सभी आर्डर पर 300 रुपए की छूट 🎉🎁

aum rudraksha rudraksha beads grande

रुद्राक्ष पहनने के फायदे और नुकसान

रुद्राक्ष क्या होता है – Rudraksha Kya Hai रुद्राक्ष महादेव प्रलयकर्ता भगवान शंकर का अंश है। दूसरे शब्दों में कहें तो रुद्राक्ष शिव ही है। रुद्राक्ष शब्द प्रजापिता ब्रह्मा द्वारा दिया गया है, देवों की भाषा संस्कृत भाषा का एक दिव्य शब्द है। इसे धारण करने से सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। रुद्राक्ष शिव का वरदान है, जो भगवान शिव लोगो के और संसार के दु:खों को दूर करने के लिए प्रकट किया था। रुद्र+अक्ष- इन दो शब्दों से मिलकर रुद्राक्ष बनता है। रुद्र का मतलब होता है- भगवान शंकर और अक्ष का मतलब- आंखें होता है। इस प्रकार रुद्राक्ष का अर्थ होता- भगवान शंकर का नेत्र। रुद्राक्ष भगवान शंकर का तीसरा नेत्र है। रुद्राक्ष पहनने के फायदे और नुकसान – rudraaksh pahanane ke fayde aur nukasaan रुद्राक्ष पहनना भगवान शिव को धारण करने जैंसा है। रुद्राक्ष पहनने से पहले व पहनने के बाद कुछ विशेष नियमों का ध्यान अवश्य रखना चाहिए। विज्ञान (Science) भी रुद्राक्ष की चमतकार को मानता करता है। रुद्राक्ष पहनने से भगवान शिव की आपके उपर कृपा होती है। कुण्डली के दोष दूर होते हैं। ध्यान देने वाली बात यह है कि रुद्राक्ष एक मुखी से लेकर चौदह मुखी तक का होता है। अलग अलग रुद्राक्ष अलग अलग कामनाओं की पूर्ति करता है। रुद्राक्ष पहनने के बहुत सारे फायदे हैं लेकिन यही रुद्राक्ष व्यक्ति के जीवन में महान संकट भी ला सकता है। यदि इसे नियम से न पहना जाए। रुद्राक्ष पहनने वाले को मदिरा पान, शराब, मीट मांस आदि का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए। यह बात स्वयं भगवान शंकर ने देवताओं को बताई। आइये, पहले रुद्राक्ष पहनने के फायदे और नुकसान जानते हैं। रुद्राक्ष पहनने के फायदे- Rudraksha Pahanne Ke Fayde रुद्राक्ष पहनने से बहुत सें फायदे होते हैं। इस बात में कोई भी शाक नहीं है। विज्ञान तक भी इस बात को स्वीकार करता है। रुद्राक्ष पहनने के कुछ विशेष फायदे है आइये जानते है – दिमाग शान्त होता है। तनाव को दूर करता है। मानसिक बीमारी दूर होती है। वैवाहिक जीवन अच्छा बनता है। जीवन में प्रेम बढने लगता है। मष्तिष्क पर नियंत्रण होता है। रुद्राक्ष पहनने के नुकसान – Rudraksha Pahanne Ke nukasaan एक ओर रुद्राक्ष पहनने से जहां अनेकों फायदे होते हैं। वहीं दूसरी ओर रुद्राक्ष पहनने से बहुत सारे नुकसान भी हो सकते हैं। नुकसान के बहुत सारे कारण हैं। जैंसे कि रुद्राक्ष को सही विधि से धारण न करना, रुद्राक्ष पहनने के बाद के नियमों का पालन न करना, अपने अनुसार गलत मुखी रुद्राक्ष धारण कर लेना आदि। रुद्राक्ष पहनते वक्त और पहनने के बाद इसके नियमों का पालन जरूर करना चाहिए। अन्यथा रुद्राक्ष पहनने के नुकसान हो सकते हैं। गलत विधि से रुद्राक्ष पहनने के निम्न नुकसान हो सकते हैं। बिना नियम से पहना गया रुद्राक्ष मन को अस्थिरता देता है। रुद्राक्ष पहनने के बाद नियम पालन न करने से यह व्यक्ति को भटका देता है। शराब व मांस का सेवन करने से रुद्राक्ष का बुरा असर पड़ता है। रुद्राक्ष पहनने के बाद के नियम – rudraksha pahanne ke baad ke niyam जब रुद्राक्ष धारण करें तो रुद्राक्ष मंत्र और रुद्राक्ष मूल मंत्र का 9 बार जाप करना चाहिए, साथ ही इसे सोने से पहले और रुद्राक्ष को हटाने के बाद भी दोहराया जाना चाहिए। रुद्राक्ष को एक बार निकाल लेने के बाद उस पवित्र स्थान पर रखना चाहिए जहां आप पूजा करते हैं। रुद्राक्ष को तुलसी की माला की तरह की पवित्र माना जाता है। इसलिए इसे धारण करने के बाद मांस-मदिरा से दूरी बना लेना चाहिए। एक महत्वपूर्ण बात यह है कि रुद्राक्ष को कभी भी श्मशान घाट पर नहीं ले जाना चाहिए। इसके अलावा नवजात के जन्म के दौरान या जहां नवजात शिशु का जन्म होता है वहां भी रुद्राक्ष ले जाने से बचना चाहिए। महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान रुद्राक्ष नहीं पहनना चाहिए। रुद्राक्ष को बिना स्नान किए नहीं छूना चाहिए। स्नान करने के बाद शुद्ध करके ही इसे धारण करें। रुद्राक्ष धारण करते समय भगवान शिव का मनन करें। इसके साथ ही शिव मंत्र ‘ऊँ नम: शिवाय’ का जाप करते रहें। रुद्राक्ष को हमेशा लाल या फिर पीले रंग के धागे में पहनना चाहिए। कभी भी इसे काले रंग के धागे में नहीं पहनना चाहिए। इससे अशुभ प्रभाव पड़ता है। रुद्राक्ष माला को आपने धारण कर लिया है तो अब इसे किसी और को बिल्कुल न दें। इसके साथ ही दूसरे की दी गई रुद्राक्ष को बिल्कुल धारण न करें। रुद्राक्ष की माला को हमेशा विषम संख्या में पहनना चाहिए। लेकिन 27 मनकों से कम नहीं होनी चाहिए। रुद्राक्ष को हमेशा साफ रखें। मनके के छिद्रों में धूल और गंदगी जम सकती है। जितनी बार हो सके इन्हें साफ करें.. अगर धागा गंदा या घिस जाता है, तो इसे बदल दें। सफाई के बाद रुद्राक्ष को गंगाजल से धो लें। यह इसकी पवित्रता बनाए रखने में मदद करता है। रुद्राक्ष गर्म प्रकृति के होते हैं। जिसके कारण कुछ लोगों को एलर्जी की समस्या हो जाती है। इसलिए बेहतर है कि इसका उपयोग न करें बल्कि पूजा घर में रखकर रोजाना पूजा करें। रुद्राक्ष की पहचान कैसे करे – rudraksha ke pahachaan kaise kare बाजार में इस समय प्लास्टिक और फाइबर का रुद्राक्ष भी बिक रहे हैं। अध्ययन में पाया गया है कि लकड़ी को रुद्राक्ष का आकार देकर या फिर टूटे रुद्राक्षों को जोड़कर भी नया रुद्राक्ष बनाने का धंधा चल रहा है। जो असली रुद्राक्ष होता है उसके फल में प्राकृतिक रूप से छेद होते हैं। जबकि भद्राक्ष में छेद करके रुद्राक्ष का आकार दिया जाता है। असली रुद्राक्ष को सरसों के तेल में डुबाने से वह रंग नहीं छोड़ता है जबकि नकली रुद्राक्ष रंग छोड़ देता है। असली रुद्राक्ष पानी में डुबाने पर वह डूब जाता है , जबकि नकली रुद्राक्ष तैरता रहता है। असली रुद्राक्ष को पहचाने के लिए उसे किसी नुकिली चीज से कुरेदने पर अगर उसमें से रेशा निकलता हो तो वह असली रुद्राक्ष होता है। रुद्राक्ष कैसे पहनना चाहिए – rudraaksh kaise pahanna chaahie रूद्राक्ष सोमवार के दिन धारण करना चाहिए। किन्‍तु कुछ खास अवसरों जैसे श्रावण माह या नवरात्रों में इसे किसी भी दिन धारण किया जा सकता है। रूद्राक्ष को पितृ पक्ष या

2017 11image 12 44 226904000stones ll

कौन सा रत्न किस धातु में धारण करना चाहिए

कौन सा रत्न किस धातु में धारण करना चाहिए – kaun sa ratna kis dhaatu mein dhaaran karana chaahie ज्‍योतिष के अनुसार रत्‍नों को धारण करने से जीवन की कई तरह की समस्‍याओं से छुटकारा मिल जाता है। कोई रत्‍न सेहत को फायदा पहुंचाता है तो किसी रत्‍न को पहनने से करियर को तरक्की मिलती है। हालांकि, रत्‍न तभी अपना असर दिखाते हैं जब इन्‍हें इनकी सही विधि के अनुसार धारण किया जाए साथ ही रत्‍नों के लिए कुछ विशेष धातु भी होते हैं। सौरमंडल में नौ ग्रह हैं और इन नौ ग्रहों को अपने पक्ष में करने और इनका सकारात्‍मक प्रभाव पाने के लिए रत्‍न धारण किए जाते हैं। ग्रहों को मजबूती बनाने के लिए भी रत्‍न पहने जाते हैं। रत्‍न अपना असर तो दिखाते हैं लेकिन इन्‍हें किस धातु में पहना जा रहा है, ये बात भी महत्‍वपूर्ण होती है। नीलम किस धातु में धारण करें? नीलम सबसे शक्‍तिशाली और क्रूर कहे जाने वाले शनि ग्रह का रत्‍न है। कुंडली में शनि को बली करने के लिए नीलम रत्‍न पहना जाता है। नीलम रत्‍न को पंचधातु या स्‍टील की अंगूठी में जड़वाकर धारण करना चाहिए। नीलम रत्‍न को कम से कम चार रत्ती का तो धारण करना ही चाहिए। इसे आप अंगूठी या लॉकेट में पहन सकते हैं। पन्ना किस धातु में धारण करें? पन्‍ना रत्‍न बुद्धि के कारक बुध का रत्‍न है। जो भी इस रत्‍न को धारण करता है उसे बुद्धि के साथ-साथ सेहत की भी प्राप्‍ति होती है। पन्‍ना रत्‍न चांदी की धातु में सर्वोत्तम रहता है लेकिन आप इसे सोने में भी पहन सकते हैं। चांदी की धातु में पन्‍ना सबसे ज्‍यादा लाभ देता है। पन्‍ना कम से कम तीन रत्ती का तो होना ही चाहिए। माणिक किस धातु में धारण करें? माणिक्‍य को अंग्रेजी में रूबी भी कहा जाता है। सूर्य का यह रत्‍न आपको सफलता की ऊंचाईयों तक पहुंचा सकता है। रूबी स्‍टोन को सोने की अंगूठी में रविवार, सोमवार और गुरुवार के दिन पहनना चाहिए। रूबी पांच रत्ती का पहनें। गोमेद किस धातु में धारण करें राहू का रत्‍न है गोमेद और ये स्‍टोन व्‍यापारियों के लिए बहुत लाभप्रद होता है। स्‍टॉक मार्केट से जुड़े लोगों का भी गोमेद लाभ देता है। गोमेद रत्‍न को चांदी या अष्‍टधातु में धारण करना शुभ रहता है। शाम के समय विधि अनुसार राहू की उपासना कर इस रत्‍न की अंगूठी को मध्‍यमा अंगुली में धारण करें। गोमेद कम से कम 6 रत्ती का होना चाहिए। मोती किस धातु में धारण करें चंद्रमा का रत्‍न है मोती जोकि मन को शीतलता प्रदान करता है। चंद्रमा मन और मस्तिष्‍क का कारक होता है और इसलिए इस रत्‍न को धारण करने से चंचल मन को भी नियंत्रित किया जा सकता है। मोती रत्‍न केवल चांदी की अंगूठी में पहनना चाहिए। आप 2, 4, 6 या 11 रत्ती का मोती पहन सकते हैं। लहसुनिया किस धातु में धारण करें केतु का रत्‍न लहसुनिया भी आपके जीवन की परेशानियों को दूर कर सकता है। केतु के अशुभ प्रभाव को दूर करने के लिए लहसुनिया रत्‍न धारण किया जाता है। चांदी की धातु में लहसुनिया पहनना शुभ रहता है। इसे शनिवार के दिन पहनना चाहिए। पुखराज किस धातु में धारण करें पीला पुखराज देवताओं के गुरु बृहस्‍पति का रत्‍न है। बृहस्‍पति के शुभ फल प्राप्‍त करने के लिए पुखराज रत्‍न धारण किया जाता है। इस रत्‍न को सोने की धातु में पहनना सबसे ज्‍यादा शुभ रहता है। मूँगा किस धातु में धारण करें मंगल का रत्‍न मूंगा है। ये रत्‍न कमजोर और डरपोक लोगों के लिए किसी वरदान से कम नही है। मूंगा रत्‍न को सोने की अंगूठी में धारण करना शुभ रहता है। सोने के अलावा चांदी या तांबे की धातु में भी आप इसे पहने सकते हैं। कम से कम 6 रत्ती का मूंगा धारण करें। ओपल किस धातु में धारण करें वैसे तो शुक्र का रत्‍न डायमंड है लेकिन हर कोई डायमंड नहीं खरीद सकता है इसलिए डायमंड के स्‍थान पर शुक्र के लिए ओपल रत्‍न पहनने की सलाह दी जाती है। ओपल को सोने की धातु में पहनना चाहिए। यदि सोने में संभव ना हो तो चांदी या व्‍हाईट गोल्‍ड में इस रत्‍न को जड़वाकर धारण कर सकते हैं।

chhath puja 2021 ethnic dress 1636258364

छठ पूजा 2022 में कब है

छठ पूजा 2022 में कब है – chhath pooja 2022 mein kab hai इस साल छठ पूजा का शुभ अवसर रविवार के दिन 30 अक्टूबर का है। छठ पूजा का क्या इतिहास है – chhath pooja ka kya itihaas hai छठ पूजा में सूर्य देव और छठी मैया की पूजा विधि विधान से की जाती है। छठ पूजा का प्रारंभ कब से हुआ, सूर्य की आराधना कब से प्रारंभ हुई, इसके बारे में पौराणिक कथाओं में बताया गया है। सतयुग में भगवान श्रीराम, द्वापर में दानवीर कर्ण और पांच पांडवों की पत्नी द्रौपदी ने सूर्य की उपासना की थी। छठी मैया की पूजा से जुड़ी एक क​था राजा प्रियवंद की है, जिन्होंने सबसे पहले छठी मैया की पूजा की थी। आइए जानते हैं कि सूर्य उपासना और छठ पूजा का इतिहास और कथाएं क्या हैं। बिहार मे हिन्दुओं द्वारा मनाये जाने वाले इस पर्व को साथ ही इस्लाम अन्य धर्म भी मनाते हैं। धीरे-धीरे यह त्योहार प्रवासी भारतीयों के साथ-साथ विश्वभर में फैल गया है। छठ पूजा सूर्य, उषा, प्रकृति,जल, वायु और उनकी बहन छठी म‌इया को समर्पित है ताकि उन्हें पृथ्वी पर जीवन की देवतायों को बहाल करने के लिए धन्यवाद और कुछ शुभकामनाएं देने का अनुरोध किया जाए। छठ में कोई मूर्तिपूजा शामिल नहीं है। त्यौहार के अनुष्ठान कठोर हैं और चार दिनों की अवधि में मनाए जाते हैं। इनमें पवित्र स्नान, उपवास और पीने के पानी वृत्ता से दूर रहना, लंबे समय तक पानी में खड़ा होना, और प्रसाद (प्रार्थना प्रसाद) और अर्घ्य देना शामिल है। परवातिन नामक मुख्य पूजने वाले आमतौर पर महिलाएं होती हैं। हालांकि, बड़ी संख्या में पुरुष इस उत्सव का भी पालन करते हैं क्योंकि छठ लिंग-विशिष्ट त्यौहार नहीं है। छठ महापर्व के व्रत को स्त्री – पुरुष – बुढ़े – जवान सभी लोग करते हैं। छठ पूजा साल में दो बार होती है एक चैत मास में और दुसरा कार्तिक मास शुक्ल पक्ष चतुर्थी तिथि, पंचमी तिथि, षष्ठी तिथि और सप्तमी तिथि तक मनाया जाता है. षष्ठी देवी माता को कात्यायनी माता के नाम से भी जाना जाता है। नवरात्रि के दिन में हम षष्ठी माता की पूजा करते हैं षष्ठी माता कि पुजा घर परिवार के सदस्यों के सभी सदस्यों के सुरक्षा एवं स्वास्थ्य लाभ के लिए करते हैं षष्ठी माता की पूजा, सुरज भगवान और मां गंगा की पूजा देश में एक लोकप्रिय पूजा है। यह प्राकृतिक सौंदर्य और परिवार के कल्याण के लिए की जाने वाली एक महत्वपूर्ण पूजा है। इस पुजा में गंगा स्थान या नदी तालाब जैसे जगह होना अनिवार्य हैं यही कारण है कि छठ पूजा के लिए सभी नदी तालाब कि साफ सफाई किया जाता है और नदी तालाब को सजाया जाता है प्राकृतिक सौंदर्य में गंगा मैया या नदी तालाब मुख्य स्थान है। छठ पूजा में किसकी पूजा की जाती है – chhath pooja mein kisakee pooja kee jaatee hai छठ पूजा वास्तविक रूप में प्रकृति की पूजा है। इस अवसर पर सूर्य भगवान की पूजा होती है, जिन्हें एक मात्र ऐसा भगवान माना जाता है जो दिखते हैं। अस्तलगामी भगवान सूर्य की पूजा कर यह दिखाने की कोशिश की जाती है कि जिस सूर्य ने दिनभर हमारी जिंदगी को रौशन किया उसके निस्तेज होने पर भी हम उनका नमन करते हैं। छठ पूजा के मौके पर नदियां, तालाब, जलाशयों के किनारे पूजा की जाती है जो सफाई की प्रेरणा देती है। यह पर्व नदियों को प्रदूषण मुक्त बनाने का प्रेरणा देता है। इस पर्व में केला, सेब, गन्ना सहित कई फलों की प्रसाद के रूप में पूजा होती है जिनसे वनस्पति की महत्ता होती है। सूर्योपासना का यह पर्व सूर्य षष्ठी को मनाया जाता है, लिहाजा इसे छठ कहा जाता है। यह पर्व परिवार में सुख, समृद्धि फल प्रदान करने वाला माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि छठ देवी भगवान सूर्य की बहन हैं, इसलिए लोग सूर्य की तरफ अर्घ्य दिखाते हैं और छठ मैया को प्रसन्न करने के लिए सूर्य की आराधना करते हैं। छठ पूजा कब शुरू हुई – chhath pooja kab shuroo huee नहाय-खाय के साथ आज से आरंभ हुए लोकआस्था के इस चार दिवसीय महापर्व को लेकर कई कथाएं मौजूद हैं। एक कथा के महाभारत काल में जब पांडव अपना सारा राजपाट जुए में हार गए, तब द्रौपदी ने छठ व्रत किया। इससे उनकी मनोकामनाएं पूर्ण हुईं तथा पांडवों को राजपाट वापस मिल गया। इसके अलावा छठ महापर्व का उल्लेख रामायण काल में भी मिलता है। एक अन्य मान्यता के अनुसार, छठ या सूर्य पूजा महाभारत काल से की जाती है। कहते हैं कि छठ पूजा की शुरुआत सूर्य पुत्र कर्ण ने की थी। कर्ण भगवान सूर्य के परम भक्त थे। मान्याताओं के अनुसार, वे प्रतिदिन घंटों कमर तक पानी में खड़े रहकर सूर्य का नमन करते है। छठ माता कौन है- chhath mata kaun hai पुराणों में कहीं सूर्य की पत्नी संज्ञा को, कहीं कार्तिकेय की पत्नी को षष्ठी देवी या छठी मैया माना गया है। श्रीमद्भागवत महापुराण के अनुसार, प्रकृति के छठे अंश से प्रकट हुई सोलह मातृकाओं अर्थात माताओं में प्रसिद्ध षष्ठी देवी (छठी मैया) ब्रह्मा जी की मानस पुत्री हैं और कहा जाता है कि ये वही देवी हैं जिनकी पूजा नवरात्रि में षष्ठी तिथि को की जाती है। इनकी पूजा करने से संतान प्राप्ति व संतान को लंबी उम्र प्राप्त होती है। एक अन्य मान्यता के अनुसार, इन्हें सूर्य देव की बहन भी माना जाता है और उन्हीं को प्रसन्न करने के लिए जीवन के महत्वपूर्ण अवयवों में सूर्य व जल की महत्ता को मानते हुए, इन्हें साक्षी मान कर भगवान सूर्य की आराधना तथा उनका धन्यवाद करते हुए मां गंगा-यमुना या किसी भी पवित्र नदी या पोखर ( तालाब ) के किनारे यह पूजा की जाती है।  छठ माता बच्चों की रक्षा करने वाली देवी हैं। इस व्रत को करने से संतान को लंबी आयु का वरदान मिलता है। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी को इन्हीं देवी की पूजा की जाती है। शिशु के जन्म के छह दिनों बाद इन्हीं देवी की पूजा की जाती है। इनकी प्रार्थना से बच्चे को स्वास्थ्य, सफलता और लम्बी उम्र होने का आशीर्वाद मिलता है। छठ पूजा का महत्व क्या है – छठ पूजा

960x0

कौन सा वार किस भगवान का होता है

कौन सा वार किस भगवान का होता है – kaun sa vaar kis bhagavaan ka hota hai सनातन धर्म में 33 करोड़ देवी-देवताओं का पूजन किया जाता है। दैवीय शक्तियों को विधाता ने मनुष्य की अलग-अलग इच्छाओं को पूरा करने का काम सौंपा है। हर दिन का अपना खास महत्व होता है लेकिन कुछ दिनों में विशेष देवी-देवताओं का पूजन करने से सांसारिक कामनाओं की पूर्ति होती है। सप्ताह के सात दिन भी सात देवों को समर्पित हैं। रविवार को सूर्य, सोमवार को चंद्र, मंगलवार को मंगल, बुधवार को बुध, गुरुवार को बृहस्पति, शुक्रवार को शुक्र और शनिवार को शनि का पूजन करना अच्छा रहता है। किस देवता की पूजा से क्या लाभ मिलता है – kis devata kee pooja se kya laabh milata hai ज्योतिष के अनुसार सूर्य अच्छा स्वास्थ्य देता है। चंद्र धन-संपत्ति देता है। मंगल यानि मंगलवार व्याधियों यानी रोगों का रोक-थाम करता है। बुध आपको शक्ति एवं स्वास्थ्य बल देता है। बृहस्पति आपकी उम्र बढ़ाता है। शुक्र भौतिक सुख प्रदान करता है। शनिवार को शनि की पूजा करते है तो मृत्यु का भय दूर होता है। सोमवार को ऐसे करें चंद्रमा की पूजा – somavaar ko aise karen chandr kee pooja शिवजी ने चंद्र को अपने मस्तष्क पर धारण किया है। इसी वजह से इस दिन शिवजी की पूजा करनी चाहिए इससे चंद्र भी परशान होता है और हर सोमवार शिवलिंग की पूजा करें और जल चढ़ाए। मंगलवार को कैसे कर सकते हैं मंगल की पूजा – mangalavaar ko kaise kar sakate hain mangal kee pooja मंगल के लिए मंगलवार को शिवलिंग पर लाल मसूर चढ़ाएं। मंगल की पूजा शिवलिंग रूप में ही होती है। मंगलवार को शिवलिंग पर लाल गुलाब चढ़ाएं। बुधवार को बुध की पूजा करें – budhavaar ko budh kee pooja karen बुध ग्रह के लिए हर बुधवार हरी मूंग का दान करें। गणेश जी को दूर्वा चढ़ाएं। गुरुवार को बृहस्पति की पूजा – guruvaar ko brhaspati kee pooja देवगुरु बृहस्पति की पूजा भी शिवलिंग रूप में ही की जाती है। इसीलिए हर गुरुवार शिवलिंग पर चने की दाल और बेसन के लड्डू चढ़ाएं। शुक्रवार को करें शुक्र की पूजा – shukravaar ko karen shukr kee pooja शुक्र ग्रह के लिए हर शुक्रवार शिवलिंग पर जल चढ़ाएं साथही  बिल्व पत्र चढ़ाएं। शनिवार को शनि की पूजा – shanivaar ko shani kee pooja हर शनिवार ग्रहों के देवता शनि की पूजा करें। शनि को तेल चढ़ाएं और हनुमान चालीसा का पाठ करें। मान्यता है कि हनुमानजी की पूजा से भी शनिदेव परशान होते हैं। कौन सा दिन किस भगवान का है? – kaun sa din kis bhagavaan ka hai 1 हफ्ते में 7 दिन होते है सोमवार, मंगलवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार, शनिवार और रविवार आइये जानते है किस दिन कौन से भगवान की पूजा करे – सोमवार – Somvar सोमवार का दिन साक्षात् जगत पिता भगवान शिव को समर्पित है। इस दिन भगवान शिवजी की पूजा की जाती है। भगवान शिव को देवों के देव महादेव भी कहा जता है। इस दिन शिव जी की  पूजा करने से भगवान शिव अपने भक्त से प्रसन्न हो जाते हैं। उनकी पूजा करने से समाज में मान-सम्मान भी बढ़ता है। ज्योतिषियों के अनुसार, जो लोग भगवान शिवजी का व्रत राहकते उन पर शिवजी की कृपा हमेशा बनी रहती है। मंगलवार – Mangalvar मगंलवार का दिन मंगल ग्रह का दिन होता है। इस दिन हनुमान जी की पूजा की जाती है। इस दिन हनुमान जी की पूजा से भक्त के पिछले जन्मों के पापों से भी मुक्ति मिलती है। इसके साथ ही जिन लोगों की कुंडली में मंगल ग्रह कमजोर होता है उन्हें मंगलवार के दिन हनुमान जी की पूजा करने की सलाह दी जाती है। इस दिन हनुमान जी की पूजा करने और चालीसा पढ़ने से भक्तों को भय से मुक्ति मिलती है। बुधवार – Budhvar बुधवार का दिन श्री गणेश जी का होता है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा की जाती है। ज्योतिषियों के अनुसार इस दिन कोई भी काम करना शुभ माना जाता है। इसके साथ ही जिन लोगों की कुंडली में बुध कमजोर होता है उन्हें बुधवार के दिन गणेश भगवान की पूजा करने की सलाह दी जाती है। गुरुवार – Guruvar गुरुवार का दिन भगवान विष्णु का दिन होता है। इस दिन केले के पेड़ की पूजा करने की सलाह दी जाती है। कहा जाता है कि केले के पेड़ में भगवान विष्णु का वास होता है। ज्योतिषियों के अनुसार, अगर इस दिन घर की महिलाएं पूजा करती है तो घर में पैसे की कमी नहीं होती है। शुक्रवार – sukharvar शुक्रवार का दिन संतोषी मां का दिन होता है। इस दिन मां लक्ष्मी के साथ मां दुर्गा की की जाती है। ज्योतिषियों के अनुसार, इस दिन अगर घर की महिलाएं पूजा करती तो शुभ होता है और धन – दौलत  से भर जाता है। इसके साथ ही शुक्र ग्रह को भी भौतिक सुखों का कारक भी माना जाता है। शनिवार – shanivar शुक्रवार का दिन शनिदेव का दिन होता है। इस दिन शनि देव की पूजा की जाती है। कहा जाता है कि इस दिन पूजा करने से विशेष लाभ मिलता है। जिन लोगों की कुंडली में शनि दोष चल रहा होता है उन लोगों को इस दिन मंदिर में जाकर पूजा करने की सलाह दी जाती है। सके साथ ही इस दिन पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाना और शनिदेव को सरसों का तेल चढ़ाना चाहिए। रविवार – ravivar रविवार का दिन सूर्य देवता का दिन माना जाता है। इस दिन सूर्य भगवान की पूजा की जाती है। रविवार को व्रत रखने से व्यक्ति का तेज बढ़ता है। इसके साथ ही जिन लोगों की कुंडली में सूर्य कमजोर उन्हें इस दिन लाल वस्त्र पहनने की सलाह दी जाती है। रविवार को भगवान सूर्य का व्रत रखना भी शुभ माना जाता है। कलयुग में कौन से भगवान की पूजा करनी चाहिए – kalayug mein kaun se bhagavaan kee pooja karanee chaahie कलयुग में किस भगवान की पूजा करने से शीघ्र फल की प्राप्ति हो सकती है अथवा कलयुग में कौन से भगवान की पूजा करनी चाहिए यह जानना बहुत ही जरूरी है। वैसे तो कलयुग में बहुत सारे भगवान ऐसे

process aws

लाल किताब क्या है

लाल किताब क्या है – lal kitaab kya hain in hindi ‘लाल किताब’ ज्योतिर्विद्या की एक स्वतन्त्र और मौलिक सिद्धान्तों पर आधारित एक अनोखी पुस्तक है। इसकी कुछ अपनी निजी विशेषताएँ हैं, जो अन्य सैद्धान्तिक अथवा प्रायोगिक फलित ज्योतिष-ग्रन्थों से हटकर हैं। इसकी सबसे बड़ी विशेषता ग्रहों के बुरे प्रभाव से बचने के लिए जातक को ‘टोटकों’ का सहारा लेने का संदेश देना है। कुछ लोग लाल किताब को टोनो और टोटको की किताब समझते हैं, तो कुछ लोग इस को तंत्र की किताब मानते हैं। सच्चाई ऐसी नहीं है, लाल किताब से हम किसी का भी कोई नुक्सान नहीं बल्कि केवल भलाई ही कर सकते है। ये टोटके इतने सरल हैं कि कोई भी जातक इनका सुविधापूर्वक सहारा लेकर अपना कल्याण कर सकता है। काला कुत्ता पालना, कौओं को खिलाना, क्वाँरी कन्याओं से आशीर्वाद लेना, किसी वृक्ष विशेष को जलार्पण करना, कुछ अन्न या सिक्के पानी में बहाना, चोटी रखना, सिर ढँक कर रखना आदि। ऐसे कुछ टोटकों के नमूने हैं, जिनके अवलम्बन से जातक ग्रहों के अनिष्टकारी प्रभावों से अनायास की बचा जाता है। कीमती ग्रह रत्नों (मूंगा, मोती, पुखराज, नीलम, हीरा आदि। में हजारों रुपयों का खर्च करने के बजाय जातक इन टोटकों के सहारे बिना किसी खर्च के (मुफ्त में) या अत्यल्प खर्च द्वारा ग्रहों के बुरे प्रभाव से अपनी रक्षा कर सकता है। लाल किताब के द्वारा पिछले जन्म और अगले जन्म का हाल बखूबी बताया जा सकता है। किसी भी जातक के जन्म की तिथि या समय के अभाव में उस व्यक्ति के चेहरे, हाथो की रेखा और शरीर के अंगो जैसे कान, होंठ, आंखे आदि देख कर भी बहुत कुछ बताया जा सकता है। लाल किताब में पूर्व जन्म में किये गए पाप कर्मो को धोने के भी उपाय बताये गए हैं। उदहारण के तौर पर यदि जन्मकुंडली के दूसरे या सातवें घर में यदि शुक्र के शत्रु ग्रह ( राहू , सूर्य , चंद्रमा) बैठे हैं, तो उस जातक को वैवाहिक जीवन में असंतुष्टि हो सकती है, जिसका एक कारण ये भी हो सकता है कि उस व्यक्ति ने पूर्व जन्म में किसी गर्भवती स्त्री या गाय को स्वार्थवश सताया होगा। उपाय के तौर पर लालकिताब बताती है कि उस व्यक्ति को १०० स्वस्थ गायो को एक ही दिन में हरा चारा खिलाना चाहिए और किसी भी स्त्री या गाय को सताना नहीं चाहिए। पहले लाल किताब हिमाचल और उत्तरांचल के पहाड़ी इलाकों में फैली विद्या थी, इसके बाद पंजाब और अफगानिस्तान तक फैल गई। यह विद्या अपने पांव पसारती गई। कहा जाता है कि यह विद्या एक परिवार के पास संरक्षित है। आज भी उस परिवार के लोग पीढ़ी-दर-पीढ़ी इसे आगे बढ़ाते हैं। यह विद्या उस परिवार तक कैसे पहुंची, इसके पीछे भी रहस्यमय कहानी है। लाल किताब का रहस्य क्या है – lal kitaab ka rahasy kya hai लाल किताब एक रहस्यमई किताब है। यह किताब संस्कृति व परंपरा पर आधारित है। इसमें सामुद्रिक विज्ञान और वास्तु शास्त्र दोनों का विश्लेषण है । लाल किताब पंजाब  से ऐसी जगह पर बहुत प्रचलित और लोकप्रिय हैं। इसका सीधा कारण है इसके लाभकारी उपाय/नुश्के। इस किताब में जीवन के सारे रहस्य और ज्यादातर सारी समस्याओं का समाधान भी है। जिन लोगों को ज्यादा समस्याएं होती हैं, वे लाल किताब का सहारा लेते हैं । लाल किताब जैसे एक बंद ताले की चाबी है। इस किताब की मदद से जीवन के कहीं इच्छुक रहस्य मिलते हैं-जो शादी से संबंधित भी हो सकते हैं ,संतान से संबंधित, नौकरी संबंधित , या बीमारी संबंधित भी। इस किताब की हर जगह तलास रहती है । इससे लोगों को बहुत संतुष्टि मिलती है और इसके उपाय भी काफी फायदेमंद होते हैं। हर इंसान को अपने कर्मो का नतीजा भोगना ही पड़ता है। ये तो संसार का  नियम है  ‘जो जैसा बोयेगा वैसा ही फल पायेगा’। ये सिर्फ हमारा भाग्य बदलने का एक सहारा है। लेकिन पूरा योगदान तो हमेशा से भगवान के आशीर्वाद ही रहा है। भगवान की लीला से तो हर कोई वाकिफ है।  हमेशा से कहा जाता है भगवान को कभी भी ना भूले ,चाहे सुख हो या दुख । दुख में भगवान हमारा सहारा बनते हैं और सुख उन्हीं की वजह से मिलता है। लाल किताब के टोटके – Lal kitab ke totke in hindi अक्सर आपने देखा होगा कि आप बहुत सारी मेहनत करते हैं और दिन रात एक कर देते हैं लेकिन आपको कुछ हासिल नहीं होता है, लेकिन इसके विपरीत कुछ ऐसे लोग भी होते हैं जो काम मेहनत में ज्यादा सफल हो जाते हैं और उनके पास वो सब होता है जिसे पाने की आपकी तमन्ना थी।  कहने का मतलब है आपके अंदर क्षमता तो है लेकिन आपकी किस्मत सोई हुई है। किस्मत को जगाने के लिए लाल किताब में कुछ उपाय दिये गए है। यदि आपने लाल किताब के ये टोटके या उपाय कर लिए तो आपकी सोई हुई किस्मत जाग जाएगी। लाल किताब का टोटका है चिड़ियों को दाना डालें – lal kitaab ka totaka hai chidiyon ko daana daalen अपनी सोई किस्मत को जगाना चाहते हैं तो रोजाना चिड़ियों के लिए दाना और पानी अपने घर के बाहर या बालकनी में रखें। लाल किताब में दिया गया है गाय को भोजन खिलाएं – lal kitaab mein diya gaya hai gaay ko bhojan khilaen गाय को रोजाना हर चारा खिलाएं। यदि आपको हरा चारा नहीं मिलता तो आप गाय को दो रोटी और गुड़ रोज खिलाएं। ऐसा करने से आपका दुर्भाग्य दूर होगा। लाल किताब के अनुसार घर में रखें मछलियां – lal kitaab ke anusaar ghar mein rakhen machhaliyaan घर में फिश अक्वेरीयम रखें। इसमें दो गोल्डन फिश के साथ पांच मछली काले रंग की रखें, यह आपका दुर्भाग्य पाने ऊपर ले लेती हैं। लाल किताब का टोटका है शनि यंत्र रखें -lal kitaab ke totake hai shani yantr rakhen लाल किताब के उपाय के अनुसार आप अपने पास हमेशा शनियंत्र रखें। चाहे गले में पहनें या अपने पर्स में रखें। शनि यंत्र आपके ऊपर आने वाली हर बला को टालेगा और आपकी सफलता की राह भी खोलेगा। लाल किताब के अनुसार बंद घड़ी या टूटा शीशा घर में न रखें – lal kitaab ke anusaar

777e2f7c cac0 4162 9d5b dbb09ca348e1

भगवान को क्यों चढ़ाया जाता है नारियल – Bhagwan ko kyun chadhate hain nariyal in Hindi

भगवान को नारियल क्यों चढ़ाया जाता है – Nariyal kyon chadhaya jata hai नारियल को संस्कृत में ‘श्रीफल’ कहा जाता है और श्री का अर्थ लक्ष्मी है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, लक्ष्मी के बिना कोई भी शुभ काम पूर्ण नहीं होता है। इसीलिए शुभ कार्यों में नारियल का इस्तेमाल अवश्य होता है। नारियल के पेड़ को संस्कृत में ‘कल्पवृक्ष’ भी कहा जाता है। ‘कल्पवृक्ष’ सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करता है। पूजा के बाद नारियल को फोड़ा जाता है और प्रसाद के रूप में सब में वितरित किया जाता है।सनातन धर्म में पूजा के दौरान तमाम चीजें भगवान को अर्पित की जाती हैं। उसमें नारियल का अपना अलग महत्व है. कई अनुष्ठानों में तो नारियल के बगैर पूजा अधूरी मानी जाती है. मान्यता है नारियल का भोग भगवान ग्रहण करते हैं और प्रसन्न होकर भक्तों को आशीर्वाद देते हैं. इसके अलावा कोई नया या शुभ काम करने के दौरान भी नारियल फोड़ने का चलन है. लेकिन आखिर धार्मिक कार्यों के दौरान नारियल इतना अहम् क्यों माना जाता है। मान्यता है नारियल का भोग भगवान ग्रहण करते हैं और प्रसन्न होकर भक्तों को आशीर्वाद देते हैं. इसके अलावा कोई नया या शुभ काम करने के दौरान भी नारियल फोड़ने का चलन है। नारियल का फल चढ़़ाने के पीछे कई तरह की मान्यताएं प्रचलित हैं. कहा जाता है कि विष्णु भगवान पृथ्वी पर अवतरित होते समय मां लक्ष्मी के साथ नारियल का वृक्ष और कामधेनु दोनों को अपने साथ लाए थे, इसलिए ये भगवान को अति प्रिय है। इसके अलावा कुछ विद्वानों का मत है कि नारियल ही वो कल्पवृक्ष है जिसका जिक्र अक्सर शास्त्रों में मिलता है. कल्पवृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास होता है. इसलिए इस वृक्ष का फल भगवान को अति प्रिय होता है. कुछ लोग नारियल पर बनी तीन आखों को शिव जी के तीन नेत्र मानते हैं. कुल मिलाकर नारियल का संबन्ध देवताओं से जोड़कर देखा जाता है, इसलिए इसे पवित्र माना जाता है और भगवान को अर्पित किया जाता है। नारियल क्यों फोड़ा जाता है – Nariyal kyu foda jata hai इसलिए नारियल फोड़कर किया जाता है शुभ काम हिंदू धर्म में कई तरह की परंपराएं पौराणिक काल से चली आ रही हैं. इन्हीं में से एक परंपरा नरबलि की भी है. माना जाता है कि पुराने समय में साधक अपनी साधना पूरी करने के लिए और अपनी मनोकामना की पूर्ति के लिए नर बलि देते थे. बाद में इस प्रथा को बंद कर दिया गया और नर की जगह नारियल की बलि दी जाने लगी क्योंकि नारियल को नर का प्रतीक माना जाता है. इसके ऊपर के बुच को बाल इसके सख्त हिस्से को खोपड़ी और पानी को रक्त की संज्ञा दी जाती है। नारियल एक सख्त सतह और फिर एक नर्म सतह होता है और फिर इसके अंदर पानी होता है जो बहुत पवित्र माना जाता है। इस पानी में किसी भी तरह की कोई मिलावट नहीं होती है। नारियल भगवान गणेश का पसंदीदा फल है। इसलिए नया घर या नई गाड़ी लेने पर फोड़ा जाता है। इसका पवित्र पानी जब चारों तरफ फैलता है तो नकारात्मक शक्तियां दूर हो जाती हैं। मानव के रूप में विश्वामित्र ने तैयार किया था नारियल ये भी मान्यता है कि नारियल को मानव के रूप में विश्वामित्र ने तैयार किया था. एक बार वे इन्द्र से रुष्ट हो गए और दूसरे स्वर्ग लोक का निर्माण करने लगे. उसके बाद उनका मन बदला और वो दूसरी सृष्टि का ही निर्माण करने लगे. तब उन्होंने मानव के रूप में नारियल का निर्माण किया. इसीलिए नारियल के खोल पर बाहर दो आंखें और एक मुख की रचना होती है। महिलाएं क्यों नहीं तोड़ती नारियल – Ladkiya nariyal kyu nahi todte  नारियल फोड़ना बलि का प्रतीक माना जाता है, और परंपरागत रूप से नारियल को नई सृष्टि के युगो का बीज माना गया है। नारियल को बीज का स्वरूप माना गया है और इसे प्रजनन से जोड़कर देखा जाता है। महिलाओं को ही ईश्वर ने संतान को जन्म देने की शक्ति प्रदान की है इसलिए स्त्री को उत्पत्ति की कारक माना गया है, यही कारण है कि महिलाओं के लिए नारियल फोड़ना वर्जित कर्म माना गया है। दरअसल ऐसा माना जाता है कि नारियल एक फल नहीं है बल्कि बीज है। बीज से ही किसी बच्चे का जन्म होता है। महिलाएं भी शिशु को जन्म देती हैं, ऐसे में वो बीज को नुकसान कैसे पहुंचा सकती हैं इसलिए उन्हें नारियल फोड़ने से रोका जाता है। मान्यता ये भी है कि नारियल भगवान विष्णु की ओर से भेजा गया पृथ्वी पर पहला फल है और इस फल पर सिवाय लक्ष्मी जी को छोड़कर और किसी की हक नहीं इसलिए पराई स्त्रियों को नारियल फोड़ने से रोका जाता है। नारियल के वृक्ष को कल्पवृक्ष कहते है, नारियल में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों ही देवताओं का वास माना गया है। ये भी एक कारण है महिलाओं को नारियल के दूर रखने का। कलश पर क्यों रखा जाता है नारियल – Kalasg par kyu rakhte hain nariyal आम तौर पर देखा जाता है कि कलश स्थापना के दौरान कलश के उपर नारियल रखा जाता है। दरअसल, कलश के ऊपर धरे नारियल को भगवान गणेश का प्रतीक भी माना जाता है। कलश में सभी तीर्थों को आमंत्रित किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार इससे शुभ फल की प्राप्ति होती है और भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं। कलश पर नारियल रखने का सही तरीका – Kalash par nariyal kaise rakhe in Hindi कलश के ऊपर नारियल रखने का उद्देश्य ये होता है कि कलश में स्थित देवता और तीर्थ मंगलकारी हों। साथ ही देवी लक्ष्मी की कृपा से उन्नति बनी रहे। लेकिन कलश स्थापन का उद्देश्य तभी सफल होता है जब कलश पर रखा हुआ नारियल का मुख पूजन करने वाले जातक की ओर हो। नारियल का मुख उस सिरे पर होता है, जिस तरफ से वह पेड़ की टहनी से जुड़ा होता है। ऐसे में नारियल रखते समय ध्यान दें कि उसका मुख जातक की तरफ रहे। कलश पर इस तरह नारियल रखना होता है हानिकारक “अधोमुखं शत्रु विवर्धनाय, ऊर्धवस्य वस्त्रं बहुरोग वृध्यै। प्राचीमुखं वित विनाशनाय, तस्तमात् शुभं संमुख्यं नारीलेलंष्।” इस श्लोक में

pic

कर्ज मुक्ति के लिए लाल किताब के अचूक उपाय

क़र्ज़ मुक्ति के लिए लाल किताब के अचूक उपाय – Karj mukti ke upay lal kitab in Hindi कर्ज या ऋ़ण का होना जिंदगी को मुश्किल में डाल देता है। कर्ज मुक्त जीवन ही सबसे खुशहाल जीवन होता है। कई बार कर्ज लेने के बाद उसे लौटाना व्यक्ति को भारी पड़ता है और उसकी पूरी जिंदगी कर्ज चुकाते-चुकाते खत्म हो जाती है। कर्ज मुक्ति हेतु आइए जानें कुछ सरल और कुछ कठिन, लेकिन अचूक उपाय। ऋ‍ण उतारने के लिए नारियल करे अर्पित – Karj mukti nariyal ke fayde in hindi  एक नारियल पर चमेली का तेल मिले सिन्दूर से स्वस्तिक का चिह्न बनाएं। कुछ भोग (लड्डू अथवा गुड़-चना) के साथ हनुमानजी के मंदिर में जाकर उनके चरणों में अर्पित करके ऋणमोचक मंगल स्तोत्र का पाठ करें। आप हर रोज लाल मसूर की दाल का दान करें और मंगलवार के दिन शिवलिंग पर मसूर की दाल और जल अर्पित करें। इसके बाद ओम ऋण मुक्तेश्वर महादेवाय नम: का जाप करें। इससे आपको कर्ज और लोन से धीरे-धीरे मुक्ति मिल जाएगी। तत्काल लाभ प्राप्त होगा।दूसरा उपाय शनिवार के दिन सुबह नित्य कर्म व स्नान आदि करने के बाद अपनी लंबाई के अनुसार काला धागा लें और इसे एक नारियल पर लपेट लें। इसका पूजन करें और उसको नदी के बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें। साथ ही भगवान से ऋण मुक्ति के लिए प्रार्थना करें। कर्ज मुक्ति का अचूक उपाय है भौम प्रदोष व्रत – Bhom Pradosh Vrat se paaye karj mukti  हर महीने की दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। अलग-अलग दिन पड़ने वाले प्रदोष की महिमा अलग-अलग होती है। सोमवार का प्रदोष, मंगलवार को आने वाला प्रदोष और अन्य वार को आने वाला प्रदोष सभी का महत्व और लाभ अलग अलग है।मंगलवार को आने वाले इस प्रदोष को भौम प्रदोष कहते हैं। इस दिन स्वास्थ्य सबंधी तरह की समस्याओं से मुक्ति पाई जा सकती है। इस दिन प्रदोष व्रत विधिपूर्वक रखने से कर्ज से छुटकारा मिल जाता है। साथ ही इस दिन आप गरीब व जरूरतमंद को भोजन भी कराएं। ऐसा करने से आपके अशुभ ग्रहों का प्रभाव खत्म होता है। कर्ज से छुटकारा पाने के ले मंगल एवं बुध का उपाय – Karz mukti ke lie mangal aur budh ki karen puja मंगल की भातपूजा, दान, होम और जप करना चाहिए। मंगल एवं बुधवार को कर्ज का लेन-देन न करें। प्रतिदिन हनुमानअष्टक का पाठ सात बार करें। अगर प्रतिदिन करना संभव न हो तो मंगलवार को जरूर करें। कर्ज मुक्ति उपाय के नियम – Rules to Get Debt free in Hindi  ऋण की किश्तों को मंगलवार के दिन ही अदा करें। ऐसा करने से कर्ज शीघ्र ही समाप्त हो जाता है। किसी भी महीने की कृष्णपक्ष की 1 तिथि, शुक्लपक्ष की 2, 3, 4, 6, 7, 8, 10, 11, 12, 13 पूर्णिमा व मंगलवार के दिन उधार दें और बुधवार को कर्ज लें।  बुधवार को सवा पाव मूंग उबालकर घी-शक्कर मिलाकर गाय को खिलाने से शीघ्र कर्ज से मुक्ति मिलती है।  वास्तुदोष नाशक हरे रंग के गणपति मुख्य द्वार पर आगे-पीछे लगाएं। कहा जाता है कि भोजन में गुड़ का प्रयोग भी लाभदायक है।  प्रतिदिन लाल मसूर की दाल का दान करें। ऋणमोचक मंगल या गजेन्द्र-मोक्ष स्तोत्र का पाठ करें यदि आप कर्ज घेरे रहते हैं, उन्हें प्रतिदिन ‘ऋणमोचक मंगल स्तोत्र’ का पाठ करना चाहिए। यह पाठ शुक्ल पक्ष के प्रथम मंगलवार से शुरू करना चाहिए। यदि प्रतिदिन किसी कारण न कर सकें, तो प्रत्येक मंगलवार को अवश्य करना चाहिए। यह पाठ अपनी श्रद्धा अनुसार 1, 3, 5, 9, अथवा 11 पाठ 43 दिन तक नित्य करना चाहिए । इस स्तोत्र का नियमित पाठ करने से निश्चित ही कर्ज, ऋण व आर्थिक बाधा से मुक्ति मिलती है। इसके अलावा कर्ज-मुक्ति के लिए आप ‘गजेन्द्र-मोक्ष’ स्तोत्र का प्रतिदिन सूर्योदय से पूर्व पाठ भी कर सकते हैं। दोनों में से किसी एक का ही पाठ करें। दोनों ही कर्ज मुक्ति के लिए अमोघ उपाय हैं। आइए जानते हैं ऋण मोचक मंगल स्तोत्र – Karj Mukti Mangal Srotra Mantra ऋण मोचक मंगल स्तोत्र  मङ्गलो भूमिपुत्रश्च ऋणहर्ता धनप्रदः। स्थिरासनो महाकायः सर्वकर्मविरोधकः ॥१॥ लोहितो लोहिताक्षश्च सामगानां कृपाकरः। धरात्मजः कुजो भौमो भूतिदो भूमिनन्दनः॥२॥ अङ्गारको यमश्चैव सर्वरोगापहारकः। व्रुष्टेः कर्ताऽपहर्ता च सर्वकामफलप्रदः॥३॥ एतानि कुजनामानि नित्यं यः श्रद्धया पठेत्। ऋणं न जायते तस्य धनं शीघ्रमवाप्नुयात्॥४॥ धरणीगर्भसम्भूतं विद्युत्कान्तिसमप्रभम्। कुमारं शक्तिहस्तं च मङ्गलं प्रणमाम्यहम्॥५॥ स्तोत्रमङ्गारकस्यैतत्पठनीयं सदा नृभिः। न तेषां भौमजा पीडा स्वल्पाऽपि भवति क्वचित्॥६॥ अङ्गारक महाभाग भगवन्भक्तवत्सल। त्वां नमामि ममाशेषमृणमाशु विनाशय॥७॥ ऋणरोगादिदारिघ्र्यं ये चान्ये ह्यपमृत्यवः। भयक्लेशमनस्तापा नश्यन्तु मम सर्वदा॥८॥ अतिवक्त्र दुरारार्ध्य भोगमुक्त जितात्मनः। तुष्टो ददासि साम्राज्यं रुश्टो हरसि तत्क्षणात्॥९॥ विरिंचिशक्रविष्णूनां मनुष्याणां तु का कथा। तेन त्वं सर्वसत्त्वेन ग्रहराजो महाबलः॥१०॥ पुत्रान्देहि धनं देहि त्वामस्मि शरणं गतः। ऋणदारिद्रयदुःखेन शत्रूणां च भयात्ततः॥११॥ एभिर्द्वादशभिः श्लोकैर्यः स्तौति च धरासुतम्। महतिं श्रियमाप्नोति ह्यपरो धनदो युवा॥१२॥ इति श्रीस्कन्दपुराणे भार्गवप्रोक्तं ऋणमोचक मङ्गलस्तोत्रम् सम्पूर्णम् गुलाब से करें खुद को कर्ज मुक्त – Gulab se karen khud ko karj mukt सर्वप्रथम 5 लाल गुलाब के पूर्ण खिले हुए फूल लें। इसके पश्चात् डेढ़ मीटर सफेद कपड़ा लेकर अपने सामने बिछा लें।अब इन पांचों गुलाब के फुलों को उसमें रखकर 21 बार गायत्री मंत्र पढ़ते हुए उसे बांध दें। इसके बाद इसे ले जाकर किसी बहती हुई नदी में प्रवाहित कर दें। इस उपाय से ऋण मुक्ति होगी और घर में सुख समृद्धि की प्राप्ति होगी इस उपाय से जल्द ही कर्ज से मुक्ति मिल जाती है। श्मशान का पनि है कर्ज मुक्ति का अचूक उपाय – Shamshan ka pani lal kitab in Hindi यदि आप निरंतर कर्ज में डूबते जा रहे हैं तो श्मशान के कुएं का जल लाकर किसी पीपल के वृक्ष पर चढ़ाना चाहिए। यदि यह उपाय कम से कम छह 6 शनिवार किया जाए तो आश्चर्यजनक परिणाम प्राप्त होते हैं। कर्ज मुक्त होने के लिए करें विष्णु-लक्ष्मी की पूजा – karz se mukt hone ke liye Vishnu-Laxmi ji ki puja karen सोमवार के दिन एक रूमाल, 5 गुलाब के फूल, 1 चांदी का पत्ता, थोड़े से चावल तथा थोड़ा सा गुड़ लें। फिर किसी विष्णु लक्ष्मीजी के मंदिर में जाकर मूर्त्ति के सामने रूमाल रखकर शेष वस्तुओं को हाथ में लेकर 21 बार गायत्री मंत्र का पाठ करते हुए बारी बारी से उक्त वस्तुओं को उसमें डालते रहें। फिर इनको इकट्ठा करके कहें कि ‘मेरी परेशानियां दूर हो जाएं तथा

Kaise Pata Kare Ki Nazar La

बुरी नज़र से बचने के उपाय – Evil Eye Protection In Hindi

ईविल ऑय क्या है – What is Evil Eye in Hindi ईविल ऑय बुरी नज़र से बचने में मदद करता है पर आज कल लोग इसे ज्वेलरी के रूप में भी पहनना पसंद कर रहे हैं। आइए जानते हैं की आप बुरी नजर से बचने के लिए किन-किन चीजों को धारण कर सकते हैं – नेकपीस (गले का हार) – Evil eye necklace meaning  आजकल मार्केट में Evil Eye डिजाइन के छोटे-छोटे पेंडेंट मिलते हैं। यह देखने में बेहद खूबसूरत लगते हैं। आप इसे डेली यूज में आसानी से पहन सकती हैं। ईयररिंग्स (कान के बुंदे) – Evil eye earrings in Hindi आजकल इस तरह के लॉन्ग ईयररिंग्स काफी पसंद किए जा रहे हैं, जो देखने में बेहद अच्छे लगते हैं। वैसे तो इस तरह के स्टेटमेंट ईयररिंग्स आपको मार्केट में भी मिल जांगे लेकिन अगर आप चाहें तो इसे ऑनलाइन भी खरीद सकती हैं। ब्रेसलेट (हाथ का कडा) – Evil eye bracelet आजकल तो एक बेहद लाइट व पतला ब्रेसलेट हाथों की शोभा बढ़ाता है। इस तरह के ब्रेसलेट केजुअल से लेकर ऑफिस तक आसानी से पहने जा सकते हैं। अगर आप ब्रेसलेट में कुछ डिफरेंट पहनना चाहती हैं तो Evil Eye ब्रेसलेट का चयन कर सकती हैं। एंक्लेट (पायल) – Evil eye anklet in Hindi  सुनने में आपको शायद अजीब लगे लेकिन Evil Eye डिजाइन को अब पायल में भी इस्तेमाल किया जा रहा है और यह पायल देखने में इतनी अच्छी लगती है कि कहीं उसे ही किसी की नजर न लग जाए। अगर आपको मार्केट में Evil Eye डिजाइन की पायल नहीं मिलती हैं तो आप अमेजन से इसे आसानी से खरीद सकती हैं। बुरी नज़र क्या होती है – Buri nazar kya hoti hai  नजर दोष के कारण मनुष्य को जीवन में कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। हर क्षेत्र में निराशा हासिल होने लगती है। सिर में हमेशा दर्द बना रहता है और घबराहट होती रहती है। आमतौर पर ऐसा माना जाता है कि पर बुरी नज़र के कारण व्यक्ति की सकारात्मक ऊर्जा नष्ट हो जाती है। यदि किसी घर को नजर लग जाए तो उस घर में सदैव कलह होता रहता है जिससे अशांति का माहौल बना रहता है। घर-परिवार का कोई न कोई सदस्य किसी न किसी रोग से पीड़ित रहने लगता है। आर्थिक स्थिति कमजोर होने लगती है और खर्च जरूरत से ज्यादा बढ़ जाते हैं। यदि काम-धंधे में नजर लग जाए तो व्यापार ठप हो जाता है। यदि किसी शिशु को नजर लग जाए तो वह बीमार पड़ जाता है और बिना बात के बार-बार रोने लगता है। इन लक्षणों से पता चलता है कि आपको बुरी नजर लगी है या नहीं – Buri nazar ke lakshan in hindi हमारे आस-पास सकारात्मक और नकारात्मक दो तरह की ऊर्जा होती हैं। ये ऊर्जा हमारे व्यवहार, सोच और क्रियाओं से आती हैं। ऐसी मान्यता है कि नजर लगने से स्वास्थ्य बिगड़ने के साथ हमारी प्रगति भी रूक जाती है। ऐसा कहा जाता है कि नजर दोष के कारण मनुष्य को जीवन में कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। हर क्षेत्र में निराशा हासिल होने लगती है। सिर में हमेशा दर्द बना रहता है और घबराहट होती रहती है। यदि किसी घर को नजर लग जाए तो उस घर में सदैव कलह होता रहता है जिससे अशांति का माहौल बना रहता है। घर-परिवार का कोई न कोई सदस्य किसी न किसी रोग से पीड़ित रहने लगता है। आर्थिक स्थिति कमजोर होने लगती है और खर्च जरूरत से ज्यादा बढ़ जाते हैं। यदि काम-धंधे में नजर लग जाए तो व्यापार ठप हो जाता है। बुरी नज़र लग जाए तो क्या करे? – Buri nazar se bachne ke upay hindi आइए आज हम उन अचूक उपायों के बारे में जानते हैं जो बड़े से बड़े नजर दोष को चुटकियों में दूर कर देता है। नजर दोष से बचने के लिए जब कभी भी अपनी या फिर किसे अपने प्रिय की तारीफ करें तो लकड़ी को छूकर ही कुछ बोलें. पश्चिम में लोग अक्सर नजर दोष से बचने के लिए यही उपाय करते हैं। जब आपको लगे कि किसी व्यक्ति विशेष की नजर लगी है तो आप उससे अपने बच्चे के सिर पर हाथ फिरवा कर भी नजर उतार सकते हैं। यदि आपको लगता है कि आपके घर के सामंजस्य या फिर कहें घर को ही किसी की नजर लग गई है तो घर में सुंदरकांड का पाठ करें और प्रतिदिन धूप-दिया जलाएं. इस उपाय को करने से घर के भीतर सकारात्मक उर्जा उत्पन्न होती है और बुरी बलाएं दूर होती हैं। यदि आपको लगता है कि आपके बच्चे को नजर लग गई है और वह लगातार रोए जा रहा है या फिर चिड़चिड़ा हो गया है तो आप एक तांबे के लोटे में पानी और ताजे फूल लेकर के बच्चे के सिर पर से 11 बार उतारें। इसके बाद उस पानी को किसी पेड़ के नीचे या फिर गमले में डाल दें. इस उपाय को करते ही नजर दोष दूर हो जाएगा। यदि किसी बच्चे को नजर लग जाए तो पारंपरिक उपाय के तौर पर उसे नमक, राई के दाने, पीली सरसों, मिर्च, पुरानी झाडू का एक टुकड़ा लेकर नजर लगे व्यक्ति पर से आठ बार उतार कर आग में जला दें। यदि जलाने पर मिर्च की धांस नहीं आती है तो समझ लीजिए कि उसकी नजर उतर गई। बुरी नजर से बचना के लिए कोनसा रत्न पहनने? – Buri nazar se bachne ke liye kya pahne जिस व्यक्ति पर काला जादू/टोना टोटका और बुरी नज़र का प्रभाव हो उसे सुलेमानी हकीक धारण कारन चाहिए। सुलेमानी हकीक धारण करने के लाभ हर तरह के काला जादू और बुरी नजर के प्रभाव से बचाता है और अगर किसी को ऐसा लगता हो कि उस पर किसी की बुरी नजर है तो ऐसी अवस्था में उसे हकीक तुरंत धारण कर लेना चाहिए। नौकरी या व्यवसाय में अगर परेशानी आ रही हो तो भी इस रत्न को धारण करना बहुत लाभदायक रहता है। इसे किसी भी आयु का व्यक्ति किसी भी दिन पहन सकता है। यह बुरी नजर की बाधा दूर करके सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह करता है। सुलेमानी पत्थर को चांदी के लॉकेट में धारण करके नीले धागे में बांधकर

1 feng shui wohnen 1256761163

फेंगशुई के टोटके – Fengshui The Chinese Vastu Shastra in Hindi

फेंगशुई क्या है – What is Fengshui in Hindi फेंग शुई चीन की वास्तुकला है, जिसका अर्थ है हवा और पानी। हवा और पानी का सही संतुलन ही फेंग शुई है। हवा से सुख की अनुभूति होती है और पानी से तृप्ति। जिस प्रकार भारतीय वास्तु शास्त्र में प्रकृति के पांच तत्वों-अग्नि, पृथ्वी, वायु, जल और आकाश को महत्व दिया गया है, उसी प्रकार फेंग शुई में पांच तत्वों-अग्नि, पृथ्वी, धातु, जल और लकड़ी को महत्व दिया गया है। लेकिन दोनों में मूलभूत अंतर यह है कि फेंगशुई में भारतीय वास्तु शास्त्र के वायु और आकाश की जगह लकड़ी और धातु को लिया गया है। भारतीय वास्तुशास्त्र में हवा (वायु) को बहुत महत्व देते हैं। यहां पर हम फेंग शुई का संक्षिप्त परिचय देते हुए, फेंग शुई के उन्हीं उपायों का जिक्र करेंगे, जिन्हें भारतीय परिवेश में अपनाया जा सकता है। चीनी वास्तु शास्त्र के अनुसार फेंग शुई के पांच तत्वों को एक-दूसरे से दो तरीके से संबंध किया गया है। पहला है उत्पादक चक्र व दूसरा है विनाशक चक्र। फेंग शुई के महत्वपूर्ण उपकरण : बागुआ : फेंग शुई के अनुसार प्रत्येक वस्तु एक प्रकार की ऊर्जा उत्पन्न करती है, वह ऊर्जा नकारात्मक भी हो सकती है और सकारात्मक भी। यिन अर्थात नकारात्मक ऊर्जा और यांग अर्थात सकारात्मक ऊर्जा। यिन और यांग एक दूसरे के पूरक हैं जैसे रात और दिन, स्त्री और पुरुष, मृत्यु और जीवन। काला रंग यिन का प्रतीक है और सफेद रंग यांग का। ये दोनों चिह्न बागुआ के मध्य में होते हैं और आठों दिशाओं में आठ डाईग्राम होते हैं। https://linksredirect.com/?cid=170742&source=linkkit&url=https%3A%2F%2Fwww.starstell.com%2F फेंगशुई के टोटके? – Feng shui vastu shastra in hindi इन 13 बातो का ध्यान रखें खास ध्यान – फेंगशुई का तीन टांगों वाला मेंढक का टोटका – Feng shui frog where to place in Hindi फेंगशुई शास्त्र में तीन टांगों वाले मेंढक को बेहद शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि तीन टांगों वाले मेंढक जिसके मुंह में सिक्के लगे हों, उसे घर लाने से आर्थिक उन्नति होती है। इस दौरान एक बात का ध्यान रखना चाहिए कि मेंढक का मुंह घर के अंदर की ओर होना चाहिए और ना की बाहर। कहते हैं कि ऐसा करने से आपके कार्य धीरे-धीरे बनने लगते हैं। फेंगशुई के तीन सिक्के – Feng shui 3 coins in Hindi तीन चीनी सिक्कों को फेंगशुई में आर्थिक धन का प्रतीक माना जाता है। कहते हैं कि इन सिक्कों को लाल डोरी में बांधकर अपने घर या दुकान के मेनगेट में बांधना शुभ होता है। कहते हैं कि ऐसा करने आर्थिक स्थिति में धीरे-धीरे सुधार होने लगता है। लाफिंग बुद्धा के फायदे – Laughing buddha meaning in hindi तरक्की पाने के लिए और जीवन में खुशियों से भरने के लिए भी फेंगशुई शास्त्र में कई उपाय बताए गए हैं। कहा जाता है कि घर में सुनहरे रंग का लॉफिंग बुद्धा रखना शुभ होता है। फेंगशुई शास्त्र के अनुसार, उत्तर-पूर्व कोण में 30 डिग्री की ऊंचाई पर स्थापित करना चाहिए। लॉफिंग बुद्धा को भूलकर भी बेडरूम में नहीं रखना चाहिए। कहते हैं कि घर में लॉफिंग बुद्धा रखने से खुशहाली आती है और करियर में तरक्की मिलती है। और र लाफिंग बुददा अगर कोई गिफ्ट करे तो जयादा अच्छा माना जाता है। फेंगशुई कछुआ के लाभ – Feng shui turtle for career फेंगशुई के अनुसार, घर या ऑफिस में उत्तर दिशा की ओर कछुआ रखना शुभ माना जाता है। ध्यान रहे कि इसका मुंह हमेशा अंदर की ओर होना शुभ होता है। कहते हैं कि ऐसा करने से नौकरी और व्यापार संबंधी परेशानियां खत्म हो जाती हैं। इसके साथ ही शत्रुओं से भी मुक्ति मिलती है। फेंगसुई के अनुसार कछुआ की पीठ पर कछुए के बच्चे बैठे हुए एक दूसरे के ऊपर बैठे हुए संतान के लिए बहुत शुभ माने जाते हैं। जिन लोगों को आसानी से संतान प्राप्ति नहीं होती उनके लिए इस कछुए को घर में रखना सबसे ज्यादा शुभ माना जाता है । अगर इस कछुए को कोई रिश्तेदार या आपका दोस्त गिफ्ट करें तो है ज्यादा बेहतर माना जाता है। पासे कमाने का फेंगशुई उपाय – Feng shui where to keep broom घर या ऑफिस में झाडू को हमेशा ऐसी जगह पर रखना चाहिए, जहां पर किसी दूसरे की नजर न पड़े। कहते हैं कि कहीं भी झाडू रख देने से समृद्धि में भी कमी आती है। इसलिए हमेशा झाड़ू को संभालकर रखना चाहिए। फेंगशुई क्रिस्टल का अचूक उपाय – Feng shui crystal ball benefits in Hindi फेंगशुई के मुताबिक बटुए में क्रिस्टल रखने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और आर्थिक विकास होता है। इसके लिए आप पायराइट, कारनेलेन और सिट्रीन क्रिस्टल को पर्स में रख सकते हैं। फेंगशुई घोड़ा बढ़ाता है तरक्की – Feng shui horse placement in Hindi चीनी वास्तुशास्त्र फेंगशुई के अनुसार घोड़े को तरक्की और सुख-समृद्धि का रूप माना जाता है। ऐसे मे अगर आपको नौकरी और व्यापार में तरक्की चाहिए तो घोड़े की मूर्ति को घर रख सकते हैं। फेंगशुई घंटी – Feng shui clock placement फेंगशुई में घर पर लटकती हुई घंटी का विशेष महत्व होता है। घर पर खुशनुमा वातावरण बनाने के लिए आप अपने घर में मुख्य द्वार या खिड़की के पास बेल्स या घंटी को टांग दें। इससे जो आवाज पैदा होती है उससे घर का माहौल हमेशा सकारात्मक बना रहता है। फेंगशुई बांस का पौधा – Feng shui plants in hindi फेंगशुई में घर पर बांस के पौधे रखने पर विशेष लाभ मिलता है। बांस के पौधे को सुख-समृद्धि का प्रतीक माना हैं। इनसे परिवार के सदस्यों को पूर्ण आयु व अच्छी सेहत मिलती है। बांस का पौधा वहां लगाना चाहिए जहां पर परिवार के सभी सदस्य एक साथ बैठते हों। बांस के पौधे को पूर्वी कोने में रखना चाहिए। लव बर्ड मूर्ति – Feng shui love birds लव बर्ड जैसे पक्षी प्रेम के प्रतीक माने जाते हैं ऐसे में पति-पत्नी के बीच मधुर संबंध बनाए रखने के लिए लव बर्ड पक्षी की मूर्ति के जोड़े को बेडरूम में रखना शुभ होगा। फेंगशुई पिरामिड – Fengshui Pyramid for Prosperity घर पर पैसे की आवक बनाए रखने के लिए और आर्थिक सम्पन्नता पाने के लिए पिरामिड का रखना शुभ होता है। फेंगशुई पिरामिड को घर के

images

बेस्ट ब्यूटी प्रोडक्ट्स इन इंडिया

मॉइस्चराइज़र मॉइस्चराइज़र लगाने का क्या फायदा है ? मॉइस्चराइज़र माना जाता है कि यदि आपकी त्वचा बहुत सामान्य या ऑयली है तो आपके चेहरे की चमक कम पड़ सकती है। ऐसे में चेहरे की बेहतर देखभाल के लिए आपको किसी अच्छे मॉइस्चराइजर को अपनी रोज के काम का आवश्यक हिस्सा मानना चाहिए। वास्तव में पर्याप्त नमी के बिना त्वचा की तेल ग्रंथियां चेहरे को सूखा होने से बचाने का काम करती हैं जिससे कारण त्वचा के रोमछिद्र (pores) बंद हो जाते हैं और त्वचा पर दाग धब्बे और मुंहासे आने लगते हैं। जिस तरह से व्यक्ति उचित खान पान , योग, व्यायाम और वर्कआउट पर ध्यान देता है ठीक उसी तरह चेहरे की देखभाल के लिए इसे मॉश्चराइज करने की जरूरत पड़ती है। त्वचा पर सही तरह के मॉइस्चराइजर का उपयोग करने से यह संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। जब त्वचा बहुत अधिक सूखा जाए या बहुत अधिक तैलीय (oily) होती है, तो त्वचा की कई सामान्य समस्याएं जैसे मुंहासे निकलना शुरू हो जाते है, मॉइस्चराइज़र के इस्तमाल से आपको इन सभी समस्या से बचाता है। मॉइस्चराइज़र लगाने का सही तरीका क्या है ? मॉइस्चराइज़र स्नान करने के बाद या पानी में काम करने के बाद मॉइस्चराइजर लगाना ज़रूरी है। हर बार जब आप स्नान करके, नहाकर या कपड़े धो कर बाहर निकलें, तो अपने हाथों पर और शरीर पर मॉइस्चराइजर लगाना ना भूलिए ,अगर आपकी त्वचा ज़्यादा ड्राई है तो दिन में कम-से-कम 2 बार मॉइश्चराइजर लगाना ज़रूरी है। आप स्नान के बाद और सोने से पहले मॉइश्चराइजर लगा सकते हैं। अपने चेहरे पर मॉइश्चराइजर लगाने से पहले उसे पानी से अच्छी तरह से धो लीजिए। इसे चेहरे पर बनी हुई धूल की पर्त निकल जाएगी और मॉइश्चराइजर आपके स्किन में अच्छी तरह से समा जाएगा। इसके बाद तर्जनी (index finger) से थोड़ा-सा क्रीम लेकर उसे अपने माथे पर और गालों पर छोटे-छोटे बिन्दुओं में लगाएं. इसके बाद अपनी उंगलियों से हल्के-हल्के क्रीम ऊपर और बाहर की दिशा में एक समान लेयर में फैलाईये। मेकअप करने से पहले या बाहर जाने से पहले कम-से-कम 5 मिनट के लिए मॉइस्चराइजर को सेट होने दें। प्राइमर प्राइमर लगाने का क्या फायदा है ? प्राइमर लगाने से रोम छिद्र बंद हो जाते हैं और चेहरा खूबसूरत दिखता है। यही कारण है कि मेकअप के दौरान सबसे पहले प्राइमर लगाया जाता है। प्राइमर का इस्तेमाल करने से त्वचा कोमल और मुलायम होती है। खास बात यह है कि आपका मेकअप लंबे समय तक टिकता है। इसे इस्तेमाल करने के बाद आप कोई भी फाउंडेशन या कंसीलर का इस्तेमाल कर सकती हैं। आपके ओपन पोर्स को सील करके यह उन्हें कम विज़िबल बनाता है को फ्लॉलेस बनाता है। यह आपकी त्वचा की सतह को चिकना बनाता है, जिससे आपका मेकअप आसानी से ग्लाइड होता है, और अच्छी तरह ब्लेंडेड दिखाई देता है। मेकअप करने से पहले मेकअप प्राइमर का इस्तेमाल करने से आपका पूरा चेहरा मखमल जैसा दिखने लगता है। यह वास्तव में इतना आकर्षक रूप है प्राइमर लगाने का सही तरीका क्या है ? प्राइमर लगाते समय एक बात का ध्यान रखें कि आपको यह अपनी उंगलियों के टिप से ही लगाना है। इसके लिए ब्रश या फिर ब्लेंडर का इस्तेमाल न करें। उंगलियों से प्राइमर ढंग से लगेगा और आपका चेहरा प्राइमर लगाने के बाद ही चमक उठेगा। उसके बाद आप फ्लॉलेस मेकअप पा सकती हैं। प्राइमर को हमेशा थोड़ा सा लेकर चेहरे पर लगाना चाहिए। इसकी 1 ड्रॉप ही आपके चेहरे पर अच्छे से काम करती है प्राइमर लगाने से पहले मॉइश्चराइजर जरूर लगाएं। अगर आपकी स्किन डल है तो टिंटेड प्राइमर का इस्तेमाल करें। इससे आपके चेहरे की चमक वापस आ जाएगी। ध्यान रहे कि आपका प्राइमर फाउंडेशन से कंपैटिबल हो। वॉटर बेस्ड प्राइमर के साथ वॉटर बेस्ड फाउंडेशन का ही इस्तेमाल करें। इससे आपका बेस सेपरेट नहीं होगा। फाउंडेशन फाउंडेशन ​लगाने का क्या फायदा है ? फाउंडेशन चेहरे को बेदाग और चमकदार बनाता है, लेकिन इसे सही तरीके से अप्लाई न किया जाए तो ये केकी और पैची लुक देता है। इसलिए फाउंडेशन चुनने के साथ इसे लगाने का सही तरीका जरूर जान लें। लिक्विड फाउंडेशन हर तरह की स्किन के लिए ठीक होता है। मेकअप में फाउंडेशन काफी इंपॉर्टेंट पार्ट है, क्योंकि इससे चेहरे के दाग-धब्बे छिप जाते हैं। इसका बाद ही मेकअप की शुरुवात की जाती है, जिसे आपका फेस चमकदार और प्रभावित लगता है। फाउंडेशन ​लगाने का सही तरीका क्या है ? मेकअप में फाउंडेशन काफी इंपॉर्टेंट पार्ट है, क्योंकि इससे चेहरे के दाग-धब्बे छिप जाते हैं, स्किन क्लीन, क्लीयर नजर आती है। लेकिन फाउंडेशन को फेस पर अप्लाई करने के लिए कुछ बातों पर ध्यान देना जरूरी होता है। फाउंडेशन अप्लाई करने से पहले अपने फेस को अच्छे से क्लीन करने के लिए माइल्ड फेस वॉश यूज करें, ताकि चेहरे से सारी गंदगी दूर हो जाए। फाउंडेशन को लगाने से पहले आप अपनी स्किन को जांच लें, अगर आपकी ऑयली स्किन है तो लाइट फाउंडेशन या ऑयल फ्री फाउंडेशन ही यूज करें। ड्राय स्किन के लिए लिक्विड या मॉयश्चराइज बेस्ड फाउंडेशन का इस्तेमाल करें। चेहरे को क्लीन करने के बाद फेस पर अपनी स्किन को सूट करता हुआ मॉयश्चराइजर लगाकर 5 मिनट रुकें। जिससे आपकी स्किन अच्छे से मॉयश्चराइज हो जाएगी। अब फाउंडेशन का लाइट बेस चेहरे पर लगाएं, इसके लिए अपनी फिंगर टिप्स का इस्तेमाल करें। फाउंडेशन को फेस से लेकर नेक तक लगाएं। हैवी बेस के लिए मेकअप स्पंज का इस्तेमाल करें। मेकअप स्पंज से फाउंडेशन को अच्छी तरह ब्लेंड करें। अगर चेहरे पर पिंपल्स हैं, तो उन पर एक बार और फाउंडेशन लगाएं। कंसीलर कंसीलर ​लगाने का क्या फायदा है ? मेकअप के सामान की लिस्ट में सबसे जरुरी मेकअप आइटम कंसीलर। कंसीलर का मुख्य काम त्वचा के गहरे भागों की रंगत में निखार लाना है। इसका उपयोग काले घेरों के साथ, नाक और मुंह के आस पास की काली पड़ी त्वचा, मुंहासों और डार्क स्पॉट्स को छुपाने के लिए भी किया जा सकता है।  कंसीलर खासतौर पर दो प्रकार के होते हैं, जिनका उपयोग अलग-अलग तरह की त्वचा के लिए किया जा सकता है।  क्रीम कंसीलर – नॉर्मल से ऑयली स्किन के लिए इस प्रकार के कंसीलर का टेक्सचर क्रीमी होता है। यह नॉर्मल से

Free shipping in All over India

On all orders

Easy 7 days returns

7 days money back guarantee

100% Genuine & Certified Products

Offered in the country of usage

100% Secure Checkout

PayPal / MasterCard / Visa