग श्री लंका नीलम स्‍टोन पहन सकते हैं।

श्री लंका नीलम रत्न का उपरत्न – Neelam ratna ka upratna

अगर कोई व्‍यक्‍ति किसी कारण से श्री लंका नीलम नहीं ले सकता है तो वह इसका उपरत्‍न एमेथिस्‍ट पहन सकता है। इसकी जगह आप नीली, नीला टोपाज, लाजवर्त, सोडालाइट भी पहन सकते हैं।

नीलम कहा पाया जाता है – Neelam kaha paya jata hai

श्री लंका का सेलॉन ब्‍लू सैफायर सबसे अच्‍छा होता है। भारत में कश्‍मीर का नीलम स्‍टोन सबसे बेहतर माना जाता है लेकिन कश्‍मीर का नीलम दुर्लभ ही मिलता है और छोटे आकार में उपलब्‍ध है। थाइलैंड का नीलम भी बहुत प्रसिद्ध है।

भारत नीलम रत्‍न के सबसे बड़े विक्रेताओं में से एक है। भारत के कश्‍मीर में बड़ी मात्रा में नीलम स्‍टोन पाया जाता है। कश्‍मीरी नीलम को सबसे अच्‍छी क्‍वालिटी का स्‍टोन माना जाता है। इसके अलावा रूस, श्रीलंका, बर्मा और ऑस्‍ट्रेलिया में भी नीलम स्‍टोन पाया जाता है। अच्‍छी क्‍वालिटी का ब्‍लू सैफायर इन देशों में मिलता है।

श्री लंका नीलम किस उंगली में पहनें

किसी भी रत्‍न का लाभ तभी मिलता है जब उसे सही विधि और सही तरह से धारण किया जाए। आप नीलम स्‍टोन को लॉकेट या अंगूठी के रूप में पहन सकते हैं। अगर आप नीलम स्‍टोन की अंगूठी पहन रहे हैं तो इसे अपने दाहिने हाथ की मध्‍यमा उंगली में पहनें।

इस संदर्भ में आपको इस बात का खास ख्‍याल रखना है कि हर रत्‍न को पहनने को लेकर कुछ नियम बनाए गए हैं और अगर आप इन नियमों का पालन नहीं करते हैं तो हो सकता है कि आपको उस रत्‍न का पूर्ण फल न मिल पाए।

श्री लंका नीलम किस दिन धारण करना चाहिए 

श्री लंका नीलम स्‍टोन का स्‍वामी ग्रह शनि देव हैं। शास्‍त्रों में प्रत्‍येक रत्‍न का स्‍वामी एक ग्रह को माना गया है और हर ग्रह को सप्‍ताह का एक दिन समर्पित है। न्‍याय के देवता शनि महाराज की पूजा शनिवार के दिन होती है इसलिए इसी दिन शनि देव के नीलम रत्‍न को धारण करना शुभ माना गया है। शनिवार के दिन स्‍नान आदि के पश्‍चात् विधि पूर्वक नीलम स्‍टोन को पहनने से इसका लाभ मिलना शुरू हो जाता है।

शनि देव मेहनती लोगों की मदद करते हैं और उन्‍हें उनके जीवन में सफलता पाने में मदद करते हैं। अगर आप भी अपने जीवन में सफलता पाने की आकांक्षा रखते हैं तो शनि देव की कृपा से श्री लंका नीलम स्‍टोन पहनें।

श्री लंका नीलम किस हाथ में पहनें

किसी भी स्‍टोन की अंगूठी को वर्किंग हैंड में ही पहना जाता है। इसका अर्थ य‍ह है कि आप जिस भी हाथ से अपने सारे काम करते हैं, उसी हाथ की मध्‍यमा उंगली में रत्‍न की अंगूठी को पहनना चाहिए। यदि कोई व्‍यक्‍ति बाएं हाथ से काम करता है तो उसे बाएं हाथ में श्री लंका नीलम स्‍टोन की अंगूठी पहननी चाहिए। श्री लंका नीलम रत्‍न दाएं हाथ की मध्‍यमा उंगली में पहना जाता है।

नीलम धारण करने का मंत्र

श्री लंका नीलम रत्‍न को धारण करने से पूर्व 108 बार ‘ऊं प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्‍चराय नम:’ या ‘शनि देव के बीज मंत्र – ‘ऊं शं शनैश्‍चराय नम:’ मंत्र का जाप करें। स्‍वामी ग्रह के मंत्र का जाप करने से स्‍टोन की शक्‍तियां बढ़ती हैं और व्‍यक्‍ति को उस स्‍टोन के लाभ जल्‍दी मिलते हैं।

शनि देव का अन्‍य मंत्र :

ऊं शन्‍नोदेवीरभिष्‍टय आपो भवंतु पीतये शन्‍योरभिस्‍त्रवन्‍तु न:।।

श्री लंका नीलम पहनने का मुहूर्त

उत्तराभाद्रपद, पुष्‍य, चित्रा, धनिष्‍ठा, स्‍वाति और शतभिषा नक्षत्र में श्री लंका नीलम स्‍टोन को धारण करना चाहिए। शुभ मुहूर्त में नीलम को पहनने से इसका दोगुना लाभ मिलता है।

श्री लंका नीलम कितने समय में प्रभाव देता है – neelam effects in how many days

ब्‍लू सैफायर यानी नीलम धारण करने के बाद 60 दिनों के अंदर अपना प्रभाव दिखना शुरू करता है और इसका असर 4 वर्ष तक रहता है। इसके बाद नीलम स्‍टोन का प्रभाव निष्क्रिय हो जाता है और इसे पहने रखने से कोई लाभ नहीं होता है। इसके बाद आपको श्री लंका नीलम रत्‍न बदल देना चाहिए।

श्री लंका नीलम कैसा होता है

नीले रंग का नीलम मध्‍यम से गहरे रंग की टोन का होता है। ऐसा ब्‍लू सैफायर बहुत कीमती होता है।

नीलम का उपरत्‍न

अगर आप नीलम स्‍टोन नहीं पहन सकते हैं तो इसकी जगह इसके उपरत्‍न एमेथिस्‍ट को धारण कर सकते हैं। एमेथिस्‍ट को पहनने से श्री लंका नीलम जैसे ही लाभ मिलते हैं। यह रत्‍न अपनी एनर्जी से मन को शांत करता है। इससे नसों को आराम मिलता है और बेचैनी दूर होती है।

यह रत्‍न मांसपेशियों को आराम देता है और तन एवं मन को शांत करने में मदद करता है। शनि देव की शुभ कृपा पाने के लिए आप श्री लंका नीलम के उपरत्‍न एमेथिस्‍ट को भी धारण कर सकते हैं।

श्री लंका नीलम की तकनीकी संरचना

नीलम यानी ब्‍लू सैफायर एक एल्‍युमिनियम ऑक्‍साइड है। मोह्स स्‍केल पर श्री लंका नीलम स्‍टोन की कठोरता 9 है। इस रत्‍न का गुरुत्‍वाकर्षण दायरा 3.99 से 4.00 होता है।

नीलम रत्न की कीमत 2020 – Neelam ratna price in hindi

रंग, पारदर्शिता, शुद्धता और कटिंग के आधार पर श्री लंका नीलम रत्‍न की कीमत होती है। ऐसा नीलम स्‍टोन खरीदना चाहिए जिस पर कोई दाग या निशान न हो और जो कहीं से कटा हुआ न हो। रत्‍न में पारदर्शिता होने से उससे लाईट और एनर्जी ट्रांस्‍मिट हो पाती है। भारत में नीलम की कीमत 2000 रुपए प्रति कैरेट से शुरू है।

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