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जिम के लिए 10 सबसे बेस्ट सप्लीमेंट्स

टॉप 10 जिम सप्लीमेंट जिम प्रोटीन पाउडर मल्टी विटामिन ओमेगा 3 बीसीएए गेनर एल-कार्टनाइट सीएलए प्री-वर्कआउट एल-आर्जिनाइन ग्लुटामाइन जिम प्रोटीन पाउडर प्रोटीन पाउडर क्या होता होता है प्रोटीन एक तरह का मैक्रोन्यूट्रिएंट होता है जो हमारे शरीर की वृद्धि, साथ ही शरीर की कमि को पूरा करता है और उसे स्वस्थ और मजबूत बनाए रखने के लिए जरूरी होता है। प्रोटीन पाउडर, प्रोटीन का कसेरट्रटेड पाउडर होता है जो कि डेयरी उत्पादों, अंडे, चावल और, सोयाबीन, आलू, हर्बल, मटर, दूध आदि का चूरन बनाकर बनता है। इन सभी का एक कॉम्बिनेशन तैयार करने के बाद इसमें शुगर, विटामिन्स और खनिज तत्व मिलाए जाते हैं। प्रोटीन पाउडर का उपयोग किसलिए किया जाता है? वर्कआउट के बाद आपके शरीर को ज्यादा एनर्जी की जरूरत होती है। एक्सरसाइज के बाद शरीर में ईंधन देने के लिए अधिक प्रोटीन की आवश्यकता होती है क्योंकि इस स्थिति में आपको नार्मल प्रोटीन डाइट से अधिक प्रोटीन की जरूरत होती है। यदि आप वर्कआउट करने के दौरान मजबूत मांशपेशियां बनाने की कोशिश कर रहे हैं, तो आपको सामान्य रूप से अधिक प्रोटीन की आवश्यकता होगी। जब आप किसी चोट से उबर रहे हों तो उसे जल्दी ठीक करने में प्रोटीन पाउडर मदद करता है। यदि आप शाकाहारी हैं तो आप मांस, चिकन और मछली सहित कई आम प्रोटीन चीज़ो का सेवन नहीं करते तो ऐसे में प्रोटीन पाउडर आपके शरीर में प्रोटीन की जरूरत को पूरा करता है। मल्टी विटामिन मल्टी विटामिन क्या होता होता है जैसे हमारे शरीर को स्वस्थ और बढ़िया बनाने में खनिज आहार और अन्य पोषक तत्वों का लेना जरूरी है उसी तरह हमारे शरीर में मल्टीविटामिन का लेना भी बहुत ही जरूरी है मल्टीविटामिन कई विटामिन को मिलकर बानी जाती है, जो सामान्य रूप से आपके आहार और अन्य प्राकृतिक चीज़ो में पाएं जाते हैं। मल्टीविटामिन का उपयोग तब किया जाता है, जब आप अपनी डाइट से शरीर के लिए आवश्यक विटामिन नहीं ले पाते हैं। आपके शरीर में विटामिन किसी बीमारी का कारण भी खत्म हो जाती है। इसकी कमी से हमें कोई बीमारी भी लग सकती है इसलिए आपको सभी प्रकार के विटामिन की जरूरत होती है और उनका चयन करना आपका स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद भी होता है और आप भी तंदुरुस्त और स्वस्थ रहना चाहते हैं तो आपको मल्टीविटामिन जरूर लेनी चाहिए। मल्टी विटामिन का उपयोग किसलिए किया जाता है? मल्टीविटामिन का उपयोग तब किया जाता है, जब आप अपनी डाइट से शरीर के लिए आवश्यक विटामिन नहीं ले पाते हैं। किसी बीमारी, गर्भावस्था, कुपोषण, पाचन संबंधी विकार और अन्य स्वास्थ्य स्थितियों के कारण शरीर में विटामिन की कमी होने पर भी मल्टीविटामिन दिए जाते है। मल्टीविटामिन के अनेक फायदे है , जिसे – पोषण संबंधी कमियों को ठीक करता है। स्वस्थ गर्भावस्था का समर्थन करता है। उचित विकास और विकास को बढ़ावा देता है। हड्डियों की मजबूती बनाए रखने में मदद करता है। ब्रेन फंक्शन को बेहतर बनाता है। नेत्र स्वास्थ्य को बढ़ाता है। हृदय स्वास्थ्य में लाभ हो सकता है। ओमेगा 3 ओमेगा 3 क्या होता होता है ओमेगा 3 एक फैटी एसिड, जो कि हेल्दी फैट माना जाता है। इसके दो प्रकार EPA और DHA कुछ प्रकार की मछलियों में पाया जाता है, जबकि इसका तीसरा प्रकार ALA नट्स और बीजों में पाया जाता है। ओमेगा 3 स्वस्थ शरीर के लिए काफी जरूरी है, जो कि कई स्वास्थ्य लाभ प्रदान करता है। ये शाकाहारी और मांसाहारी दोनों ही तरह के खाद्य पदार्थों में ओमेगा 3 फैटी एसिड पाया जाता है। यह अखरोट जैसे सूखे मेवों, अलसी, सूरजमुखी, सरसों के बीज, सोयाबीन, स्प्राउट्स, गोभी, ब्रोकली, शलजम, हरी पत्तेदार सब्जियों और स्ट्रॉबेरी जैसे कई फलों में भी उच्च मात्रा में पाया जाता है। हालांकि, इसका सबसे पहली शाखा मछलियां ही होती है। ओमेगा 3 दिल की बीमारियों से दूर रखने में भी काफी फायदेमंद गया है। इसलिए सभी को हफ्ते में दो बार मछली का सेवन करना चाहिए, ताकि ज्यादा मात्रा में ओमेगा 3 प्राप्त हो सके। विशेष रूप से सामन, मैकेरल, हेरिंग, सार्डिन, लेक ट्राउट, और टूना मछलियों में ओमेगा 3 भारी मात्रा में मिलता है। लेकिन जिन लोगों को मछलियों का स्वाद पसंद नहीं है, वो फिश ऑयल सप्लीमेंट का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। ओमेगा 3 का उपयोग किसलिए किया जाता है? इससे शिशु के शरीर और मस्तिष्क का विकास ठीक से होता है। 3 ह्रदय संबंधी रोगों को दूर करने के लिए ओमेगा 3 बहुत जरूरी है। ओमेगा 3  मेटाबोलिक सिंड्रोम को ठीक करने में मदद करता है। 4 ओमेगा 3  वजन घटाने और मोटापा दूर करने में भी मदद करता है।  इससे ऑस्टियोपोरोसिस का जोखिम कम होता है। यह गठिया से भी मदद करता है। ओमेगा -3 की खुराक लेने वाले मरीजों के अनुसार यह जोड़ों के दर्द में कमी लाता है और मांसपेशियों में मजबूती देता है। बीसीएए बीसीएए क्या होता होता है बीसीएए का पूरा नाम है ब्रांच्ड चेन अमीनो एसिड है। इसमें तीन तरह के अमीनो एसिड शामिल होते हैं ल्यूसीन, वेलिन और आइसोल्यूसीन। ये तीनों एनॉबोलिक होते हैं। इन तीनों में ल्यूसीन मसल्स बनाने में सबसे ज्यादा काम करता है। जब हम एक्सरसाइज करते है तो हमारी बॉडी अपनी एनर्जी खो देती है और काम करते रहने के लिए वह हमारी माशपेशियों को एनर्जी के लिए इस्तेमाल करने लगती है।बीसीएए आपकी मसल्स ब्रेक नहीं होने देता साथ ही आपके शरीर को एनर्जी देता है जिसे आप अच्छे से वर्कआउट कर पाए। बीसीएए का उपयोग किसलिए किया जाता है? यह एसेंशियल अमीनो एसिड है, जिसे बॉडी खुद रिकवर नहीं करती है। ये फूड या सप्लीमेंट के द्वारा ही हमें लेना होता है। बीसीएए बॉडी में अमीन एसिड्स की कमी को पूरा करता है, जिससे मसल्स ब्रेक डाउन होने से बच जाते हैं और जल्दी रिकवरी होती है।अब सवाल ये , है कि बीसीएए आता कहां से है। सच्चाई ये है कि प्रोटीन वाले हर खाने में यह होता है।अंडे, मीट, दालें, दूध और प्रोटीन के सभी स्रोतों में यह पाया जाता है। नॉन वेज मे इसकी मौजूदगी वेज के मुकाबले और ज्यादा होती है क्योंकि वैसे भी नॉन वेज में सभी आठ तरह के एमिनो एसिड पाए जाते हैं। गेनर गेनर क्या होता होता है गेनर वेट गेन के लिए लिया जाता है जो मसल्स मास बढ़ाने में

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मानसिक स्वास्थ्य क्या है? मानसिक विकार क्या है, लक्षण, कारण, प्रकार और उपाय

पूरी तरह से स्वस्थ होने का अर्थ शारीरिक रूप से ही सही होना नहीं होता है बल्कि भावनात्मक व शारीरिक रूप से स्वस्थ होना भी शरीर के लिए उतना ही जरूरी है। जिस प्रकार किसी भी अंग के ठीक तरह से कार्य न करने से पूरा शरीर प्रभावित होता है वैसे ही व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य के ठीक न होने के कारण भी पूरा शरीर प्रभावित होता है। मानसिक स्वास्थ्य में व्यक्ति का भावनात्मक, सामाजिक और मनोवैज्ञानिक रूप से स्वस्थ होना शामिल होता है। व्यक्ति किस तरह से सोचता है, महसूस करता है और कार्य करता है यह उसके मानसिक स्वास्थ्य को दर्शाता है। इससे यह भी पता चलता है कि व्यक्ति तनाव को किस तरह से नियंत्रित करता है, अन्य लोगों के साथ किस तरह से व्यवहार करता है और किस तरह से अपने निर्णयों को लेता है। मानसिक स्वास्थ्य जीवन की हर अवस्था में एक महत्वपूर्ण पहलू है चाहे वह बचपन हो या फिर वयस्कता।  पूरे जीवन में यदि आपने कभी भी मानसिक स्वास्थ संबंधी समस्याओं का सामना किया है तो आपने पाया होगा कि उससे आपका व्यवहार, सोच और निर्णय किस तरह से प्रभावित होते हैं। मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं के कई कारण हो सकते हैं जैसे – बायोलॉजिकल कारण, जैसे जीन या मस्तिष्क की बनावट जीवन के अनुभव जैसे ट्रॉमा या शारीरिक हिंसा  परिवार के लोगों में मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएं होना  मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएं बहुत ही सामान्य है और इन्हे मानने व अपनाने में कोई समस्या नहीं होनी चाहिए क्योंकि इसके लिए मदद भी मौजूद है। कई लोग मानसिक रोगों का शिकार होते हैं परन्तु सही समय पर सही सलाह व इलाज से बेहतर भी हो जाते हैं। – मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए शंकपुष्पी एक बेहद असरदार विकल्प है मानसिक स्वास्थ्य क्या है ? Mansik swasthya kya hai विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार मानसिक स्वास्थ्य एक ऐसी स्थिति है जिसमें एक व्यक्ति अपनी क्षमताओं का एहसास करता है, जीवन के सामान्य तनावों का सामना कर सकता है, उत्पादक रूप से काम कर सकता है और अपने या अपने समुदाय के लिए योगदान देने में सक्षम है।  डब्यूएचओ इस बात पर दबाव डालता है कि मानसिक रोगों और विषमताओं से मुक्त होने का मतलब ही मानसिक रूप से स्वस्थ  होना नहीं होता है। इसका अर्थ है कि हर दिन अपने मस्तिष्क को और स्वयं को खुश रख पाना।  वे यह भी कहते हैं कि मानसिक स्वास्थ्य को ठीक करना व ठीक रखना व्यक्ति के ऊपर ही निर्भर करता है। हालांकि यह उसके आसपास के समाज पर भी उतना ही निर्भर करता है।  अमेरिका में प्रत्येक पांच में से एक व्यस्क किसी न किसी मानसिक रोग का शिकार है।  विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि भारत की 7.5 प्रतिशत जनसंख्या किसी न किसी मानसिक विकार से ग्रस्त है जो कि इस वर्ष के अंत तक बढ़ कर बीस प्रतिशत हो सकती है। ये आंकड़े बेशक डरा देने वाले हैं क्योंकि मानसिक स्वास्थ्य को महत्वपूर्ण नहीं समझा जाता है।  आंकड़ों की माने तो 56 मिलियन लोग डिप्रेशन और अन्य 38 मिलियन लोग चिंता जैसे विकारों से ग्रस्त हैं। मानसिक रोगों के लक्षण या शुरुआती संकेत – Mansik rogon ke lakshan ऐसा कोई भी शारीरिक टेस्ट या स्कैन नहीं है जो कि यह बता सके कि कोई व्यक्ति किसी मानसिक रोग से ग्रस्त हैं। हालांकि ऐसे कुछ संकेत होते हैं जो कि किसी भी व्यक्ति में मानसिक स्वास्थ्य के विकार के लक्षण हो सकते हैं – दोस्तों,  परिवार और सह कर्मियों से दूरी  ऐसे कार्य न करना जो उन्हें पहले करना पसंद थे कम सोना या बहुत अधिक सोना कम खाना या बहुत अधिक खाना आशाहीन महसूस करना ऊर्जा की कमी मूड ठीक करने के लिए एल्कोहॉल, निकोटीन और धूम्रपान करना उलझन में रहना  कोई काम न करना पुरानी बातों को याद करना, उदास रहना किसी अन्य व्यक्ति को या स्वयं को हानि पहुंचाने के बारे में सोचना आवाज़ें सुनाई देना भ्रम होना मानसिक तनाव या अवसाद के कारण होने वाले लक्षणों को कम करने के लिए आप चाहें तो हिमालय की Himalaya Wellness Pure Herbs Brahmi Mind Wellness का सेवन कर सकते हैं। मानसिक विकार किन लोगों को हो सकते हैं? – Mansik vikar kise hote hain प्रत्येक व्यक्ति को मानसिक रोग होने का खतरा होता है चाहे वह किसी भी उम्र, जाती या लिंग का हो।  अमेरिका जैसे कई विकसित देशों में मानसिक विकार सबसे बड़ा विकार बनता जा रहा है। अधिकतर मानसिक विकार से ग्रस्त लोगों को एक साथ कई समस्याएं होती हैं। व्यक्ति का सामाजिक, बायोलॉजिकल और जीवनशैली का तरीका उसके मानसिक स्वास्थ्य पर बहुत अधिक प्रभाव डालता है।  यह ध्यान रखना जरूरी है कि अच्छा मानसिक स्वास्थ्य कई सारे घटकों के मेल का संतुलन होता है और जीवन के जरूरी तत्व और आसपास का समाज इन रोगों को ठीक करने व पैदा करने दोनों में ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मानसिक विकार क्यों होते हैं? – Mansik rog ke karan मानसिक विकार निम्न कारणों से हो सकते हैं – लगातार सामाजिक व आर्थिक दबाव  सीमित वित्तीय साधन होने या हाशिए पर या शोषित जातीय समूह से संबंधित होने से मानसिक स्वास्थ्य विकार का खतरा बढ़ सकता है। 2015 के एक अध्ययन के अनुसार ईरान में 903 परिवारों में लोग मानसिक रूप से बीमार थे। जिसका कारण गरीबी और जीवन जीने के लिए आवश्यक वस्तुओं की कमी थी। शोधकर्ताओं ने परिवर्तनीय कारणों के संदर्भ में कुछ समूहों के लिए मानसिक स्वास्थ्य उपचार की उपलब्धता और गुणवत्ता में अंतर को समझाया, जो समय के साथ बदल सकते हैं, और गैर-परिवर्तनीय कारण, जो स्थायी हैं जिन्हे बदला नहीं जा सकता है। मानसिक स्वास्थ्य विकार के परिवर्तनीय कारणों में निम्न शामिल हैं – सामाजिक-आर्थिक स्थिति जैसे किसी विशेष जगह में काम करना  व्यवसाय  शिक्षा  किसी व्यक्ति का समाज में योगदान  घर का वातावरण  गैर परिवर्तनिय कारणों में निम्न शामिल हैं – लिंग  उम्र  जातीयता शोध से पता चलता है कि लिंग परिवर्तनीय व गैर परिवर्तनीय दोनों कारणों में शामिल है। शोधकर्ताओं का कहना है कि महिलाओं में मानसिक रोग का खतरा 3.96 प्रतिशत कम है। इस शोध में आर्थिक रूप से कमजोर लोग सबसे ऊपर के स्थान पर हैं। मानसिक स्वास्थ्य के

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कैंसर के लक्षण, कारण, उपाय और कैंसर से बचाव

कैंसर क्या है? कैंसर कई सारे रोगों का एक समूह है जो किसी भी अंग या ऊतक को प्रभावित कर सकता है। कैंसर वह रोग है जो कि शरीर में असामान्य कोशिकाओं के बढ़ने के कारण फैलता है। ये कोशिकाएं एक अंग से अन्य अंगों तक फ़ैल कर रोग को पूरे शरीर में फैला सकती हैं। इस स्थिति को मेटास्टेटसाइजिंग कहा जाता है और यह कैंसर से मृत्यु का सबसे प्रमुख कारण है। कैंसर को नियोप्लास्म या ट्यूमर कहा जाता है। दुनियाभर में होने वाल मृत्यु का कैंसर दूसरा सबसे कारण है। 2018 की एक रिपोर्ट के अनुसार लगभग 9.6 मिलियन लोग या हर छह में से एक व्यक्ति कैंसर का शिकार होता है। फेफड़ों का कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर, पेट का कैंसर और लिवर कैंसर पुरुषों में होने वाले सबसे सामान्य कैंसर है। वहीँ स्तन कैंसर, कोलोरेक्टल कैंसर, फेफड़ों का कैंसर, सर्वाइकल कैंसर और थायराइड कैंसर महिलाओं में होने वाले कैंसर का सबसे मुख्य प्रकार है। एक स्वस्थ शरीर में प्रतिदिन,प्रति मिनट लाखों कोशिकाओएं व ऊतक बनते और टूटते हैं क्योंकि शरीर को प्रत्येक दिन भिन्न कार्य करने होते हैं। स्वस्थ कोशिकाओं का अपना जीवन चक्र, प्रजनन और मृत्यु का एक चक्र होता है। पुरानी कोशिकाओं का स्थान नयी कोशिकाएं ले लेती हैं। कैंसर इस प्रक्रिया को रोकता है या फिर इसमें बाधा डालता है और असामान्य कोशिकाओं का निर्माण करता है। यह डीएनए में बदलाव के कारण होता है। डीएनए प्रत्येक कोशिकाओं के न्यूक्लियस में मौजूद होता है। डीएनए में कोशिकाओं के निर्माण, बढ़ने और विभाजित होने के निर्देश होते हैं। डीएनए में बदलाव होते रहते हैं लेकिन आमतौर पर कोशिकाएं उन्हें ठीक कर देती हैं। जब कोई बदलाव या गलती ठीक नहीं हो पाती है तो यह कैंसरका रूप ले सकता है। इन बदलावों से ऐसी कोशिकाएं बनती हैं जिन्हें खत्म होने के बजाय जीवित रहना चाहिए और ऐसी कोशिकाएं बनती हैं जिनकी शरीर को जरूरत नहीं हैं। ये अतिरिक्त कोशिकाएं अनियंत्रित तरीके से बढ़ती हैं और ट्यूमर का आकार ले लेती हैं। ट्यूमर से भिन्न स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं यह इस बात पर निर्भर करता है कि ट्यूमर शरीर के किस भाग में हैं। लेकिन सभी ट्यूमर कैंसरकारी नहीं होते हैं और आसपास के ऊतकों तक नहीं फैलते हैं। कभी-कभी ये ट्यूमर बड़े हो सकते हैं और आसपास के अंगों में फ़ैल सकते हैं जिनसे समस्याएं हो सकती हैं। बड़े ट्यूमर कैंसरकारी होते हैं और शरीर के भिन्न भागों में फ़ैल सकते हैं। कुछ कैंसर रक्त के द्वारा या लसिका ग्रंथियों के वारा शरीर के भिन्न भागों तक फ़ैल सकते हैं इसे प्रक्रिया मेटास्टेटिस कहा जाता है। कैंसर जो कि मेटास्टेटस की प्रक्रिया करते हैं उन्हें अंतिम अवस्था का कैंसर माना जाता है। मेटास्टेटिक कैंसर का इलाज करना बहुत मुश्किल हो सकता है और ये अत्यधिक मृत्यु का कारण बनते हैं या बन सकते हैं। कैंसर के प्रकार कैंसर का नाम उस भाग के अनुसार रखा जाता है जहां वे विकसित होते हैं या फिर जिस तरह की कोशिकाओं से बने होते हैं चाहे फिर वे शरीर के भिन्न भागों में ही क्यों न फैले हों। उदाहरण के तौर पर वः कैंसर जो फेफड़ों में बना है यफी वह लिवर तक फ़ैल गया है तब भी उसे फेफड़ों का कैंसर ही कहा जाएगा। विशेष प्रकार के कैंसर के लिए भिन्न नामों का प्रयोग भी किया जाता है, जैसे – कार्सिनोमा – कैंसर का वह प्रकार है जो कि त्वचा और ऊतकों में बनता है जो अन्य अंगों से जुड़े होते हैं सार्कोमा – कैंसर का वह प्रकार है जो कनेक्टिव टिशू में होता है जैसे हड्डियों, मांसपेशियों, कार्टिलेज और रक्त वाहिकाएं ल्यूकेमिया – बोन मेरो का कैंसर। बोन मेरो हड्डियों में पाया जाने वाला एक नरम ऊतक है जो कि रक्त की कोशिकाओं का निर्माण करता है लिंफोमा और मायलोमा प्रतिरक्षा प्रणाली का एक कैंसर है कैंसर का खतरा कैंसर का मुख्य कारण कोशिकाओं के डीएनए में बदलाव है। अनुवांशिक बदलाव माता-पिता से शिशुओं में आ सकते हैं। ये बदलाव जन्म के समय वातावरण के बदलावों के कारण भी हो सकते हैं। जैसे – कैंसरकारी केमिकल से संपर्क जिन्हें कार्सिनोजेन कहा जाता है रेडिएशन से संपर्क सूर्य की रौशनी से अत्यधिक संपर्क कुछ विशेष वायरस जैसे ह्यूमन पेपीलोमा वायरस धूम्रपान जीवनशैली जैसे शारीरिक गतिविधियां और खानपान कैंसर का खतरा उम्र के साथ बढ़ता जाता है। पहले से मौजूद स्वास्थ्य स्थितियां जिनसे सूजन होती है उनसे भी कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। जैसे अल्सरेटिव कोलाइटिस एक क्रोनिक इंफ्लेमेटरी पेट का रोग है। यदि आपको ऐसे कारणों के बारे में पता हो जिनके कारण व्यक्ति को कैंसर हो सकता है तो आपको कैंसर होने का खतरा कम हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार निम्न सात तरीकों से आप कैंसर से स्वयं को बचा सकते हैं – तम्बाकू का प्रयोग न करें और किसी और का प्रयोग किया हुआ धूम्रपान न करें स्वस्थ आहार खाएं या संतुलित आहार खाएं मांसाहार कम खाएं मेडिटेरियन डाइट अपनाएं जिसके अंतर्गत अत्यधिक पौधों पर आधारित भोजन करें, प्रोटीन और स्वस्थ वसा को भोजन में शामिल करें शराब न पिएं या फिर कभी-कभी ही शराब का सेवन करें। जैसे किसी भी उम्र की महिलाएं यदि एक दिन में ड्रिंक लेटो हैं और 65 से कम उम्र के पुरुष एक दिन की दो ड्रिंक लेते हैं तो उन्हें कैंसर का खतरा शराब से नहीं हो सकता है। प्रतिदिन तीस मिनट व्यायाम जरूर करें सूर्या की रौशनी से बच कर रहें कैंसर शरीर के किसी भी भाग में शुरू हो सकता है। शरीर में कैंसर बनना तब शुरू होता है जब सामान्य कोशिकाएं नियंत्रण से अधिक बढ़ने लग जाती हैं और कोशिकाओं का इकट्ठा होना शुरू हो जाता है।  कैंसर होने से घबराए मत , हम आपको बताएंगे की कैसे इससे बच सकते है, और इससे कैसे लड़ सकते है। आधुनिकता की इस दौड़ में मानव के जीवन की पराकाष्ठा देखे तो हर एक व्यक्ति कहीं ना कहीं किसी ना किसी बीमारी से जूझ रहा है या किसी रोग से ग्रस्त हैं।  आधुनिक जीवन में बदलती जीवनशैली के कारण मानव शरीर बीमारियों का घर बनता जा रहा है।  ऐसे ही हमारे शरीर में कई कोशिकाएं होती है, जिसको हम सेल्स कहते है, वो सेल्स बढ़ते

बवासीर क्या है, लक्षण, कारण, उपाय और घरेलु उपचार

बवासीर गुदास्थी भाग या एनल भाग में सूजे हुए ऊतकों का एक समूह होती है। बवासीर आकार के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। ये बाहरी और आंतरिक दो तरह की हो सकती हैं। आंतरिक बवासीर गुदा के बाहरी भाग से दो से चार सेंटीमीटर अंदर ऊपर की तरफ होती है। आंतरिक बवासीर इस रोग का सबसे सामान्य प्रकार है। बाहरी बवासीर एनस या गुदा के बाहरी भाग पर होती है। बवासीर को अर्श रोग भी कहा जाता है जिसका अंग्रेजी नाम हेमोरॉहाइड्स (Hemorrhoids) है। बवासीर गुदास्थि में एकत्रित सूजे हुए ऊतक होते हैं। इनमें रक्त वाहिकाएं, आसपास के ऊतक, मांसपेशियाँ और इलास्टिक फाइबर होती हैं। बहुत से लोगों को बवासीर होती है लेकिन यह जरूरी नहीं कि सभी के लक्षण एक जैसे हों। दुनियाभर में बवासीर से ग्रस्त 50 प्रतिशत लोगों में ही ऐसे लक्षण दिखाई देते हैं जिन्हें पहचाना जा सके। इस लेख में आप बवासीर के लक्षण, कारण, बवासीर का परीक्षण और बवासीर के घरेलू उपायों के बारे में पढ़ेंगे। साथ ही इस लेख में आप यह पढ़ेंगे कि बवासीर व्यक्ति के शरीर को किस तरह से प्रभावित करती है। बवासीर के क्या लक्षण होते हैं? – Bawaseer ke lakshan in hindi बहुत से मामलों में बवासीर गंभीर नहीं होती है। यह आमतौर पर कुछ दिनों में खुद ही ठीक हो जाती है । साथ ही यह भी जरूरी नहीं है कि बवासीर से ग्रस्त प्रत्येक व्यक्ति को दर्द हो बवासीर से पीड़ित किसी भी व्यक्ति को निम्न तरह के लक्षण दिखाई देते हैं –  गुदस्थी के आस पास एक मोटी और दर्दनाक गांठ महसूस हो सकती है । इस गांठ में खून जमा हुआ हो सकता है। जिस बवासीर में रक्त होता है उसे थ्रोमबोस्ड एक्सटर्नल हेमोरोइज्ड कहते हैं। बवासीर से पीड़ित व्यक्ति को मल त्यागने के बाद पेट भरा हुआ लग सकता है । मल त्यागने के बाद रक्त निकलना गूदे के आसपास का स्थान लाल होना, खुजली होना और सूजन आना  मल त्यागने में तकलीफ़ होना  कब्ज मल त्याग के समय दर्द व बेचैनी होना उपरोक्त लक्षण प्रत्येक व्यक्ति में अलग हो सकते हैं। यह लक्षण अन्य स्थिति के कारण भी दिखाई दे सकते हैं, जैसे इन्फ्लेमेटरी बॉवेल डिजीज, एनाल कैंसर, बॉवेल कैंसर और एनल फिशर । यदि आपको इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई देते हैं तो डॉक्टर से संपर्क करें। बवासीर गंभीर स्थिति का भी रूप ले सकता है। गंभीर मामलों में बवासीर के निम्न लक्षण दिखाई देते हैं –  मल त्यागने वाले स्थान जिसे गुदा कहते हैं वहां से अत्यधिक रक्त आना। इस स्थिति से व्यक्ति के शरीर में खून की कमी हो सकती है जिसे एनीमिया कहा जाता है।  संक्रमण  मल को रोक न पाना या फीकल इंकॉन्टीनेंस एनल फिस्ट्यूला, इसमें गुदा के अंदर व बाहर की त्वचा के सतह से एक नया चैनल बन जाता है स्ट्रेंग्युलेटेड बवासीर अंतर्गत बवासीर तक रक्त प्रवाह रुक जाता है जिससे संक्रमण व रक्त का थक्का जमने जैसी स्थितियां पैदा हो जाती हैं बवासीर को चार श्रेणियों में विभाजित किया जाता है  ग्रेड १ : गुदा की आंतरिक परत में छोटी-छोटी सूजन आना । हालांकि यह दिखाई नहीं देते हैं। ग्रेड २ : ये बवासीर ग्रेड १ से बड़ी होती है, लेकिन गुदा के अंदर ही रहती है। हो हो सकता है कि जब आप मल त्यागे तो यह गूदा से बाहर आए लेकिन यह वापस अंदर चले जाते हैं।  ग्रेड ३: इन्हें प्रोलैप्स हैमरॉइड कहा जाता है और यह गुदा के बाहर होते हैं । व्यक्ति को ये रेक्टम से बाहर लटकते महसूस हो सकते हैं लेकिन इन्हें वापस अंदर डाला जा सकता है। ग्रेड ४: यह भी रेक्टम के बाहर लटकते हैं लेकिन इन्हें अंदर नहीं डाला जा सकता और इनके लिए ट्रीटमेंट की आवश्यकता होती है। ये बहुत बड़े होते हैं और गुदा के बाहर ही रहते हैं।  एक्सटर्नल पाइल्स गुदे के बाहरी किनारों पर छोटी गांठे बना देती है। इनमें बहुत अधिक खुजली होती है, साथ ही यदि इन गांठों में खून का थक्का जम जाता है तो यह दर्दनाक हो सकती हैं क्योंकि ब्लड क्लॉट्स से रक्त का प्रवाह अवरुद्ध होता है । थ्रोंबोज्ड एक्सटर्नल पाइल्स या जम चुकी बवासीर का इलाज तुरंत किया जाना चाहिए। बवासीर होने का क्या कारण है? – Bawaseer kyu hoti hai in hindi बवासीर रेक्टम के निचले भाग में दबाव पड़ने के कारण होती है। गुदा के आसपास और मलाशय में रक्त वाहिकाएं दबाव में खिंचाव कर सकती हैं और उनमें सूजन आ सकती है जो कि बवासीर का कारण बन सकती हैं। ऐसा निम्न के कारण हो सकता है –  लंबे समय से कब्ज  लंबे समय से दस्त बाहरी सामान उठाना  गर्भावस्था  शौच जाते समय खींचाव लंबे समय से खांसी यदि आपके परिवार में किसी करीबी को बवासीर है तो यह आपके बवासीर का कारण बन सकती है। बवासीर होने का खतरा बढ़ती उम्र के साथ बढ़ता है। बवासीर का परीक्षण कैसे किया जाता है? – Bawaseer ki janch kaise hoti hai डॉक्टर आमतौर पर बवासीर का परीक्षण शारीरिक एग्जामिनेशन के बाद ही करते हैं। जिस व्यक्ति में बवासवीर होने का संदेह होता है उनमें डॉक्टर गुदास्थी की भी जांच कर सकते हैं। डॉक्टर आपसे निम्न प्रश्न पूछ सकते हैं – क्या आपके किसी करीबी रिश्तेदार को बवासीर है? क्या मल में रक्त या बलगम आ रहा है? क्या हाल ही में आपका वजन कम हुआ है? क्या आपके शौच जाने की क्रिया में कोई बदलाव आये हैं? मल का रंग कैसा था? आंतरिक बवासीर के लिए डॉक्टर डिजिटल रेक्टल एग्जामिनेशन कर सकते हैं जो कि प्रोक्टोस्कोप की मदद से किया जाता है। प्रोक्टोस्कोप एक खोखली ट्यूब होती है जिसमें लाइट लगी होती है। इसकी मदद से डॉक्टर एनल कैनाल को ठीक तरह से देख पाते हैं। वे मलाशय के अंदर से छोटा सा ऊतक का सैंपल ले सकते हैं। इसके बाद सैंपल को लैब में टेस्टिंग के लिए भेज दिया जाता है।  यदि बवासीर से ग्रस्त व्यक्ति के शरीर में पाचन तंत्र से जुड़ी कोई भी अन्य बीमारी के संकेत व लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो डॉक्टर कभी-कभी कोलोनोस्कोपी की भी सलाह दे सकते हैं। कोलोस्कोपी की सलाह तब भी दी जा सकती है अगर व्यक्ति के शरीर में

100 fruits name in Hindi and English – जानिए सभी फलों के नाम हिंदी और अंग्रेजी में

Fruits Name in Hindi with Photo – हम सभी जानते हैं कि हमारी सेहत के लिए फल (fruits) कितने महत्वपूर्ण होते हैं। फलों के जरिए हमारे शरीर को हर जरूर पोषक तत्व प्राप्त होता है जिनकी मदद से न केवल हम स्वस्थ रहते हैं बल्कि दिनचर्य के कई कार्यो को पूरा करने के लिए हमें ऊर्जा भी मिलती है। फ्रूट्स में सभी प्रकार के विटामिन, खनिज पदार्थ और विभिन्न पोषक तत्व होते हैं जैसे की मैग्नीशियम, कैल्शियम, फोलिक एसिड, फास्फोरस, कॉपर, आयरन, सोडियम और जिंक आदि। फलों को अपने आहार में शामिल करने से व्यक्ति जीवन भर स्वस्थ रहता है। आपने वो कहावत जरूर सुनी होगी “An apple a day keeps a doctor away” यानी रोजाना एक सेब खाने से आपको किसी भी चिकित्स्क की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। सेब की ही तरह अन्य फलों का भी नियमित सेवन करने से आप कई प्रकार की बिमारियों से बच पाते हैं। आज हम आपको सभी फलों के हिंदी और इंग्लिश में नाम बताएंगे। कई लोग फलों के अंग्रेजी व हिंदी नामों को लेकर कंफ्यूज हो जाते हैं जिसके कारण वह गलत फल का भी सेवन कर सकते हैं। कई लोग अगर हिंदी में फल का नाम जानते हैं तो इंग्लिश में नहीं जानते तो वही कई लोगों को इंग्लिश फ्रूट्स का मतलब हिंदी में नहीं पता होता (fruits name meaning in hindi). तो चलिए जानते हैं हिंदी और इंग्लिश में फलों के नामों के बारे में वो भी फोटो के साथ – Acai Berry/Black berries/Dewberry in Hindi = काला जामुन/जामुन/ड्यूबेरी इन इंग्लिश Apple/Pippin Fruit = सेब इन इंग्लिश Apricot meaning in Hindi = खुबानी/जर्दालु इन इंग्लिश Avocado/Butter fruit in Hindi = एवोकाडो/मक्खन फल इन इंग्लिश Banana/Plantain in Hindi = केला इन इंग्लिश Black Nightshade in Hindi = मकोय इन इंग्लिश Blackcurrant meaning in Hindi = फालसेब इन इंल्गिश Blueberry fruit meaning in Hindi = नीलबदरी/ब्लूबरी Cantaloupe meaning in Hindi = खरबूजा इन इंग्लिश Carambola/Star fruit in meaning in Hindi = कमरख इन इंग्लिश Cashew Apple fruit in Hindi = काजू फल Cherry in Hindi = चेरी Citron/Shaddock fruit/Grapefruit/Pomelo = चकोतरा Clementine/Orange in Hindi = संतरा इन इंग्लिश Cloudberry meaning in Hindi = क्लाउड बेरी इन इंग्लिश Coconut in Hindi = नारियल इन इंग्लिश Cranberry fruit in Hindi = क्रैनबेरी इन इंग्लिश Custard Apple in Hindi = सीताफल/शरीफा इन इंग्लिश Damson in Hindi = झरबेर इन इंग्लिश Pumpkin in Hindi = कद्दू इन इंग्लिश Dates fruit in Hindi = खजूर इन इंग्लिश Dragon Fruit/Pitaya in Hindi = ड्रैगन फल Egg fruit in Hindi = अंडा फल इन इंग्लिश Elderberry in Hindi = एल्डरबेर्री Feijoa fruit in Hindi = फेजोआ Fig in Hindi = अंजीर Goji Berry meaning in Hindi = गोजी बेर Gooseberry fruit in Hindi = करौंदा इन इंग्लिश Grapes in Hindi = अंगूर इन इंग्लिश Grewia Asiatica in Hindi = फालसा इन इंग्लिश Guava in Hindi = अमरुद इन इंग्लिश Honeyberry in Hindi = हनी बेरी इन इंग्लिश Honeydew Melon in Hindi = मीठा तरबूज इन इंग्लिश Huckleberry in Hindi = हक्लबेरी इन इंग्लिश Jabuticaba in Hindi = जबुटिकाबा इन इंग्लिश Jackfruit in Hindi = कटहल इन इंग्लिश Jicama fruit in Hindi = सकालू इन इंग्लिश Jujube in Hindi = बेर इन इंग्लिश Neolamarckia cadamba fruit in Hindi = कदबं फल इन इंग्लिश Kiwano in Hindi = किवानो इन इंग्लिश Kiwi meaning in Hindi = कीवी इन इंग्लिश Lemon in Hindi = नींबू इन इंग्लिश Limonia Acidissima in Hindi = कैथा इन इंग्लिश Longan/Lychee meaning in Hindi = लीची इन इंग्लिश Loquat in Hindi = लोकाट इन इंग्लिश Makoy fruit in Hindi = रसभरी इन इंग्लिश Malay Apple/Rose Apple in Hindi = हरा जामुन इन इंग्लिश Malta fruit in Hindi = माल्टा फल इन इंग्लिश Mandarin in Hindi = किन्नू इन इंग्लिश Mango in Hindi = आम इन इंग्लिश Mangosteen in Hindi = मैंगास्टीन इन इंग्लिश Miracle fruit in Hindi = चमत्कारी फल इन इंग्लिश Mismusops in Hindi = खिरनी इन इंग्लिश Monk fruit in Hindi = साधु फल इन इंग्लिश Monkey fruit in Hindi = बढ़ल/बड़हर/बड़हल इन इंग्लिश Mulberry in Hindi = मलबैरी इन इंग्लिश Mulberry in Hindi = शहतूत इन इंग्लिश Muskmelon fruit in Hindi = खरबूजा Nance in Hindi = नैन्स इन इंग्लिश Olive fruit in Hindi = जैतून इन इंग्लिश Owari Satsuma in Hindi = सात्सुमा इन इंग्लिश Palm fruit in Hindi = ताड़ का फल इन इंग्लिश Palmyra fruit in Hindi = ताड़ गोला इन इंग्लिश Papaya meaning in Hindi = पपीता इन इंग्लिश Passion fruit in Hindi = कृष्णा फल Peach/Nectarine fruits in Hindi = सतालू/आड़ू इन इंग्लिश Pear fruit in Hindi = नाशपाती/बाबूगोशा इन इंग्लिश Persimmon in Hindi = तेंदू फल इन इंग्लिश Pineapple meaning in Hindi = अनानास इन इंग्लिश Pineberry in Hindi = पाइनबेरी इन इंग्लिश Pithecellobium Dulce in Hindi = जंगल जलेबी इन इंग्लिश Plum in Hindi = आलूबुखारा इन इंग्लिश Pomegranate in Hindi = अनार इन इंग्लिश Prickly Pear meaning in Hindi = कांटेदार नाशपाती इन इंग्लिश Quince in Hindi = सफरजल/श्रीफल इन इंग्लिश Raisins in Hindi = किशमिश इन इंग्लिश Red Banana in Hindi = लाल केला इन इंग्लिश Salak in Hindi = सालक इन इंग्लिश Salak in Hindi = सलक इन इंग्लिश Sapodilla/Sapota = चीकू/नसबेरी इन इंग्लिश Satsuma in Hindi = सात्सुमा इन इंग्लिश Soursop in Hindi = लक्ष्मण फल इन इंग्लिश Star Apple in Hindi = सितारा सेब इन इंग्लिश Strawberry meaning in Hindi = स्ट्रॉबेरी Sugar Cane in Hindi = गन्ना इन इंग्लिश Surinam Cherry in Hindi = सुरिनाम चेरी इन इंग्लिश Sweet Lime in Hindi = मोसंबी/मौसमी इन इंग्लिश Sweet Potato in Hindi = शकरकंद इन इंग्लिश Tamarillo in Hindi = तमारिल्लो इन इंग्लिश Tamarind in Hindi = इमली इन इंग्लिश Tomato in Hindi = टमाटर इन इंग्लिश Ugli fruit in Hindi = उगली फल इन इंग्लिश Water Chestnut in Hindi = सिंघाड़ा इन इंग्लिश Watermelon in Hindi = तरबूज इन इंग्लिश White Mulberry in Hindi = सफेद शहतूत इन इंग्लिश Wood Apple in Hindi = बेल इन इंग्लिश Zucchini in Hindi = तुरई इन इंग्लिश

How to Measure Your Height

हाइट बढ़ाने के घरेलू उपाय, एक्सरसाइज और क्या खाएं – How to Increase Height in a Week in Hindi

हाइट बढ़ाने के तरीके – Height Badhane Ke Liye Kya Kre हाइट एक ऐसी चीज है जिसे सुंदरता के पैमाने में सबसे ऊपर माना जाता है। आप सभी ने देखा होगा की भीड़ में लंबा व्यक्ति अलग ही दिखाई देता है। यह कारण है कि हर कोई लंबी हाइट की ख्वाहिश रखता है। आपकी इसी ख्वाहिश को पूरा करने के लिए आज हम आपको इस लेख में बताएंगे – हाइट बढ़ाने के तरिके, हाइट बढ़ाने की दवा, हाइट बढ़ाने का तरीका, हाइट बढ़ाने के उपाय, हाइट बढ़ाने की दवा पतंजलि, हाइट बढ़ाने के कैप्सूल, हाइट बढ़ाने की एक्सरसाइज फोटो, हाइट बढ़ाने के लिए क्या खाना चाहिए, हाइट बढ़ाने के घरेलू नुस्खे, हाइट बढ़ाने के योग, हाइट बढ़ाने की एक्सरसाइज (exercise) और हाइट बढ़ाने के लिए क्या करना चाहिए। कई लोगों को यह कहा जाता है कि हाइट अनुवांशिक होती है और वह केवल 17 से 18 वर्ष की उम्र तक ही बढ़ती है। दरअसल ऐसा बिलकुल नहीं है। आप चाहें तो 18 वर्ष की उम्र के बाद भी अपनी हाइट बढ़ा सकते हैं। आयुर्वेद और योग के अनुसार भी कुछ खास जड़ी-बूटियों के सेवन व आसान की मदद से हाइट बढ़ाने में मदद मिलती है। अगर आपकी उम्र 18, 21 या 25 वर्ष की है तो चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि इस उम्र में भी हाइट बढ़ाने की गुंजाईश होती है। हालांकि, ध्यान रहे की जितनी ज्यादा आपकी उम्र होगी उतना ही कम आपकी हाइट बढ़ने की संभवना रहेगी। हाइट बढ़ाने का घरेलू उपाय – Height badhane ka gharelu upay आप सोच रहे होंगे की बिना किसी कसरत व योग के हाइट को कैसे बढ़ाया जा सकता है? बता दें की आयुर्वेद के अनुसार हमारी डाइट यानी खाने का हाइट बढ़ाने पर बेहद असर पड़ता है। हम जो कुछ खाते हैं उसका सीधा प्रभाव हाइट बढ़ने व रुकने दोनों को प्रभावित कर सकता है। इसीलिए आज हम आपको बतांएगे की किन हेल्दी उपाय की मदद से आप घर पर ही हाइट बड़ा सकते हैं – हाइट बढ़ाने का घरेलू तरीका है अश्वगंधा चूर्ण – Height badhane ka gharelu upay hai ashwagandha अश्वगंधा एक ऐसी आयुर्वेदिक औषधि है जिसे लगभग हर रोग के इलाज में इस्तेमाल किया जाता है। अश्वगंधा पाउडर का यौन स्वास्थ्य, ऊर्जा बढ़ाने और शक्ति प्रदान करने के लिए सेवन किया है। इसके अलावा कई प्राचनी चिकित्स्क अश्वगंधा के सेवन से शरीर की लंबाई बढ़ाने का भी उपचार किया करते थे। अध्ययनों के अनुसार भी अश्वगंधा के सही सेवन की मदद से 25 की उम्र तक व्यक्ति की हाइट आसानी से बढ़ सकती है। चूर्ण है हाइट बढ़ाने का घरेलू नुस्खा – Growth on Powder for Height Increase in Hindi अगर आप घर पर ही बिना किसी खर्च के हाइट बढ़ाने की दवा बनाना चाहते हैं तो नागौरी और अश्वगंधा बनाने की विधि को अच्छे से फॉलो करें। अश्वगंधा के पत्तों को अच्छे से पीस कर उसमें नागौरी के बीज मिलाएं। इन दोनों का चूर्ण (powder) तैयार कर लें और उसे रोजाना दूध या पानी में मिलाकर 2 बार सेवन करें। हाइट बढ़ाने के नुस्खे हैं कैल्शियम युक्त आहार – Calcium se badhti hai height कैल्शियम (height badhane ka tarika) हड्डियों की वृद्धि के लिए बेहद जरूरी होता है। छोटी उम्र से ही कैल्शियम की कमी के कारण व्यक्ति को किशोरावस्था में कम हाइट का सामना करना पड़ सकता है। अगर आप 22 की उम्र के बाद भी हाइट बढ़ाना चाहते हैं तो कैल्शियम युक्त आहार खाना शुरू कर दें। इसके लिए आप अंडे, दूध, पनीर, बीन्स, फलियां, कद्दू, गाजर दाल, केले और ब्रोकोली का सेवन कर सकते हैं। अपने आहार में दूध से बनी सभी प्रकार की चीजों को शामिल करें। हाइट बढ़ाने का घरेलू उपचार है नींद – Height badhane ka gharelu upchar hai neend अच्छी हाइट के लिए पर्याप्त नींद लेना बेहद जरूरी होता है। सोते समय हमारे शरीर की मांसपेशियां को आराम मिलता है जिससे उनमें वृद्धि होती है। इसके साथ ही अच्छी नींद लेने से हड्डियां व मस्तिष्क स्वस्थ रहते हैं। बेहतर नींद के लिए सोने से पहले दूध का सेवन करें। इसके अलावा सीधी मुद्रा में सोने की कोशिश करें। सही मुद्रा और सोने का समय से हाइट के बढ़ने में बेहद महत्व रखता है। हमारे शरीर के ज्यादातर ग्रोथ हॉर्मोन सोते समय ही बढ़ते हैं। हालांकि, इसके साथ आपको अपने दिनचर्य में स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज शामिल करने की भी आवश्यकता होगी। हाइट बढ़ाने का घरेलू इलाज है ये देसी नुस्खा – Height badhane ka gharelu ilaj hai ye desi nuskha बरगद का फल, जीरा और मिश्री के मिश्रण का रोज सेवन करने से 18 वर्ष की उम्र के बाद भी हाइट को बढ़ाया जा सकता है। तीनो सामग्री को एक साथ पीस लें। अब इस पाउडर को दूध या पानी के साथ मिलाकर रोजाना दिन में दो बार लें। हाइट बढ़ाने की 5 एक्सरसाइज – Height badhane ki exercise व्यायाम हाइट बढ़ाने में सबसे अधिक प्रभावशाली माना जाता है। हालांकि, अगर आपकी उम्र 22 से ज्यादा है तो आपको इसके साथ हाइट बढ़ाने के घरेलू उपायों को भी अपनाने की जरूर पड़ सकती है। हाइट बढ़ाने की बेस्ट एक्सरसाइज है साइकिलिंग – Height badhane ki best exercise hai cycling अगर आप अभी भी 18 वर्ष के हैं और अपनी हाइट बढ़ाने के बारे में चिंतित हैं तो साइकिलिंग आपके लिए एक बेहतरीन हाइट बढ़ाने की एक्सरसाइज हो सकती है। कुछ अध्ययनों में साइकिल चलाने से हाइट बढ़ने के ठोस सबूत देखें गए हैं। साइकिल चलाते समय हमारे पैरों की गतिविध में स्ट्रेचिंग होती है जिसके कारण उनके लंबे होने की संभावना बड़ जाती है। ध्यान रहे की किसी भी उम्र में स्ट्रेचिंग की मदद से शरीर को कुछ इंच तक बढ़ाया जा सकता है। लटकना है हाइट बढ़ाने की बेस्ट एक्सरसाइज इन हिंदी – Hanging exercise for height in Hindi लटकने से हाइट बढ़ती है, यह तो हम सभी जानते हैं लेकिन किस उम्र तक? दरअसल शोध के अनुसार आपको बढ़ती उम्र के मुताबिक लटकने की विधि और समय सीमा में बढ़ोतरी करने की आवश्यकता होती है। कम उम्र से ही लटकने पर किशोरावस्था तक व्यक्ति की लंबाई अच्छी खासी बढ़ जाती है। हालांकि, अगर आप 21 वर्ष की

प्रेगनेंसी में खट्टा खाने से क्या होता है

प्रेगनेंसी में खट्टा खाने से क्या होता है – Pregnancy mein Khatta Khane se Kya Hota Hai आज हम आपको इस लेख में बताएंगे कि प्रेगनेंसी में खट्टा खाने का क्या मतलब होता व प्रेगनेंसी में खट्टा खाना चाहिए कि नहीं। यदि आप गर्भवती हैं तो आपको अजीब-अजीब खाने से जुड़ी चीज़ों का सेवन करने का मन करता होगा जो कि शायद आपने पहले न खाई हों। कभी-कभी तो आपको ऐसी चीज़ें खाने का मन करेगा जो आप कभी खाना नहीं चाहेंगी या जो खाने की नहीं होती है। इस सब में महिलाओं का सबसे अधिक मन खट्टा खाने का होता है। क्या आपको पता है महिलाओं को गर्भवस्था में खट्टा खाने का मन क्यों करता है? अक्सर हमने लोगों को यह कहते सुना है कि गर्भवती महिलाओं को खट्टा खाने का दिल करता है। यदि कोई महिला ज्यादा खट्टी चीज़ें खा रही है तो प्रश्न यही आता है कि शायद महिला गर्भवती होगी। यह बात हम सभी जानते हैं कि प्रेगनेंसी में खट्टा खाने का मन करता है पर क्या आपको पता है ऐसा क्यों होता है?  आमतौर पर गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के शुरूआती समय में खट्टा खाती है जो कि एक मानसिक स्थिति है। हालांकि महिलाएं गर्भावस्था में खट्टी चीज़ें क्यों खाती हैं इसके कई वैज्ञानिक कारण हैं जो कि गर्भावस्था के शुरू होने से ही आरम्भ हो जाते हैं। निम्न तीन मुख्य कारणों की वजह से महिलाओं को गर्भवस्था में खट्टा खाने का मन करता है –  गर्भावस्था के शुरुआती चरण में महिला के शरीर में गैस्ट्रिक एसिड का बनना कम हो जाता है जिससे पाचन करने वाले एंजाइम कम बनते हैं जिसके कारण गर्भवती महिला को चक्कर आना, जी मिचलाना, भूख कम लगना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। खट्टा खाने से पेट में गैस्ट्रिक एसिड बनने लगता है और पाचन करने वाले एंजाइम भी बनने लग जाते हैं जिससे गैस्ट्रोइंटेस्टिनल पथ में कार्य शुरू हो जाता है जिसके कारण पाचन और भोजन के अवशोषण में मदद मिलती है। तो अगर कोई गर्भवती महिला एसिडिक या खट्टा पदार्थ कहती है तो वो इसलिए ताकि उसे जी मिचलाना, उलटी आना आदि लक्षणों से आराम मिल सके और इनके कारण गर्भवती महिला की भूख भी बढ़ जाती है।  गर्भावस्था के दूसरे व तीसरे महीने में शिशु की हड्डियाँ व कंकाल बनना शुरू होता है जो कि कैल्शियम से बना होता है लेकिन कैल्शियम को फ्री फॉर्म में हड्डियों में ज़माने के लिए एसिडिक फ़ूड या विटामिन सी की जरूरत होती है। इसलिए इस समय में महिला का खट्टा खाने का मन करता है।  गर्भवती महिला यदि खट्टे पदार्थ खाती है तो उसका शरीर आयरन के अवशोषण, हमोग्लोबिन को बनने में मदद करने के लिए इन खट्टी चीज़ों की मांग करता है। विटामिन सी माता व शिशु दोनों के स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी है। भ्रूण अपने लिए कनेक्टिव टिशू सेल का उत्पादन करने के लिए मैट्रिक्स प्रोडक्शन की संरचना कर रहा होता है और साथ ही हेमाटोपोईएटिक की संरचना भी हो रही होती है जो कि शिशु के कार्डियो वेस्कुलर विकास और वृद्धि में मदद मिलती है। विटामिन सी से माता की इम्युनिटी बढ़ जाती है और आयरन के अवशोषण व प्रयोग को बढ़ावा देता है और खट्टी चीज़ें अधिकतर विटामिन  सी से बनी होती है  इससे गर्भवती माँ अपने आप को व शिशु को विटामिन सी दे पाती है। साथ ह आयरन एक जरूरी ट्रेस पदार्थ है हीमोग्लोबिन के निर्माण के लिए आयरन बहुत ही जरूरी है। साथ ही गर्भवती महिलाओं को आयरन की कमी हो सकती है। ऐसे में विटामिन सी एनीमिया को ठीक करने में मदद करता है। केवल एसिडिक स्थितियों में फ्रिक आयरन डाईवेलेंट आयरन में बदल सकता है जो कि पेट द्वारा अवशोषित होता है।

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Depression in Hindi – डिप्रेशन का लक्षण और उपचार

अवसाद यानी डिप्रेशन क्या होता है? – What is Depression in Hindi आज हम आपको डिप्रेशन (Depression) के लक्षण (Symptoms) कारण (Causes) और इलाज (Treatment) के बारे में बताएंग। डिप्रेशन को हिंदी में अवसाद कहा जाता है जो कि एक मानसिक विकार है। इसमें व्यक्ति को अत्यधिक दुःख, क्षति का एहसास होता है। कई बार व्यक्ति को अत्यधिक गुस्सा भी आ सकता है जिससे व्यक्ति का सामान्य जीवन प्रभावित होता है। यह बहुत ही सामान्य स्थिति है। एक शोध के अनुसार यह पता चला है कि अमेरिका में बीस वर्ष के युवाओं में 8.1 युवा डिप्रेशन का शिकार होते हैं।  डिप्रेशन व्यक्ति को अलग-अलग तरह से महसूस होता है। यह आपके रोजाना के कार्यों को भी प्रभावित करता है . इसके कारण व्यक्ति के समय की अधिक बर्बादी होती है और काम भी कम हो पाता है। इससे व्यक्ति के निजी रिश्ते भी प्रभावित होते हैं साथ ही डिप्रेशन का बहुत अधिक प्रभाव स्वास्थ्य स्थितियों पर भी पड़ता है।  ऐसी स्थितियां जो कि डिप्रेशन के कारण और अधिक खराब हो सकती हैं उनमें निम्न शामिल हैं  आर्थराइटिस  अस्थमा  कार्डियोवैस्कुलर रोग  कैंसर  डायबिटीज  मोटापा  यह समझना और महसूस करना बेहद जरूरी है कि जीवन में दुःख महसूस करना जीवन का एक अंग है। दुखद घटना सभी के जीवन में होती है। लेकिन अगर आप लगातार ना उम्मीद महसूस कर रहे हैं तो हो सकता है कि आप डिप्रेशन के शिकार हैं।  डिप्रेशन को एक गंभीर मानसिक स्थिति माना जाता है जो कि सही इलाज न मिलने के कारण और अधिक खराब हो सकती है। जो लोग डिप्रेशन का ट्रीटमेंट लेते हैं उनके लक्षणों में कुछ हफ्तों में ही सुधार दिखाई देने लगता है।  डिप्रेशन दुनियाभर में बहुत ही सामान्य स्थिति है, इससे लगभग 264 मिलियन लोग प्रभावित हैं। डिप्रेशन सामान्य मूड स्विंग या मन में थोड़े समय के लिए रहने वाली भावनाओं से बहुत अलग होता है। यदि डिप्रेशन लंबे समय से और अलग-अलग गंभीरता के साथ व्यक्ति को प्रभावित करता है तो यह  स्वास्थ्य स्थिति बन सकता है। डिप्रेशन का शिकार व्यक्ति घर पर ऑफिस में या स्कूल में ठीक तरह से कार्य नहीं कर पाता है। डिप्रेशन की अधिकता में व्यक्ति आत्महत्या तक कर लेता है। विश्व भर में एक साल में आठ लाख लोग आत्महत्या से मरते हैं जिसका सबसे कारण आत्महत्या है। 15-29 वर्ष के युवाओं में आत्महत्या मृत्यु का दूसरा बड़ा कारण है। हालांकि मानसिक विकारों के लिए कई प्रभावकारी ट्रीटमेंट हैं लगभग 76 प्रतिशत गरीब देशों के लोगों तक डिप्रेशन की दवाएँ पहुंच नहीं पाती हैं। अच्छी तरह से केयर करने के लिए जरूरी स्रोत, संसाधन, स्वास्थ्य कर्मियों की कमी और बाहरी तनाव के कारण मानसिक रोगों का इलाज नहीं हो पाता है। दुनियाभर के देशों में डिप्रेशन से ग्रस्त लोगों का इलाज ठीक तरह से नहीं हो पाता है और साथ ही वे लोग जिन्हें डिप्रेशन नहीं भी होता है उन्हें एंटी डिप्रेस्सेंट दी जाती हैं।  डिप्रेशन व अन्य मानसिक स्थितियों का भार आज विश्व भर में बढ़ता जा रहा है। जीवन की बड़ी घटनाएँ जैसे किसी प्रेमी का छोड़ कर चले जाना, किसी प्रिय का बिछड़ना, नौकरी छूटना आदि के कारण व्यक्ति को डिप्रेशन हो सकता है। हालांकि, डॉक्टर ऐसा मानते हैं कि यदि दुःख लंबे समय तक बना रहता है तो यह डिप्रेशन का रूप ले सकता है। डिप्रेशन एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है न कि गुजरने वाली। यह भिन्न एपिसोड या भिन्न भागों में व्यक्ति को प्रभावित करती है जिसके लक्षण दो हफ्तों तक दिखाई दे सकते हैं। डिप्रेशन कुछ हफ़्तों, महीनों या सालों तक भी चल सकता है। इसमें व्यक्ति को अकेलापन महसूस होता है। व्यक्ति सबके साथ रह कर भी अलग-थलग महसूस करता है। आइये डिप्रेशन के लक्षण, कारण व इलाज के बारे में विस्तृत रूप से जानें।  डिप्रेशन का लक्षण – Depression Symptoms in Hindi हर व्यक्ति को जीवन में कभी न कभी दुःख महसूस होता है लेकिन कभी-कभी यह कुछ दिनों तक रहता है और फिर ठीक हो जाता है। डिप्रेशन इन सभी से अलग होता है। यह आपके पूरी जीवनशैली को प्रभावित करता है और जीवन को और मुश्किल बना देता है। आपको ठीक होने के लिए इलाज की और काउंसलिंग की जरूरत पड़ती है।  डिप्रेशन के कई सारे संकेत और लक्षण दिखाई देते हैं लेकिन यह जरूरी नहीं है कि वे सभी लक्षण आपको भी दिखाई दे। प्रत्येक व्यक्ति में डिप्रेशन के लक्षण अलग हो सकते हैं और अलग तरह की गंभीरता से व्यक्ति को प्रभावित कर सकते हैं।  डिप्रेशन में क्या होता है – Depression mein kya hota hai दुखी, खाली और बेचैन। ये भावनाएं व्यक्ति के मन में बनी रहती हैं और जीवन में ख़ालीपन का एहसास होता है। बहुत से लोगों के साथ रहकर भी अकेलापन महसूस करना।  किसी बात का अत्यधिक बुरा लगना, लाचार, बेसहारा और बेबस महसूस करना। व्यक्ति को अपने जीवन के बारे में बुरा महसूस हो सकता है। हो सकता है कि व्यक्ति अपने जीवन के बारे में बहुत अधिक सोचता हो।  बेबस महसूस करना। हो सकता है कि व्यक्ति बहुत निराश महसूस करे और उसे हर समय यही लगता रहे कि उसके जीवन में कुछ अच्छा नहीं होने वाला है। व्यक्ति को इस समय आत्महत्या के ख्याल भी आते रहते हैं।  चिड़चिड़ापन। व्यक्ति अत्यधिक चिड़चिड़ा हो सकता है या फिर सामान्य से अधिक गुस्सा कर सकता है।  किसी भी काम में मन न लगना। किसी भी खेल या हॉबी को न कर पाना। हो सकता है कि व्यक्ति के खाने-पीने, खेलने और सेक्स तक की इच्छा खत्म हो जाए।  ऊर्जा की कमी। व्यक्ति में कुछ भी नया करने की इच्छा और ऊर्जा न होना भी डिप्रेशन का एक संकेत हो सकता है। रोजाना के कार्य और अन्य काम को करना बहुत बोझिल लगे। साथ ही व्यक्ति बहुत थका हुआ भी महसूस कर सकता है।  ध्यान लगाने में परेशानी। हो सकता है कि व्यक्ति को अपना ध्यान केंद्रित करने में समस्या हो। सामान्य कार्य जैसे अखबार पढ़ना, टीवी देखना आदि में भी मन न लगना। व्यक्ति को कोई भी निर्णय लेने में भी परेशानी हो सकती है। साथ ही हो सकता है कि व्यक्ति को कुछ भी याद न रहे।  स्लीपिंग पैटर्न में गड़बड़ी। हो सकता

एम.एस धोनी और केदारनाथ जैसी हिट फिल्मों के अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत ने की ख़ुदकुशी 

2020 में जहां चारों-तरफ कोविड-19 का कोहराम मचाया हुआ है वहीं बॉलीवुड की मशहूर हस्तियों के निधन हो रहे हैं। पूर्व टीवी एक्टर और बहुत ही प्रसिद्ध बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत ने मुंबई के बांद्रा में मौजूद अपने घर में ख़ुदकुशी की है। सुशांत ने अपने घर में फांसी लगाकर ख़ुदकुशी की है। यह खबर बहुत ही चौंकाने वाली है। खबरों के मुताबिक सुशांत पिछले छह माह से डिप्रेशन के शिकार थे। सुशांत की मौत से एक हफ्ते पहले ही उनकी मैनेजर दिशा सालियन ने भी मुंबई के एक अपार्टमेंट से कूद कर अपनी जान दी थी। उनके पार्थिव शरीर को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल ले जाया गया है। डिप्रेशन की वजह का अब तक पता नहीं चल पाया है।  सुशांत की मृत्यु एक बड़ा चौंकाने वाला वाक़या है। पिछले दो माह में बॉलीवुड की यह चौथी मौत है। इससे फिल्म जगत व उनके फैन ग़मगीन हैं। सुशांत की उम्र 34 वर्ष थी। बीती रात वे अपने दोस्तों के साथ थे। अब उनके दोस्तों से पूछताछ की जा रही है। सुशांत सिंह राजपूत पटना,बिहार के रहने वाले हैं।  छिछोरे फिल्म में अपने बेटे को ख़ुदकुशी करने से रोकने के लिए जीवन के संघर्ष की कहानी बताते सुशांत खुद जिंदगी के संघर्ष की जंग हा   र गए। यह बेहद स्तब्ध कर देने वाली खबर है।  सुशांत ने बॉलीवुड में काई पो चे फिल्म से डेब्यू किया था जो कि एक हिट फिल्म थी। सुशांत को छोटे पर्दे के धारावाहिक पवित्र रिश्ता के माध्यम से अधिक प्रसिद्धि मिली। सुशांत धोनी के बड़े फैन थे और यह अंदाज़ा एम एस धोनी उनकी बेहतरीन अदाकारी से लगाया जा सकता है। उनकी आखिरी फिल्म छिछोरे थी जो एक बहुत बड़ी हिट फिल्म है और  ख़ुदकुशी पर ही आधारित थी। सुशांत की प्रत्येक फिल्म में एक मैसेज हुआ करता था चाहे वह पीके, एमएस धोनी, काई पो चे या फिर छिछोरे हो। उन्हें महेंद्र सिंह धोनी की बायोपिक में शानदार अभिनय के लिए बेस्ट एक्टर का अवार्ड भी दिया गया था। सूत्रों के अनुसार वे डिप्रेशन के शिकार थे। इससे पहले भी बॉलीवुड के कई कलाकारों ने ख़ुदकुशी की है। यह बात तो बिलकुल साफ़ है कि चकाचौंध से अलग भी एक दुनिया होती है जहां पैसा और प्रसिद्धि काम नहीं आती है। यह बात उनके आखिरी इंस्टाग्रम पोस्ट से साफ़ होती है जिसमें उन्होंने अपनी मां की तस्वीर को साझा करते हुए धुंधले  अतीत और क्षणभंगुर जीवन की बात कही है। बता दें सुशांत की माता का साल 2002 में ही निधन हो गया था।  बॉलीवुड अपना शोक ट्विटर के माध्यम से जता रहा है। अनुपम खेर जिन्होंने एमएस धोनी में सुशांत के पिता का किरदार निभाया लिखते हैं – “मेरे प्यारे सुशांत आखिर, क्यों, क्यों”  सतीश कौशिक लिखते हैं “बहुत दुखद आखिर तुमने यह क्यों किया सुशांत”   

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अश्वगंधा क्या होता है जाने इसके उपयोग, विधि और नुकसान – Ashwagandha Benefits and Side Effects in Hindi

अश्वगंधा क्या होता है? – What is Ashwagandha in Hindi अश्वगंधा एक प्राचीन जड़ी बूटी है जिसे कई वर्षों से आयुर्वेद में इलाज के तौर पर इस्तेमाल किया जाता रहा है। इस आयुर्वेदिक औषधि को एडाप्टोजेन वर्गीकृत किया गया है जिसका अर्थ होता है शरीर के स्ट्रेस को कंट्रोल करना। अश्वगंधा शरीर और मस्तिष्क को कई प्रकार के फायदे पहुंचाता है। जिसमें एंग्जायटी और डिप्रेशन को कम करना भी शामिल है। इसके साथ ही यह आयुर्वेदिक मेडिसन मस्तिष्क के कार्य प्रणाली को बेहतर बनाने, ब्लड शुगर को कम करने और कोर्टिसोल के स्तर को नियमित करने में मदद करती है। आज हम आपको इस लेख में बताएंगे – अश्वगंधा के फायदे, अश्वगंधा के गुण, अश्वगंधा कैप्सूल के लाभ, पतंजलि अश्वगंधा पाउडर के फायदे, अश्वगंधा के नुकसान, अश्वगंधा के साइड इफेक्ट्स, अश्वगंधा में परहेज, अश्वगंधा का सेवन विधि, अश्वगंधा का सेवन कब करें, अश्वगंधा को कैसे खाये, अश्वगंधा को कैसे खाना चाहिए, अश्वगंधा को कैसे इस्तेमाल करें, अश्वगंधा को कैसे यूज़ करें, अश्वगंधा को कैसे पहचाने, अश्वगंधा और दूध के लाभ, अश्वगंधा के पत्ते कैसे होते हैं, अश्वगंधा के बीज का उपयोग, अश्वगंधा शतावरी के फायदे, अश्वगंधा का पौधा, अश्वगंधा की पहचान और अश्वगंधा की कीमत। अश्वगंधा खाने के फायदे – Benefits of Ashwagandha in Hindi अष्वगंधा एक ऐसी जड़ी बूटी है जिसके कई सारे फायदे हैं। यह संपूर्ण शरीर, मांसपेशियों, शुक्राणुओं और मस्तिष्क के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करता है। इसके इस्तेमाल से व्यक्ति ऊर्जावान बनता है जिससे उनकी सेक्स लाइफ को भी बेहद फायदा पहुंचता है। इस औषधि को 3000 सालों से स्ट्रेस कम करने, ऊर्जा बढ़ाने और एकाग्रता को बेहतर बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। अश्वगंधा संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ होता है घोड़े की सुगंध। ऐसा इसलिए है क्योंकि इसकी महक घोड़े जैसी होती है व यह घोड़े जैसी शक्ति भी प्रदान करता है। इस औषधि को चीन की मशहूर चिकित्सक व प्राचीन जड़ी बूटी के नाम से भी जाना जाता है – भारतीय जिनसेंग। तो चलिए अब जानते हैं कि आखिर अश्वगंधा आपके स्वास्थ्य को किस प्रकार के फायदे पहुंचाता है – अश्वगंधा के आयुर्वेदिक गुण – Ashwagandha ke Ayurvedic Fayde अश्वगंधा एक ऐसी औषधि है जिसमें कई गुण मौजूद हैं। अपने ऊर्जावान गुणों के चलते इसे आयुर्वेद में प्राथमिक दवा का दर्जा दिया गया है। बालों को घना और काला बनाने से लेकर इसके कई गुण यौन स्वास्थ्य को मजबूत और ताकतवर बनाने में मदद करते हैं। अश्वगंधा के गुण आपके संपूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करते हैं। यह हृदय, गुर्दे, लिंग, लिवर, चयापचय, कामोत्तेजना, कैंसर, डिप्रेशन, संक्रमण, मोतियाबिंद, चोट, मांसपेशियों व हड्डियों में दर्द जैसी समस्याओं को ठीक करने में मदद करता है। अश्वगंधा के इन गुणों पर कई शोध भी किए जा चुके हैं। जिनके अनुसार रोजाना नियमित रूप से इसका सेवन करने से व्यक्ति को अत्यधिक ऊर्जा मिलती है और साथ ही संभोग करने की प्रकियाओं में वृद्धि होती है। अश्वगंधा के गुण एनीमिया की स्थिति से भी छुटकारा दिलाते हैं। इसके सेवन से लाल रक्त कोशिकाओं भी बढ़ोत्तरी होती है जिससे शरीर के सभी ऊतकों तक ऑक्सीजन पहुंच पाती है। अश्वगंधा के ऐसे ही कई सारे फायदे हैं जिनके बारे में अधिकतर लोग नहीं जानते हैं। अश्वगंधा का सेवन डायबिटीज के पेशेंट को भी फायदा पहुंचता है। अध्ययनों के अनुसार रोजाना अश्वगंधा का सेवन करने से लोगों में खाना खाने के बाद होने वाली ब्लड शुगर लेवल में कमी आती है जिससे मधुमेह के लक्षण कम होने लगते हैं। अगर आपको लगता है कि आप में अत्यधिक मीठा खाने की वजह से डायबिटीज होने का खतरा है तो जल्द ही अश्वगंधा पाउडर का सेवन शुरू कर दें। शुद्ध अश्वगंधा पाउडर व कैप्सूल आर्डर करने के लिए यहां क्लिक करें – अश्वगंधा चूर्ण के फायदे – Ashvgandha Powder ke Fayde अश्वगंधा के चूर्ण (Ashwagandha powder) में भी वही आयुर्वेदिक गुण होते हैं जो इसके सामान्य पत्तों व कैप्सूल और अन्य सप्लीमेंट्स में पाए जाते हैं। अश्वगंधा चूर्ण को यौन स्वास्थ्य के लिए सबसे बेहतर माना जाता है। रोजाना इसके एक चम्मच सेवन से व्यक्ति को ऊर्जा व शक्ति प्राप्त होती है जिससे उसकी सेक्स करने की क्षमता में वृद्धि आती है। प्राचनी काल के आयुर्वेद में अश्वगंधा को कामोतेजना बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाता था। इसके इन्हीं गुणों व कारगर फायदों के चलते मॉडर्न समय के डॉक्टर भी यौन समस्याओं को ठीक करने के लिए इसका इस्तमाल करते हैं। अगर आप शीघ्रपतन, स्टैमिना की कमी व अपने पार्टनर को संतुष्ट करने में सक्षम नहीं हैं तो तुरंत अश्वगंधा चूर्ण आर्डर करें और कल ही से इसका सेवन शुरू करें। पतंजलि से बेहतर व सस्ता अश्वगंधा चूर्ण मगवाने के लिए यहां क्लिक करें। थायराइड के लिए अश्वगंधा का सेवन – Ashwagandha Benefits in Thyroid in Hindi थायराइड हमारे गले के निचे एक फूल जैसा दिखने वाला अंग होता है जो मेटाबोलिज्म, हड्डियों के स्वास्थ्य और वृद्धि में मदद करता है। थायराइड के दो मुख्य विकार होते हैं – हाइपोथायरायडिज्म और हाइपरथायरायडिज्म। लोगों पर किए गए अध्ययनों के अनुसार अश्वगंधा दोनों ही प्रकार के थायराइड को कम करने में मदद करता है। इसके 8 हफ्तों तक सेवन करने से थाइरोइक्सिन के स्तर में कमी आती है व स्ट्रेस भी कम होने लगता है। मनुष्यों पर अभी अधिक अध्ययन नहीं किए गए हैं जिसके कारण थाइराइड के लिए अश्वगंधा का सेवन करना कितना फायदेमंद है इस बात की पुष्टि करना मुश्किल है। प्रतिरक्षा प्रणाली में अश्वगंधा कैप्सूल के फायदे – Benefits of Ashwagandha for Immunity in Hindi इम्यून सिस्टम एक ऐसी चीज है जिसके मजबूत रहने से व्यक्ति को कई सारे संकरण और बैक्टीरिया कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकते। भारत में कई वर्षों से प्रतिरक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए अश्वगंधा का इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसके इन्हीं फायदों व गुणों के चलते इस औषधि पर कई अमेरिकी कंपनियों ने शोध किए। जिनके परिणाम स्वरुप यह पाया गया कि अश्वगंधा से इम्यून सिस्टम स्ट्रांग करने में मदद मिलती है। अश्वगंधा के नियमित सेवन से लाल व सफेद रक्त कोशिकाओं को भी फायदा पहुंचता है। इनमें वृद्धि आने से शरीर में ऑक्सीजन की कमी नहीं होती है। अश्वगंधा के सही इस्तेमाल

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