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कैंसर के लक्षण, कारण, उपाय और कैंसर से बचाव

कैंसर क्या है? कैंसर कई सारे रोगों का एक समूह है जो किसी भी अंग या ऊतक को प्रभावित कर सकता है। कैंसर वह रोग है जो कि शरीर में असामान्य कोशिकाओं के बढ़ने के कारण फैलता है। ये कोशिकाएं एक अंग से अन्य अंगों तक फ़ैल कर रोग को पूरे शरीर में फैला सकती हैं। इस स्थिति को मेटास्टेटसाइजिंग कहा जाता है और यह कैंसर से मृत्यु का सबसे प्रमुख कारण है। कैंसर को नियोप्लास्म या ट्यूमर कहा जाता है। दुनियाभर में होने वाल मृत्यु का कैंसर दूसरा सबसे कारण है। 2018 की एक रिपोर्ट के अनुसार लगभग 9.6 मिलियन लोग या हर छह में से एक व्यक्ति कैंसर का शिकार होता है। फेफड़ों का कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर, पेट का कैंसर और लिवर कैंसर पुरुषों में होने वाले सबसे सामान्य कैंसर है। वहीँ स्तन कैंसर, कोलोरेक्टल कैंसर, फेफड़ों का कैंसर, सर्वाइकल कैंसर और थायराइड कैंसर महिलाओं में होने वाले कैंसर का सबसे मुख्य प्रकार है। एक स्वस्थ शरीर में प्रतिदिन,प्रति मिनट लाखों कोशिकाओएं व ऊतक बनते और टूटते हैं क्योंकि शरीर को प्रत्येक दिन भिन्न कार्य करने होते हैं। स्वस्थ कोशिकाओं का अपना जीवन चक्र, प्रजनन और मृत्यु का एक चक्र होता है। पुरानी कोशिकाओं का स्थान नयी कोशिकाएं ले लेती हैं। कैंसर इस प्रक्रिया को रोकता है या फिर इसमें बाधा डालता है और असामान्य कोशिकाओं का निर्माण करता है। यह डीएनए में बदलाव के कारण होता है। डीएनए प्रत्येक कोशिकाओं के न्यूक्लियस में मौजूद होता है। डीएनए में कोशिकाओं के निर्माण, बढ़ने और विभाजित होने के निर्देश होते हैं। डीएनए में बदलाव होते रहते हैं लेकिन आमतौर पर कोशिकाएं उन्हें ठीक कर देती हैं। जब कोई बदलाव या गलती ठीक नहीं हो पाती है तो यह कैंसरका रूप ले सकता है। इन बदलावों से ऐसी कोशिकाएं बनती हैं जिन्हें खत्म होने के बजाय जीवित रहना चाहिए और ऐसी कोशिकाएं बनती हैं जिनकी शरीर को जरूरत नहीं हैं। ये अतिरिक्त कोशिकाएं अनियंत्रित तरीके से बढ़ती हैं और ट्यूमर का आकार ले लेती हैं। ट्यूमर से भिन्न स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं यह इस बात पर निर्भर करता है कि ट्यूमर शरीर के किस भाग में हैं। लेकिन सभी ट्यूमर कैंसरकारी नहीं होते हैं और आसपास के ऊतकों तक नहीं फैलते हैं। कभी-कभी ये ट्यूमर बड़े हो सकते हैं और आसपास के अंगों में फ़ैल सकते हैं जिनसे समस्याएं हो सकती हैं। बड़े ट्यूमर कैंसरकारी होते हैं और शरीर के भिन्न भागों में फ़ैल सकते हैं। कुछ कैंसर रक्त के द्वारा या लसिका ग्रंथियों के वारा शरीर के भिन्न भागों तक फ़ैल सकते हैं इसे प्रक्रिया मेटास्टेटिस कहा जाता है। कैंसर जो कि मेटास्टेटस की प्रक्रिया करते हैं उन्हें अंतिम अवस्था का कैंसर माना जाता है। मेटास्टेटिक कैंसर का इलाज करना बहुत मुश्किल हो सकता है और ये अत्यधिक मृत्यु का कारण बनते हैं या बन सकते हैं। कैंसर के प्रकार कैंसर का नाम उस भाग के अनुसार रखा जाता है जहां वे विकसित होते हैं या फिर जिस तरह की कोशिकाओं से बने होते हैं चाहे फिर वे शरीर के भिन्न भागों में ही क्यों न फैले हों। उदाहरण के तौर पर वः कैंसर जो फेफड़ों में बना है यफी वह लिवर तक फ़ैल गया है तब भी उसे फेफड़ों का कैंसर ही कहा जाएगा। विशेष प्रकार के कैंसर के लिए भिन्न नामों का प्रयोग भी किया जाता है, जैसे – कार्सिनोमा – कैंसर का वह प्रकार है जो कि त्वचा और ऊतकों में बनता है जो अन्य अंगों से जुड़े होते हैं सार्कोमा – कैंसर का वह प्रकार है जो कनेक्टिव टिशू में होता है जैसे हड्डियों, मांसपेशियों, कार्टिलेज और रक्त वाहिकाएं ल्यूकेमिया – बोन मेरो का कैंसर। बोन मेरो हड्डियों में पाया जाने वाला एक नरम ऊतक है जो कि रक्त की कोशिकाओं का निर्माण करता है लिंफोमा और मायलोमा प्रतिरक्षा प्रणाली का एक कैंसर है कैंसर का खतरा कैंसर का मुख्य कारण कोशिकाओं के डीएनए में बदलाव है। अनुवांशिक बदलाव माता-पिता से शिशुओं में आ सकते हैं। ये बदलाव जन्म के समय वातावरण के बदलावों के कारण भी हो सकते हैं। जैसे – कैंसरकारी केमिकल से संपर्क जिन्हें कार्सिनोजेन कहा जाता है रेडिएशन से संपर्क सूर्य की रौशनी से अत्यधिक संपर्क कुछ विशेष वायरस जैसे ह्यूमन पेपीलोमा वायरस धूम्रपान जीवनशैली जैसे शारीरिक गतिविधियां और खानपान कैंसर का खतरा उम्र के साथ बढ़ता जाता है। पहले से मौजूद स्वास्थ्य स्थितियां जिनसे सूजन होती है उनसे भी कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। जैसे अल्सरेटिव कोलाइटिस एक क्रोनिक इंफ्लेमेटरी पेट का रोग है। यदि आपको ऐसे कारणों के बारे में पता हो जिनके कारण व्यक्ति को कैंसर हो सकता है तो आपको कैंसर होने का खतरा कम हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार निम्न सात तरीकों से आप कैंसर से स्वयं को बचा सकते हैं – तम्बाकू का प्रयोग न करें और किसी और का प्रयोग किया हुआ धूम्रपान न करें स्वस्थ आहार खाएं या संतुलित आहार खाएं मांसाहार कम खाएं मेडिटेरियन डाइट अपनाएं जिसके अंतर्गत अत्यधिक पौधों पर आधारित भोजन करें, प्रोटीन और स्वस्थ वसा को भोजन में शामिल करें शराब न पिएं या फिर कभी-कभी ही शराब का सेवन करें। जैसे किसी भी उम्र की महिलाएं यदि एक दिन में ड्रिंक लेटो हैं और 65 से कम उम्र के पुरुष एक दिन की दो ड्रिंक लेते हैं तो उन्हें कैंसर का खतरा शराब से नहीं हो सकता है। प्रतिदिन तीस मिनट व्यायाम जरूर करें सूर्या की रौशनी से बच कर रहें कैंसर शरीर के किसी भी भाग में शुरू हो सकता है। शरीर में कैंसर बनना तब शुरू होता है जब सामान्य कोशिकाएं नियंत्रण से अधिक बढ़ने लग जाती हैं और कोशिकाओं का इकट्ठा होना शुरू हो जाता है।  कैंसर होने से घबराए मत , हम आपको बताएंगे की कैसे इससे बच सकते है, और इससे कैसे लड़ सकते है। आधुनिकता की इस दौड़ में मानव के जीवन की पराकाष्ठा देखे तो हर एक व्यक्ति कहीं ना कहीं किसी ना किसी बीमारी से जूझ रहा है या किसी रोग से ग्रस्त हैं।  आधुनिक जीवन में बदलती जीवनशैली के कारण मानव शरीर बीमारियों का घर बनता जा रहा है।  ऐसे ही हमारे शरीर में कई कोशिकाएं होती है, जिसको हम सेल्स कहते है, वो सेल्स बढ़ते

बवासीर क्या है, लक्षण, कारण, उपाय और घरेलु उपचार

बवासीर गुदास्थी भाग या एनल भाग में सूजे हुए ऊतकों का एक समूह होती है। बवासीर आकार के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। ये बाहरी और आंतरिक दो तरह की हो सकती हैं। आंतरिक बवासीर गुदा के बाहरी भाग से दो से चार सेंटीमीटर अंदर ऊपर की तरफ होती है। आंतरिक बवासीर इस रोग का सबसे सामान्य प्रकार है। बाहरी बवासीर एनस या गुदा के बाहरी भाग पर होती है। बवासीर को अर्श रोग भी कहा जाता है जिसका अंग्रेजी नाम हेमोरॉहाइड्स (Hemorrhoids) है। बवासीर गुदास्थि में एकत्रित सूजे हुए ऊतक होते हैं। इनमें रक्त वाहिकाएं, आसपास के ऊतक, मांसपेशियाँ और इलास्टिक फाइबर होती हैं। बहुत से लोगों को बवासीर होती है लेकिन यह जरूरी नहीं कि सभी के लक्षण एक जैसे हों। दुनियाभर में बवासीर से ग्रस्त 50 प्रतिशत लोगों में ही ऐसे लक्षण दिखाई देते हैं जिन्हें पहचाना जा सके। इस लेख में आप बवासीर के लक्षण, कारण, बवासीर का परीक्षण और बवासीर के घरेलू उपायों के बारे में पढ़ेंगे। साथ ही इस लेख में आप यह पढ़ेंगे कि बवासीर व्यक्ति के शरीर को किस तरह से प्रभावित करती है। बवासीर के क्या लक्षण होते हैं? – Bawaseer ke lakshan in hindi बहुत से मामलों में बवासीर गंभीर नहीं होती है। यह आमतौर पर कुछ दिनों में खुद ही ठीक हो जाती है । साथ ही यह भी जरूरी नहीं है कि बवासीर से ग्रस्त प्रत्येक व्यक्ति को दर्द हो बवासीर से पीड़ित किसी भी व्यक्ति को निम्न तरह के लक्षण दिखाई देते हैं –  गुदस्थी के आस पास एक मोटी और दर्दनाक गांठ महसूस हो सकती है । इस गांठ में खून जमा हुआ हो सकता है। जिस बवासीर में रक्त होता है उसे थ्रोमबोस्ड एक्सटर्नल हेमोरोइज्ड कहते हैं। बवासीर से पीड़ित व्यक्ति को मल त्यागने के बाद पेट भरा हुआ लग सकता है । मल त्यागने के बाद रक्त निकलना गूदे के आसपास का स्थान लाल होना, खुजली होना और सूजन आना  मल त्यागने में तकलीफ़ होना  कब्ज मल त्याग के समय दर्द व बेचैनी होना उपरोक्त लक्षण प्रत्येक व्यक्ति में अलग हो सकते हैं। यह लक्षण अन्य स्थिति के कारण भी दिखाई दे सकते हैं, जैसे इन्फ्लेमेटरी बॉवेल डिजीज, एनाल कैंसर, बॉवेल कैंसर और एनल फिशर । यदि आपको इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई देते हैं तो डॉक्टर से संपर्क करें। बवासीर गंभीर स्थिति का भी रूप ले सकता है। गंभीर मामलों में बवासीर के निम्न लक्षण दिखाई देते हैं –  मल त्यागने वाले स्थान जिसे गुदा कहते हैं वहां से अत्यधिक रक्त आना। इस स्थिति से व्यक्ति के शरीर में खून की कमी हो सकती है जिसे एनीमिया कहा जाता है।  संक्रमण  मल को रोक न पाना या फीकल इंकॉन्टीनेंस एनल फिस्ट्यूला, इसमें गुदा के अंदर व बाहर की त्वचा के सतह से एक नया चैनल बन जाता है स्ट्रेंग्युलेटेड बवासीर अंतर्गत बवासीर तक रक्त प्रवाह रुक जाता है जिससे संक्रमण व रक्त का थक्का जमने जैसी स्थितियां पैदा हो जाती हैं बवासीर को चार श्रेणियों में विभाजित किया जाता है  ग्रेड १ : गुदा की आंतरिक परत में छोटी-छोटी सूजन आना । हालांकि यह दिखाई नहीं देते हैं। ग्रेड २ : ये बवासीर ग्रेड १ से बड़ी होती है, लेकिन गुदा के अंदर ही रहती है। हो हो सकता है कि जब आप मल त्यागे तो यह गूदा से बाहर आए लेकिन यह वापस अंदर चले जाते हैं।  ग्रेड ३: इन्हें प्रोलैप्स हैमरॉइड कहा जाता है और यह गुदा के बाहर होते हैं । व्यक्ति को ये रेक्टम से बाहर लटकते महसूस हो सकते हैं लेकिन इन्हें वापस अंदर डाला जा सकता है। ग्रेड ४: यह भी रेक्टम के बाहर लटकते हैं लेकिन इन्हें अंदर नहीं डाला जा सकता और इनके लिए ट्रीटमेंट की आवश्यकता होती है। ये बहुत बड़े होते हैं और गुदा के बाहर ही रहते हैं।  एक्सटर्नल पाइल्स गुदे के बाहरी किनारों पर छोटी गांठे बना देती है। इनमें बहुत अधिक खुजली होती है, साथ ही यदि इन गांठों में खून का थक्का जम जाता है तो यह दर्दनाक हो सकती हैं क्योंकि ब्लड क्लॉट्स से रक्त का प्रवाह अवरुद्ध होता है । थ्रोंबोज्ड एक्सटर्नल पाइल्स या जम चुकी बवासीर का इलाज तुरंत किया जाना चाहिए। बवासीर होने का क्या कारण है? – Bawaseer kyu hoti hai in hindi बवासीर रेक्टम के निचले भाग में दबाव पड़ने के कारण होती है। गुदा के आसपास और मलाशय में रक्त वाहिकाएं दबाव में खिंचाव कर सकती हैं और उनमें सूजन आ सकती है जो कि बवासीर का कारण बन सकती हैं। ऐसा निम्न के कारण हो सकता है –  लंबे समय से कब्ज  लंबे समय से दस्त बाहरी सामान उठाना  गर्भावस्था  शौच जाते समय खींचाव लंबे समय से खांसी यदि आपके परिवार में किसी करीबी को बवासीर है तो यह आपके बवासीर का कारण बन सकती है। बवासीर होने का खतरा बढ़ती उम्र के साथ बढ़ता है। बवासीर का परीक्षण कैसे किया जाता है? – Bawaseer ki janch kaise hoti hai डॉक्टर आमतौर पर बवासीर का परीक्षण शारीरिक एग्जामिनेशन के बाद ही करते हैं। जिस व्यक्ति में बवासवीर होने का संदेह होता है उनमें डॉक्टर गुदास्थी की भी जांच कर सकते हैं। डॉक्टर आपसे निम्न प्रश्न पूछ सकते हैं – क्या आपके किसी करीबी रिश्तेदार को बवासीर है? क्या मल में रक्त या बलगम आ रहा है? क्या हाल ही में आपका वजन कम हुआ है? क्या आपके शौच जाने की क्रिया में कोई बदलाव आये हैं? मल का रंग कैसा था? आंतरिक बवासीर के लिए डॉक्टर डिजिटल रेक्टल एग्जामिनेशन कर सकते हैं जो कि प्रोक्टोस्कोप की मदद से किया जाता है। प्रोक्टोस्कोप एक खोखली ट्यूब होती है जिसमें लाइट लगी होती है। इसकी मदद से डॉक्टर एनल कैनाल को ठीक तरह से देख पाते हैं। वे मलाशय के अंदर से छोटा सा ऊतक का सैंपल ले सकते हैं। इसके बाद सैंपल को लैब में टेस्टिंग के लिए भेज दिया जाता है।  यदि बवासीर से ग्रस्त व्यक्ति के शरीर में पाचन तंत्र से जुड़ी कोई भी अन्य बीमारी के संकेत व लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो डॉक्टर कभी-कभी कोलोनोस्कोपी की भी सलाह दे सकते हैं। कोलोस्कोपी की सलाह तब भी दी जा सकती है अगर व्यक्ति के शरीर में

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Depression in Hindi – डिप्रेशन का लक्षण और उपचार

अवसाद यानी डिप्रेशन क्या होता है? – What is Depression in Hindi आज हम आपको डिप्रेशन (Depression) के लक्षण (Symptoms) कारण (Causes) और इलाज (Treatment) के बारे में बताएंग। डिप्रेशन को हिंदी में अवसाद कहा जाता है जो कि एक मानसिक विकार है। इसमें व्यक्ति को अत्यधिक दुःख, क्षति का एहसास होता है। कई बार व्यक्ति को अत्यधिक गुस्सा भी आ सकता है जिससे व्यक्ति का सामान्य जीवन प्रभावित होता है। यह बहुत ही सामान्य स्थिति है। एक शोध के अनुसार यह पता चला है कि अमेरिका में बीस वर्ष के युवाओं में 8.1 युवा डिप्रेशन का शिकार होते हैं।  डिप्रेशन व्यक्ति को अलग-अलग तरह से महसूस होता है। यह आपके रोजाना के कार्यों को भी प्रभावित करता है . इसके कारण व्यक्ति के समय की अधिक बर्बादी होती है और काम भी कम हो पाता है। इससे व्यक्ति के निजी रिश्ते भी प्रभावित होते हैं साथ ही डिप्रेशन का बहुत अधिक प्रभाव स्वास्थ्य स्थितियों पर भी पड़ता है।  ऐसी स्थितियां जो कि डिप्रेशन के कारण और अधिक खराब हो सकती हैं उनमें निम्न शामिल हैं  आर्थराइटिस  अस्थमा  कार्डियोवैस्कुलर रोग  कैंसर  डायबिटीज  मोटापा  यह समझना और महसूस करना बेहद जरूरी है कि जीवन में दुःख महसूस करना जीवन का एक अंग है। दुखद घटना सभी के जीवन में होती है। लेकिन अगर आप लगातार ना उम्मीद महसूस कर रहे हैं तो हो सकता है कि आप डिप्रेशन के शिकार हैं।  डिप्रेशन को एक गंभीर मानसिक स्थिति माना जाता है जो कि सही इलाज न मिलने के कारण और अधिक खराब हो सकती है। जो लोग डिप्रेशन का ट्रीटमेंट लेते हैं उनके लक्षणों में कुछ हफ्तों में ही सुधार दिखाई देने लगता है।  डिप्रेशन दुनियाभर में बहुत ही सामान्य स्थिति है, इससे लगभग 264 मिलियन लोग प्रभावित हैं। डिप्रेशन सामान्य मूड स्विंग या मन में थोड़े समय के लिए रहने वाली भावनाओं से बहुत अलग होता है। यदि डिप्रेशन लंबे समय से और अलग-अलग गंभीरता के साथ व्यक्ति को प्रभावित करता है तो यह  स्वास्थ्य स्थिति बन सकता है। डिप्रेशन का शिकार व्यक्ति घर पर ऑफिस में या स्कूल में ठीक तरह से कार्य नहीं कर पाता है। डिप्रेशन की अधिकता में व्यक्ति आत्महत्या तक कर लेता है। विश्व भर में एक साल में आठ लाख लोग आत्महत्या से मरते हैं जिसका सबसे कारण आत्महत्या है। 15-29 वर्ष के युवाओं में आत्महत्या मृत्यु का दूसरा बड़ा कारण है। हालांकि मानसिक विकारों के लिए कई प्रभावकारी ट्रीटमेंट हैं लगभग 76 प्रतिशत गरीब देशों के लोगों तक डिप्रेशन की दवाएँ पहुंच नहीं पाती हैं। अच्छी तरह से केयर करने के लिए जरूरी स्रोत, संसाधन, स्वास्थ्य कर्मियों की कमी और बाहरी तनाव के कारण मानसिक रोगों का इलाज नहीं हो पाता है। दुनियाभर के देशों में डिप्रेशन से ग्रस्त लोगों का इलाज ठीक तरह से नहीं हो पाता है और साथ ही वे लोग जिन्हें डिप्रेशन नहीं भी होता है उन्हें एंटी डिप्रेस्सेंट दी जाती हैं।  डिप्रेशन व अन्य मानसिक स्थितियों का भार आज विश्व भर में बढ़ता जा रहा है। जीवन की बड़ी घटनाएँ जैसे किसी प्रेमी का छोड़ कर चले जाना, किसी प्रिय का बिछड़ना, नौकरी छूटना आदि के कारण व्यक्ति को डिप्रेशन हो सकता है। हालांकि, डॉक्टर ऐसा मानते हैं कि यदि दुःख लंबे समय तक बना रहता है तो यह डिप्रेशन का रूप ले सकता है। डिप्रेशन एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है न कि गुजरने वाली। यह भिन्न एपिसोड या भिन्न भागों में व्यक्ति को प्रभावित करती है जिसके लक्षण दो हफ्तों तक दिखाई दे सकते हैं। डिप्रेशन कुछ हफ़्तों, महीनों या सालों तक भी चल सकता है। इसमें व्यक्ति को अकेलापन महसूस होता है। व्यक्ति सबके साथ रह कर भी अलग-थलग महसूस करता है। आइये डिप्रेशन के लक्षण, कारण व इलाज के बारे में विस्तृत रूप से जानें।  डिप्रेशन का लक्षण – Depression Symptoms in Hindi हर व्यक्ति को जीवन में कभी न कभी दुःख महसूस होता है लेकिन कभी-कभी यह कुछ दिनों तक रहता है और फिर ठीक हो जाता है। डिप्रेशन इन सभी से अलग होता है। यह आपके पूरी जीवनशैली को प्रभावित करता है और जीवन को और मुश्किल बना देता है। आपको ठीक होने के लिए इलाज की और काउंसलिंग की जरूरत पड़ती है।  डिप्रेशन के कई सारे संकेत और लक्षण दिखाई देते हैं लेकिन यह जरूरी नहीं है कि वे सभी लक्षण आपको भी दिखाई दे। प्रत्येक व्यक्ति में डिप्रेशन के लक्षण अलग हो सकते हैं और अलग तरह की गंभीरता से व्यक्ति को प्रभावित कर सकते हैं।  डिप्रेशन में क्या होता है – Depression mein kya hota hai दुखी, खाली और बेचैन। ये भावनाएं व्यक्ति के मन में बनी रहती हैं और जीवन में ख़ालीपन का एहसास होता है। बहुत से लोगों के साथ रहकर भी अकेलापन महसूस करना।  किसी बात का अत्यधिक बुरा लगना, लाचार, बेसहारा और बेबस महसूस करना। व्यक्ति को अपने जीवन के बारे में बुरा महसूस हो सकता है। हो सकता है कि व्यक्ति अपने जीवन के बारे में बहुत अधिक सोचता हो।  बेबस महसूस करना। हो सकता है कि व्यक्ति बहुत निराश महसूस करे और उसे हर समय यही लगता रहे कि उसके जीवन में कुछ अच्छा नहीं होने वाला है। व्यक्ति को इस समय आत्महत्या के ख्याल भी आते रहते हैं।  चिड़चिड़ापन। व्यक्ति अत्यधिक चिड़चिड़ा हो सकता है या फिर सामान्य से अधिक गुस्सा कर सकता है।  किसी भी काम में मन न लगना। किसी भी खेल या हॉबी को न कर पाना। हो सकता है कि व्यक्ति के खाने-पीने, खेलने और सेक्स तक की इच्छा खत्म हो जाए।  ऊर्जा की कमी। व्यक्ति में कुछ भी नया करने की इच्छा और ऊर्जा न होना भी डिप्रेशन का एक संकेत हो सकता है। रोजाना के कार्य और अन्य काम को करना बहुत बोझिल लगे। साथ ही व्यक्ति बहुत थका हुआ भी महसूस कर सकता है।  ध्यान लगाने में परेशानी। हो सकता है कि व्यक्ति को अपना ध्यान केंद्रित करने में समस्या हो। सामान्य कार्य जैसे अखबार पढ़ना, टीवी देखना आदि में भी मन न लगना। व्यक्ति को कोई भी निर्णय लेने में भी परेशानी हो सकती है। साथ ही हो सकता है कि व्यक्ति को कुछ भी याद न रहे।  स्लीपिंग पैटर्न में गड़बड़ी। हो सकता

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महिलाओं में थायराइड का लक्षण, कारण, इलाज, साइड इफेक्ट और आहार – Thyroid in Women in Hindi

बदलती जीवनशैली में कई बीमारियों ने भी हमारी जिंदगी में अपनी जगह बना ली है। आजकल कई बीमारियां ऐसी हैं जो खासतौर पर पुरुषों या महिलाओं को अपना शिकार बनाती हैं जिनमें से एक थायराइड भी है। आंकड़ों की मानें तो थायराइड की बीमा‍री महिलाओं में ज्‍यादा देखी जाती है।  आइए जानते हैं कि महिलाओं में थायराइड क्‍यों होता है। इस लेख में हम महिलाओं में थायराइड के एक प्रकार हाइपोथायराइड के बारे में जानेंगें। थाइरोइड के प्रकार – thyroid ke prakaar  थायरॉइड दो प्रकार का होता है हाइपरथायराइडिज्म और हाइपोथायराइडिज्म। हाइपोथायरॉइड और हाइपरथायरॉइड दोनो ही समस्या अलग-अलग प्रकार की होती हैं, दोनो अवस्थाएं अलग होती हैं। दोनों प्रकार के थायरॉइड के लक्षण भी अलग-अलग होते हैं. इसकी वजह से शरीर में होने वाले बदलाव भी अलग होते हैं, जो आपके रहन-सहन का तरीका भी पूरी तरह बदल देते हैं। जैसे कुछ लोग थायरॉइड होने पर मोटे हो जाते हैं, लेकिन कुछ लोग थायरॉइड होने पर पतले हो जाते हैं। हाइपरथायरॉइड के लक्षण – Hyperthyroid ke lakshan सांस लेने में समस्या होना, अचानक धड़कनों का बढ़ जाना संतुलित आहार लेने के बाद भी तेजी से वजन घटना सामान्य मौसम में भी तेज गर्मी लगना और हद से ज्यादा पसीना आना दिन भर कमजोरी और थकान महसूस करना हाथ-पैर के नाखूनों का हद से ज्यादा मुलायम या नर्म हो जाना माहवारी की समस्या बालों का झड़ना त्वचा में खुजली और लाल धब्बे हाइपोथायरॉइड के लक्षण – hypothyroid ke lakshan अचानक वजन बढ़ना शरीर और मांसपेशियों में दर्द अनियमित माहवारी हृदय गति का अचानक कम हो जाना आई-ब्रो या भौहों के बाल झड़ना रूखी और बेजान त्वचा नाखूनों का खराब होना कब्ज या पेट की समस्या हाइपोथायरॉइड और हाइपर थायरॉइड में अंतर – hypothyroid or Hyperthyroid me antar  हाइपर थाइरॉइड में थायरॉइड ग्रंथि से निकलने वाले हॉर्मोन के स्तर में बढ़ोतरी होती है, जबकि हाइपोथायरॉइड में थायरॉइड में हॉर्मोन की मात्रा कम हो जाती है। हाइपरथायरॉइड में ग्रेव्स रोग हो सकता है, जबकि हाइपोथायरॉयड कि वजह से ये बीमारी नहीं होती है। महिलाओं में थायराइड क्यों होता है – mahilaon mein thyroid kyon hota hai in hind  वायरल संक्रमण के चपेट में आने पर महिला को थायराइड की शिकायत हो सकती है। जो महिला हमेशा तनाव यानी स्ट्रेस में रहती है उन्हें थायराइड होने का खतरा अधिक होता है। डिलीवरी के बाद शरीर में बदलाव आने के कारण भी थायराइड की समस्या पैदा हो सकती है। जब एक महिला की शरीर में आयोडीन की कमी होती है तो थायराइड का खतरा होता है। महिलाओं में थायराइड कई कारणों से होता है जिसमें मुख्य रूप से निम्न शामिल हो सकते हैं – वायरल संक्रमण के चपेट में आने पर महिला को थायराइड की शिकायत हो सकती है। जो महिला हमेशा तनाव यानी स्ट्रेस में रहती है उन्हें थायराइड होने का खतरा अधिक होता है। डिलीवरी के बाद शरीर में बदलाव आने के कारण भी थायराइड की समस्या पैदा हो सकती है। जब एक महिला की शरीर में आयोडीन की कमी होती है तो थायराइड का खतरा होता है। हार्मोनल असंतुलन के कारण महिला को कई तरह की परेशानियां होती हैं और थायराइड भी उन्हीं में एक है। महिलाओं में थायराइड के लक्षण – Mahilaon me thyroid ke lakshan थायराइड की बीमारी होने पर थायराइड ग्रंथि में सूजन आ जाती है। गले के बीचो-बीच स्थित थायराइड ग्रंथि थायराइड नामक हार्मोन का उत्‍पादन करती है जो कि भोजन के पाचन में सहायता करती है। भोजन के पचने के बाद शरीर को एनर्जी मिलती है।  वहीं अगर शरीर में थायराइड हार्मोन कम या ज्‍यादा बनने लगे तो खाना पचने में दिक्‍कत आने लगती है। इससे एनर्जी लेवल भी घटने लगता है।  महिलाओं को थायराइड होने पर थकान, अधिक नींद आने, सुस्‍ती महसूस होने की समस्‍या रहती है। ये हार्मोन शरीर को गर्माहट प्रदान करता है जबकि इसकी कमी होने पर बहुत ठंड लगने लगती है। जिन महिलाओं को थायराइड होता है उनके हाथ-पैर अकसर ठंडे रहते हैं।  इस बीमारी में खाने में फैट की अधिक मात्रा न लेने पर भी वजन बढ़ने लगता है। थायराइड हार्मोन कम होने पर एक या दो महीने के अंदर ही दो से ढाई किलो वजन बढ़ जाता है। इस वजन को आसानी से घटाया भी नहीं जा सकता है।  थायराइड के अन्‍य लक्षणों में बालों का झड़ना, त्‍वचा का रूखा होना, मांसपेशियों में दर्द, नाखूनों के कमजोर होना शामिल है। थायराइड की दवा पर 60% प्रतिशत की छूट महिलाओं में थायराइड के कारण – Mahilaon me thyroid kaise hota hai in Hindi शरीर में आयोडीन की मात्रा घटने पर या वायरल संक्रमण की चपेट में आने की स्थिति में थायराइड ग्रंथि में सूजन आ सकती है। इस स्थिति में थायराइड ग्रंथि ठीक तरह से अपना काम नहीं कर पाती है जिससे शरीर के बाकी कार्यों में भी रुकावट आती है।  इसके अलावा स्‍ट्रेस हार्मोन में परिवर्तन के कारण भी शरीर की महत्‍वपूर्ण थायराइड ग्रंथि काम करना बंद कर देती है। कई बार महिलाओं को डिलीवरी के बाद शरीर मे आए बदलावों के कारण थायराइड की समस्‍या हो सकती है। महिलाओं में थायराइड प्रभाव – Mahilaon me thyroid ka prabhav महिलाओं में थायराइड प्रभाव की बात करें तो इसका इसर उनकी प्रेगनेंसी और मासिक धर्म दोनों पर ही पड़ता है। थायराइड होने की वजह से महिलाओं के शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं। उनके पीरियड्स भी अनियमित ही जाते हैं। अगर आपको अन‍िद्रा की समस्‍या, वजन बढ़ना या घटना, स्‍ट्रेस बढ़ना आद‍ि लक्षण हैं तो ये थायराइड की ओर संकेत करते हैं। थायराइड होने के बाद आपको कई बुरे प्रभाव भी झेलने पड़ सकते हैं।   थायराइड में पीरियड मिस होना – Thyroid me period problem in Hindi कभी-कभी ओवरएक्टिव या अंडरएक्टिव थायराइड की वजह से भी पीरियड में देरी हो जाती है। थायराइड बढ़ने पर पीर‍ियड्स के दौरान ज्‍यादा दर्द, च‍िड़च‍िड़ापन, बहुत कम या ज्‍यादा ब्‍लीड‍िंग होना, तनाव, ड‍िप्रेशन, कब्‍ज, चेहरे पर सूजन, चेहरे और पेट पर अनचाहे बाल, ज्‍यादा गर्मी लगने जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं। पीरियड की  समस्याओं के अलावा ओवर एक्टिव थाइराॅयड , वेट लाॅस, ज्यादा भूख लगना, ज्यादा पसीना आना जैसे लक्षणों का भी कारण होता है। गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन करने की वजह से भी अनियमित पीरियड्स या पीरियड्स में देरी होती है। जब शरीर में थायराइड हार्मोन कम बनने लगता है तो इसका असर पीरियड्स पर भी पड़ता है। इसकी वजह से मासिक धर्म अनियमित हो सकते

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